Advocates Act 8Aअध्याय II · Bar Councils
धारा 8A · निर्वाचन के अभाव में विशेष समिति का गठन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां कोई राज्य विधिज्ञ परिषद्, धारा 8 में निर्दिष्ट, यथास्थिति, पांच वर्ष की पदावधि या बढ़ाई गई पदावधि की समाप्ति के पूर्व अपने सदस्यों के निर्वाचन की व्यवस्था करने में असफल रहती है वहां भारतीय विधिज्ञ परिषद् ऐसी समाप्ति के दिन के ठीक बाद की तारीख से ही, इस अधिनियम के अधीन विधिज्ञ परिषद् का गठन होने तक, राज्य विधिज्ञ परिषद् के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए एक विशेष समिति का गठन करेगी जो निम्नलिखित से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-
(i) धारा 3 की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट राज्य विधिज्ञ परिषद् का पदेन सदस्य जो अध्यक्ष होगा:
परन्तु जहां एक से अधिक पदेन सदस्य हैं वहां उनमें से ज्येष्ठतम सदस्य, अध्यक्ष होगा, और
(ii) दो सदस्य जो राज्य विधिज्ञ परिषद् की निर्वाचक नामवली के अधिवक्ताओं में से भारतीय विधिज्ञ परिषद् द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ।
(2) विशेष समिति का गठन हो जाने पर और राज्य विधिज्ञ परिषद् का गठन किए जाने तक-
(क) राज्य विधिज्ञ परिषद् में निहित सभी सम्पत्ति और आस्तियां, विशेष समिति में निहित होंगी;
(ख) राज्य विधिज्ञ परिषद् के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा से उद्भूत हों या अन्यथा, विशेष समिति के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी;
(ग) राज्य विधिक परिषद् के समक्ष किसी अनुशासनिक विषय की बाबत या अन्यथा लंबित सभी कार्यवाहियां विशेष समिति को अन्तरित हो जाएंगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन गठित विशेष समिति, ऐसे निर्देशों के अनुसार जो भारतीय विधिज्ञ परिषद् इस निमित्त उसे दे, उपधारा (1) के अधीन उसके गठन के तारीख से छह मास की अवधि के भीतर राज्य विधिज्ञ परिषद् के लिए निर्वाचन कराएगी और जहां किसी कारण से विशेष समिति उक्त छह मास की अवधि के भीतर निर्वाचन का संचालन कराने की स्थिति में नहीं है वहां भारतीय विधिज्ञ परिषद् ऐसे कारणों से जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, उक्त अवधि को बढ़ा सकेगी ।]
(i) धारा 3 की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट राज्य विधिज्ञ परिषद् का पदेन सदस्य जो अध्यक्ष होगा:
परन्तु जहां एक से अधिक पदेन सदस्य हैं वहां उनमें से ज्येष्ठतम सदस्य, अध्यक्ष होगा, और
(ii) दो सदस्य जो राज्य विधिज्ञ परिषद् की निर्वाचक नामवली के अधिवक्ताओं में से भारतीय विधिज्ञ परिषद् द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे ।
(2) विशेष समिति का गठन हो जाने पर और राज्य विधिज्ञ परिषद् का गठन किए जाने तक-
(क) राज्य विधिज्ञ परिषद् में निहित सभी सम्पत्ति और आस्तियां, विशेष समिति में निहित होंगी;
(ख) राज्य विधिज्ञ परिषद् के सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं, चाहे वे किसी संविदा से उद्भूत हों या अन्यथा, विशेष समिति के अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं होंगी;
(ग) राज्य विधिक परिषद् के समक्ष किसी अनुशासनिक विषय की बाबत या अन्यथा लंबित सभी कार्यवाहियां विशेष समिति को अन्तरित हो जाएंगी ।
(3) उपधारा (1) के अधीन गठित विशेष समिति, ऐसे निर्देशों के अनुसार जो भारतीय विधिज्ञ परिषद् इस निमित्त उसे दे, उपधारा (1) के अधीन उसके गठन के तारीख से छह मास की अवधि के भीतर राज्य विधिज्ञ परिषद् के लिए निर्वाचन कराएगी और जहां किसी कारण से विशेष समिति उक्त छह मास की अवधि के भीतर निर्वाचन का संचालन कराने की स्थिति में नहीं है वहां भारतीय विधिज्ञ परिषद् ऐसे कारणों से जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, उक्त अवधि को बढ़ा सकेगी ।]
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