Advocates Act 58ADअध्याय VII · Temporary and Transitional Provisions
धारा 58AD · भारत में प्रवास करने वाले कुछ व्यक्तियों की बाबत विशेष उपबन्ध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम द्वारा विधि व्यवसायी अधिनियम, 1879 (1879 का 18) या विधि व्यवसायियों के प्रवेश और नामांकन से सम्बन्धित किसी अन्य विधि के (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् ऐसा अधिनियम या ऐसी विधि कहा गया है) उपबन्धों के निरसन होते हुए भी, प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किसी ऐसे क्षेत्र से, जो 15 अगस्त, 1947 से पूर्व, भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिनिश्चित भारत में समाविष्ट राज्यक्षेत्र था, प्रवास करता है, और ऐसे किसी क्षेत्र में प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उस क्षेत्र में ऐसे प्रवास से पूर्व, प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता रहा है तो ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के सुसंगत उपबन्धों के अधीन, यथास्थिति, प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता के रूप में प्रविष्ट और नामांकित किया जा सकेगा, यदि वह-
(क) ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के अधीन समुचित प्राधिकारी को इस प्रयोजन के लिए आवेदन करता है; और
(ख) भारत का नागरिक है और पूर्वोक्त समुचित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट अन्य शर्तों को यदि कोई हों, पूरी करता है,
और इस अधिनियम द्वारा ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के सुसंगत उपबन्धों के निरसन के होते हुए भी इस प्रकार, नामांकित प्रत्येक प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता को, किसी न्यायालय या राजस्व कार्यालय में या किसी अन्य प्राधिकरण या व्यक्ति के समक्ष विधि व्यवसाय करने की बाबत, वैसे ही अधिकार प्राप्त होंगे और वह ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के सुसंगत उपबंनधों के अनुसार जिस प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता के अधीन होना उसी प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता में वैसे ही बना रहेगा मानो ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि का निरसन ही नहीं किया गया था, और तद्नुसार वे उपबन्ध ऐसे व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रभावी होंगे ।
(क) ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के अधीन समुचित प्राधिकारी को इस प्रयोजन के लिए आवेदन करता है; और
(ख) भारत का नागरिक है और पूर्वोक्त समुचित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट अन्य शर्तों को यदि कोई हों, पूरी करता है,
और इस अधिनियम द्वारा ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के सुसंगत उपबन्धों के निरसन के होते हुए भी इस प्रकार, नामांकित प्रत्येक प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता को, किसी न्यायालय या राजस्व कार्यालय में या किसी अन्य प्राधिकरण या व्यक्ति के समक्ष विधि व्यवसाय करने की बाबत, वैसे ही अधिकार प्राप्त होंगे और वह ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि के सुसंगत उपबंनधों के अनुसार जिस प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता के अधीन होना उसी प्राधिकरण की अनुशासनिक अधिकारिता में वैसे ही बना रहेगा मानो ऐसे अधिनियम या ऐसी विधि का निरसन ही नहीं किया गया था, और तद्नुसार वे उपबन्ध ऐसे व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रभावी होंगे ।
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