Advocates Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएं
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) अधिवक्ता" से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी नामावली में दर्ज अधिवक्ता अभिप्रेत है;
(ख) इस अधिनियम के किसी उपबंध के सम्बन्ध में नियत दिन" से वह दिन अभिप्रेत है जिसको वह उपबन्ध प्रवृत्त होता है;
(घ) विधिज्ञ परिषद्" से इस अधिनियम के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(ङ) भारतीय विधिज्ञ परिषद्" से उन राज्यक्षेत्रों के लिए जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, धारा 4 के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(छ) उच्च न्यायालय" के अन्तर्गत, धारा 34 की उपधारा (1) [और उपधारा (1क)] और धारा 42 तथा धारा 43 के सिवाय, न्यायिक आयुक्त का न्यायालय नहीं है, और किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् के सम्बन्ध में, -
(i) किसी राज्य के लिए या किसी राज्य और एक या अधिक संघ राज्यक्षेत्रों के लिए गठित किसी विधिज्ञ परिषद् की दशा में, उस राज्य का उच्च न्यायालय अभिप्रेत है;
(ii) दिल्ली के लिए गठित विधिज्ञ परिषद् की दशा में [दिल्ली का उच्च न्यायालय] अभिप्रेत है;
(ज) विधि स्नातक" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसने भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है;
(झ) [विधि व्यवसायी" से किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता या वकील, कोई प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता अभिप्रेत है];
(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ट) नामावली" से इस अधिनियम के अधीन तैयार की गई और रखी गई अधिवक्ता नामावली अभिप्रेत है;
(ठ) राज्य" के अन्तर्गत संघ राज्यक्षेत्र नहीं है;
(ड) राज्य विधिज्ञ परिषद्" से धारा 3 के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(ढ) राज्य नामावली" से धारा 17 के अधीन किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् द्वारा तैयार की गई और रखी गई अधिवक्ता नामावली अभिप्रेत है ।
(2) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य या गोवा, दमन और दीव संघ राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, किसी निर्देश का, उस राज्य या उस राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, उस राज्य या राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति, यदि कोई हो, निर्देश है ।
(क) अधिवक्ता" से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी नामावली में दर्ज अधिवक्ता अभिप्रेत है;
(ख) इस अधिनियम के किसी उपबंध के सम्बन्ध में नियत दिन" से वह दिन अभिप्रेत है जिसको वह उपबन्ध प्रवृत्त होता है;
(घ) विधिज्ञ परिषद्" से इस अधिनियम के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(ङ) भारतीय विधिज्ञ परिषद्" से उन राज्यक्षेत्रों के लिए जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है, धारा 4 के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(छ) उच्च न्यायालय" के अन्तर्गत, धारा 34 की उपधारा (1) [और उपधारा (1क)] और धारा 42 तथा धारा 43 के सिवाय, न्यायिक आयुक्त का न्यायालय नहीं है, और किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् के सम्बन्ध में, -
(i) किसी राज्य के लिए या किसी राज्य और एक या अधिक संघ राज्यक्षेत्रों के लिए गठित किसी विधिज्ञ परिषद् की दशा में, उस राज्य का उच्च न्यायालय अभिप्रेत है;
(ii) दिल्ली के लिए गठित विधिज्ञ परिषद् की दशा में [दिल्ली का उच्च न्यायालय] अभिप्रेत है;
(ज) विधि स्नातक" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसने भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है;
(झ) [विधि व्यवसायी" से किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता या वकील, कोई प्लीडर, मुख्तार या राजस्व अभिकर्ता अभिप्रेत है];
(ञ) विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ट) नामावली" से इस अधिनियम के अधीन तैयार की गई और रखी गई अधिवक्ता नामावली अभिप्रेत है;
(ठ) राज्य" के अन्तर्गत संघ राज्यक्षेत्र नहीं है;
(ड) राज्य विधिज्ञ परिषद्" से धारा 3 के अधीन गठित विधिज्ञ परिषद् अभिप्रेत है;
(ढ) राज्य नामावली" से धारा 17 के अधीन किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् द्वारा तैयार की गई और रखी गई अधिवक्ता नामावली अभिप्रेत है ।
(2) इस अधिनियम में किसी ऐसी विधि के प्रति, जो जम्मू-कश्मीर राज्य या गोवा, दमन और दीव संघ राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त नहीं है, किसी निर्देश का, उस राज्य या उस राज्यक्षेत्र के सम्बन्ध में, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह, यथास्थिति, उस राज्य या राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के प्रति, यदि कोई हो, निर्देश है ।
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