Wages Code 26अध्याय IV · Payment of Bonus
धारा 26 · बोनस आदि के लिए पात्रता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक कर्मचारी को, जिसका मासिक वेतन उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्धारित राशि से अधिक नहीं है, उसके नियोक्ता द्वारा, जिसने एक लेखा वर्ष में कम से कम तीस दिन काम किया है, वार्षिक न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा, जिसकी गणना कर्मचारी द्वारा अर्जित वेतन के आठ और एक तिहाई प्रतिशत या एक सौ रुपये, जो भी अधिक हो, की दर से की जाएगी, चाहे नियोक्ता के पास पिछले लेखा वर्ष के दौरान कोई आबंटित अधिशेष हो या न हो।
(2) बोनस की गणना के प्रयोजन से, जहाँ कर्मचारी का वेतन उचित सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्धारित मासिक राशि से अधिक हो, उपधारा (1) और (3) के अंतर्गत ऐसे कर्मचारी को देय बोनस की गणना इस प्रकार की जाएगी मानो उसका वेतन उचित सरकार द्वारा निर्धारित राशि या उचित सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन, इनमें से जो भी अधिक हो, उतना हो।
(3) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी लेखा वर्ष के संबंध में आबंटित अधिशेष उस उपधारा के अधीन कर्मचारियों को देय न्यूनतम बोनस की राशि से अधिक हो, तो नियोक्ता उस लेखा वर्ष के संबंध में प्रत्येक कर्मचारी को न्यूनतम बोनस के स्थान पर बोनस का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा, जो लेखा वर्ष के दौरान कर्मचारी द्वारा अर्जित मजदूरी के अनुपात में होगा, और ऐसी मजदूरी के बीस प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अधीन होगा।
(4) इस धारा के अधीन आबंटित अधिशेष की गणना करते समय, धारा 36 के प्रावधानों के तहत निर्धारित राशि या समायोजित राशि को उस धारा के प्रावधानों के अनुसार ध्यान में रखा जाएगा।
(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोनस से अधिक बोनस की कोई भी मांग, चाहे वह उत्पादन या उत्पादकता के आधार पर उस लेखा वर्ष में की गई हो जिसके लिए बोनस देय है, नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच एक समझौते या निपटान द्वारा निर्धारित की जाएगी, इस शर्त के अधीन कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट वार्षिक न्यूनतम बोनस सहित कुल बोनस लेखा वर्ष में कर्मचारी द्वारा अर्जित मजदूरी के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
(6) जिस लेखा वर्ष में नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या ऐसी प्रतिष्ठान से सेवाएं प्रदान करता है, उसके बाद के पहले पांच लेखा वर्षों में, बोनस केवल उसी लेखा वर्ष के लिए देय होगा जिसमें नियोक्ता ऐसी प्रतिष्ठान से लाभ प्राप्त करता है और ऐसे बोनस की गणना उस वर्ष के संबंध में इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी, लेकिन धारा 36 के प्रावधानों को लागू किए बिना।
(7) जिस लेखा वर्ष में नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या सेवाएं प्रदान करता है, उसके बाद आने वाले छठे और सातवें लेखा वर्ष के लिए, धारा 36 के प्रावधान निम्नलिखित संशोधनों के अधीन लागू होंगे, अर्थात्:--
(i) छठे लेखा वर्ष के लिए, जैसा भी मामला हो, समायोजन या समायोजन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से किया जाएगा, जिसमें पाँचवें और छठे लेखा वर्षों के संबंध में समायोजन या समायोजन किए गए आबंटित अधिशेष की अधिकता या कमी, यदि कोई हो, को ध्यान में रखा जाएगा;
(ii) सातवें लेखा वर्ष के लिए, जैसा भी मामला हो, समायोजन या समायोजन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से किया जाएगा, जिसमें पाँचवें, छठे और सातवें लेखा वर्षों के संबंध में समायोजन या समायोजन किए गए आबंटित अधिशेष की अधिकता या कमी, यदि कोई हो, को ध्यान में रखा जाएगा।
(8) लेखा वर्ष के बाद आठवें लेखा वर्ष से, जिसमें नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या सेवाएं प्रदान करता है, जैसा भी मामला हो, ऐसे प्रतिष्ठान से, धारा 36 के प्रावधान ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में लागू होते हैं।
स्पष्टीकरण 1.--उपधारा (6) के प्रयोजन के लिए, किसी नियोक्ता को किसी लेखा वर्ष में लाभ अर्जित करने वाला नहीं माना जाएगा, जब तक कि--
(क) उसने उस वर्ष के लिए मूल्यह्रास का प्रावधान किया है जिसके लिए वह आयकर अधिनियम या, जैसा भी मामला हो, कृषि आयकर कानून के तहत हकदार है; और
(ख) पिछले लेखा वर्षों के लिए प्रतिष्ठान के संबंध में उसके द्वारा अर्जित मूल्यह्रास और हानियों का बकाया उसके लाभों के विरुद्ध पूरी तरह से समायोजित कर दिया गया है।
स्पष्टीकरण 2.-- उपधारा (6), (7) और (8) के प्रयोजनों के लिए, किसी कारखाने के परीक्षण संचालन या किसी खान या तेल क्षेत्र के अन्वेषण चरण के दौरान उत्पादित या निर्मित माल की बिक्री पर विचार नहीं किया जाएगा और जहां ऐसे उत्पादन या निर्माण के संबंध में कोई प्रश्न उठता है, तो उपयुक्त सरकार, पक्षों को मामले का प्रतिनिधित्व करने का उचित अवसर देने के बाद, मुद्दे पर निर्णय ले सकती है।
