Advocates Act 36अध्याय V · Conduct of Advocates
धारा 36 · भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासनिक शक्तियां
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां किसी शिकायत की प्राप्ति पर या अन्यथा, भारतीय विधिज्ञ परिषद् के पास यह विश्वास करने का कारण है कि । । । कोई ऐसा अधिवक्ता, जिसका नाम किसी राज्य नामावली में दर्ज नहीं है, वृत्तिक या अन्य अवचार का दोषी रहा है, वहां वह उस मामले को, अपनी अनुशासन समिति को निपटारे के लिए, निर्दिष्ट करेगी ।
(2) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति, किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति के समक्ष किसी अधिवक्ता के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए लंबित किन्हीं कार्यवाहियों को [या तो स्वप्रेरणा से या किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की रिपोर्ट पर या किसी हितबद्ध व्यक्ति द्वारा] उसको किए गए आवेदन पर, जांच करने के लिए अपने पास वापस ले सकेगी और उसका निपटारा कर सकेगी ।
(3) भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति, इस धारा के अधीन किसी मामले के निपटारे में, धारा 35 में अधिकथित प्रक्रिया का यथाशक्य अनुपालन करेगी, और उस धारा में महाधिवक्ता के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे भारत के महान्यायवादी के प्रति निर्देश हैं ।
(4) इस धारा के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के निपटारे में भारतीय विधिज्ञ परिषद् को अनुशासन समिति कोई ऐसा आदेश दे सकेगी, जो किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति धारा 35 की उपधारा (3) के अधीन दे सकती है और जहां [भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति के पास] जांच के लिए किन्हीं कार्यवाहियों को वापस लिया गया है, वहां सम्बद्ध राज्य विधिज्ञ परिषद् ऐसे आदेश को प्रभावी करेगी ।
(2) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति, किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति के समक्ष किसी अधिवक्ता के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए लंबित किन्हीं कार्यवाहियों को [या तो स्वप्रेरणा से या किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की रिपोर्ट पर या किसी हितबद्ध व्यक्ति द्वारा] उसको किए गए आवेदन पर, जांच करने के लिए अपने पास वापस ले सकेगी और उसका निपटारा कर सकेगी ।
(3) भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति, इस धारा के अधीन किसी मामले के निपटारे में, धारा 35 में अधिकथित प्रक्रिया का यथाशक्य अनुपालन करेगी, और उस धारा में महाधिवक्ता के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे भारत के महान्यायवादी के प्रति निर्देश हैं ।
(4) इस धारा के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के निपटारे में भारतीय विधिज्ञ परिषद् को अनुशासन समिति कोई ऐसा आदेश दे सकेगी, जो किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति धारा 35 की उपधारा (3) के अधीन दे सकती है और जहां [भारतीय विधिज्ञ परिषद् की अनुशासन समिति के पास] जांच के लिए किन्हीं कार्यवाहियों को वापस लिया गया है, वहां सम्बद्ध राज्य विधिज्ञ परिषद् ऐसे आदेश को प्रभावी करेगी ।
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