Advocates Act 58AFअध्याय VII · Temporary and Transitional Provisions
धारा 58AF · जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे सभी अधिवक्ता जो जम्मू-कश्मीर राज्य में उस तारीख के ठीक पूर्व जिसको अध्याय 3 के उपबन्धों को प्रवृत्त किया जाता है, उस राज्य के उच्च न्यायालय में विधि व्यवसाय करने के हकदार थे, या जो, यदि वे उक्त तारीख को लोक सेवा में न होते तो, इस प्रकार हकदार होते, धारा 17 की उपधारा (1) के खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, भारतीय विधिज्ञ परिषद् अधिनियम, 1926 (1926 का 38) के अधीन किसी उच्च न्यायालय की नामावली में अधिवक्ताओं के रूप में दर्ज किए गए समझे जाएंगे और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, उतने समय के भीतर, जो भारतीय विधिज्ञ परिषद् द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, इस निमित्त किए गए आवेदन पर, उक्त राज्य के सम्बन्ध में रखी गई राज्य नामावली में अधिवक्ता के रूप में प्रविष्ट किया जा सकेगा ।
(2) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक व्यक्ति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में, उस तारीख के ठीक पूर्व जिसको अध्याय 3 के उपबन्धों को प्रवृत्त किया जाता है, अधिवक्ता से भिन्न किसी रूप में विधि व्यवसाय करने का (चाहे अभिवचन द्वारा या दोनों के द्वारा) उक्त राज्य में प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों के आधार पर, हकदार था, या यदि वह उक्त तारीख को लोक सेवा में न होता तो, इस प्रकार हकदार होता, उक्त राज्य के सम्बन्ध में रखी गई राज्य नामावली में अधिवक्ता के रूप में प्रविष्ट किया जा सकेगा, यदि वह, -
(i) इस अधिनियमों के उपबन्धों के अनुसार ऐसे नामांकन के लिए आवेदन करता है; और
(ii) धारा 24 की उपधारा (1) के खंड (क), (ख) और (च) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करता है ।
(3) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस तारीख से ठीक पूर्व, जिसको अध्याय 4 के उपबन्धों को जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त किया जाता है, वहां प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों के आधार पर (चाहे अभिवचन द्वारा या कार्यों के द्वारा या दोनों के द्वारा) विधि व्यवसाय करता था, या जो उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिवक्ता के रूप में नामांकित किए जाने का चयन नहीं करता है या नामांकित किए जाने के लिए अर्हित नहीं है, इस अधिनियम द्वारा ऐसी विधि के सुसंगत उपबन्धों के निरसन के होते हुए भी, किसी न्यायालय या राजस्व कार्यालय में या किसी अन्य प्राधिकरण या व्यक्ति के समक्ष विधि व्यवसाय की बाबत, उन्हीं अधिकारों का उपभोग करता रहेगा और उसी प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता के अधीन बना रहेगा, जिनका, उसने उक्त तारीख के ठीक पूर्व, यथास्थिति, उपभोग किया था या जिसके अधीन वह था, और तदनुसार पूर्वोक्त विधि के सुसंगत उपबन्ध ऐसे व्यक्तियों के सम्बन्ध में वैसे ही प्रभावी होंगे मानो वे निरसित ही नहीं किए गए थे ।
(4) उक्त तारीख को, जिसको यह अधिनियम या इसका कोई भाग जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त होता है, उस राज्य में प्रवृत्त ऐसी विधि भी, जो इस अधिनियम के या उसके ऐसे भाग के तत्समान हों और इस अधिनियम की धारा 50 के उपबन्धों के आधार पर निरसित न हुई हो, निरसित हो जाएगी ।]
(2) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक व्यक्ति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य में, उस तारीख के ठीक पूर्व जिसको अध्याय 3 के उपबन्धों को प्रवृत्त किया जाता है, अधिवक्ता से भिन्न किसी रूप में विधि व्यवसाय करने का (चाहे अभिवचन द्वारा या दोनों के द्वारा) उक्त राज्य में प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों के आधार पर, हकदार था, या यदि वह उक्त तारीख को लोक सेवा में न होता तो, इस प्रकार हकदार होता, उक्त राज्य के सम्बन्ध में रखी गई राज्य नामावली में अधिवक्ता के रूप में प्रविष्ट किया जा सकेगा, यदि वह, -
(i) इस अधिनियमों के उपबन्धों के अनुसार ऐसे नामांकन के लिए आवेदन करता है; और
(ii) धारा 24 की उपधारा (1) के खंड (क), (ख) और (च) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करता है ।
(3) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो उस तारीख से ठीक पूर्व, जिसको अध्याय 4 के उपबन्धों को जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त किया जाता है, वहां प्रवृत्त किसी विधि के उपबन्धों के आधार पर (चाहे अभिवचन द्वारा या कार्यों के द्वारा या दोनों के द्वारा) विधि व्यवसाय करता था, या जो उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अधिवक्ता के रूप में नामांकित किए जाने का चयन नहीं करता है या नामांकित किए जाने के लिए अर्हित नहीं है, इस अधिनियम द्वारा ऐसी विधि के सुसंगत उपबन्धों के निरसन के होते हुए भी, किसी न्यायालय या राजस्व कार्यालय में या किसी अन्य प्राधिकरण या व्यक्ति के समक्ष विधि व्यवसाय की बाबत, उन्हीं अधिकारों का उपभोग करता रहेगा और उसी प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता के अधीन बना रहेगा, जिनका, उसने उक्त तारीख के ठीक पूर्व, यथास्थिति, उपभोग किया था या जिसके अधीन वह था, और तदनुसार पूर्वोक्त विधि के सुसंगत उपबन्ध ऐसे व्यक्तियों के सम्बन्ध में वैसे ही प्रभावी होंगे मानो वे निरसित ही नहीं किए गए थे ।
(4) उक्त तारीख को, जिसको यह अधिनियम या इसका कोई भाग जम्मू-कश्मीर राज्य में प्रवृत्त होता है, उस राज्य में प्रवृत्त ऐसी विधि भी, जो इस अधिनियम के या उसके ऐसे भाग के तत्समान हों और इस अधिनियम की धारा 50 के उपबन्धों के आधार पर निरसित न हुई हो, निरसित हो जाएगी ।]
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