(9) उपधारा (6), (7) और (8) के प्रावधान, जहां तक संभव हो, मौजूदा प्रतिष्ठानों द्वारा स्थापित नए विभागों या उपक्रमों या शाखाओं पर लागू होंगे।
(2) बोनस की गणना के प्रयोजन से, जहाँ कर्मचारी का वेतन उचित सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा निर्धारित मासिक राशि से अधिक हो, उपधारा (1) और (3) के अंतर्गत ऐसे कर्मचारी को देय बोनस की गणना इस प्रकार की जाएगी मानो उसका वेतन उचित सरकार द्वारा निर्धारित राशि या उचित सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन, इनमें से जो भी अधिक हो, उतना हो।
(3) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी लेखा वर्ष के संबंध में आबंटित अधिशेष उस उपधारा के अधीन कर्मचारियों को देय न्यूनतम बोनस की राशि से अधिक हो, तो नियोक्ता उस लेखा वर्ष के संबंध में प्रत्येक कर्मचारी को न्यूनतम बोनस के स्थान पर बोनस का भुगतान करने के लिए बाध्य होगा, जो लेखा वर्ष के दौरान कर्मचारी द्वारा अर्जित मजदूरी के अनुपात में होगा, और ऐसी मजदूरी के बीस प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अधीन होगा।
(4) इस धारा के अधीन आबंटित अधिशेष की गणना करते समय, धारा 36 के प्रावधानों के तहत निर्धारित राशि या समायोजित राशि को उस धारा के प्रावधानों के अनुसार ध्यान में रखा जाएगा।
(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट बोनस से अधिक बोनस की कोई भी मांग, चाहे वह उत्पादन या उत्पादकता के आधार पर उस लेखा वर्ष में की गई हो जिसके लिए बोनस देय है, नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच एक समझौते या निपटान द्वारा निर्धारित की जाएगी, इस शर्त के अधीन कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट वार्षिक न्यूनतम बोनस सहित कुल बोनस लेखा वर्ष में कर्मचारी द्वारा अर्जित मजदूरी के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
(6) जिस लेखा वर्ष में नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या ऐसी प्रतिष्ठान से सेवाएं प्रदान करता है, उसके बाद के पहले पांच लेखा वर्षों में, बोनस केवल उसी लेखा वर्ष के लिए देय होगा जिसमें नियोक्ता ऐसी प्रतिष्ठान से लाभ प्राप्त करता है और ऐसे बोनस की गणना उस वर्ष के संबंध में इस संहिता के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी, लेकिन धारा 36 के प्रावधानों को लागू किए बिना।
(7) जिस लेखा वर्ष में नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या सेवाएं प्रदान करता है, उसके बाद आने वाले छठे और सातवें लेखा वर्ष के लिए, धारा 36 के प्रावधान निम्नलिखित संशोधनों के अधीन लागू होंगे, अर्थात्:--
(i) छठे लेखा वर्ष के लिए, जैसा भी मामला हो, समायोजन या समायोजन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से किया जाएगा, जिसमें पाँचवें और छठे लेखा वर्षों के संबंध में समायोजन या समायोजन किए गए आबंटित अधिशेष की अधिकता या कमी, यदि कोई हो, को ध्यान में रखा जाएगा;
(ii) सातवें लेखा वर्ष के लिए, जैसा भी मामला हो, समायोजन या समायोजन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से किया जाएगा, जिसमें पाँचवें, छठे और सातवें लेखा वर्षों के संबंध में समायोजन या समायोजन किए गए आबंटित अधिशेष की अधिकता या कमी, यदि कोई हो, को ध्यान में रखा जाएगा।
(8) लेखा वर्ष के बाद आठवें लेखा वर्ष से, जिसमें नियोक्ता अपने द्वारा उत्पादित या निर्मित माल बेचता है या सेवाएं प्रदान करता है, जैसा भी मामला हो, ऐसे प्रतिष्ठान से, धारा 36 के प्रावधान ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में लागू होते हैं।
स्पष्टीकरण 1.--उपधारा (6) के प्रयोजन के लिए, किसी नियोक्ता को किसी लेखा वर्ष में लाभ अर्जित करने वाला नहीं माना जाएगा, जब तक कि--
(क) उसने उस वर्ष के लिए मूल्यह्रास का प्रावधान किया है जिसके लिए वह आयकर अधिनियम या, जैसा भी मामला हो, कृषि आयकर कानून के तहत हकदार है; और
(ख) पिछले लेखा वर्षों के लिए प्रतिष्ठान के संबंध में उसके द्वारा अर्जित मूल्यह्रास और हानियों का बकाया उसके लाभों के विरुद्ध पूरी तरह से समायोजित कर दिया गया है।
स्पष्टीकरण 2.-- उपधारा (6), (7) और (8) के प्रयोजनों के लिए, किसी कारखाने के परीक्षण संचालन या किसी खान या तेल क्षेत्र के अन्वेषण चरण के दौरान उत्पादित या निर्मित माल की बिक्री पर विचार नहीं किया जाएगा और जहां ऐसे उत्पादन या निर्माण के संबंध में कोई प्रश्न उठता है, तो उपयुक्त सरकार, पक्षों को मामले का प्रतिनिधित्व करने का उचित अवसर देने के बाद, मुद्दे पर निर्णय ले सकती है।
(9) उपधारा (6), (7) और (8) के प्रावधान, जहां तक संभव हो, मौजूदा प्रतिष्ठानों द्वारा स्थापित नए विभागों या उपक्रमों या शाखाओं पर लागू होंगे।
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