Advocates Act 15अध्याय II · Bar Councils
धारा 15 · नियम बनाने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) विधिज्ञ परिषद् इस अध्याय के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे-
(क) विधिज्ञ परिषद् के सदस्यों का गुप्त मतदान द्वारा निर्वाचन, जिसके अन्तर्गत वे शर्तें भी हैं जिनके अधीन रहते हुए व्यक्ति डाक मतपत्र द्वारा मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं, निर्वाचक नामावलियां तैयार करना और उनका पुनरीक्षण और वह रीति जिससे निर्वाचन के परिणाम प्रकाशित किए जाएंगे;]
(ग) विधिज्ञ परिषद् के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन की रीति;
(घ) वह रीति, जिससे, और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा विधिज्ञ परिषद् के लिए 4[या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद के लिएट किसी निर्वाचन की विधिमान्यता के बारे में शंकाओं और विवादों का अन्तिम रूप से विनिश्चय किया जाएगा;
(च) विधिज्ञ परिषद् में आकस्मिक रिक्तियों का भरना;
(छ) विधिज्ञ परिषद् के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;
(छक) धारा 6 की उपधारा (2) और धारा 7 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट वित्तीय सहायता देने या विधिक सहायता या सलाह देने के प्रयोजन के लिए विधिज्ञ परिषद् द्वारा एक या अधिक निधियों का गठन;
(छख) निर्धनों के लिए विधिक सहायता और सलाह देने के लिए आयोजन, और उस प्रयोजन के लिए समितियों और उपसमितियों का गठन और उनके कृत्य तथा उन कार्यवाहियों का विवरण जिनके सम्बन्ध में विधिक सहायता या सलाह दी जा सकती है;
(ज) विधिज्ञ परिषद् के अधिवेशन बुलाना और उनका आयोजन, उनमें कारबार का संचालन और उनमें गणूपर्ति के लिए आवश्यक सदस्य-संख्या
(झ) विधिज्ञ परिषद् की किसी समिति का गठन और उसके कृत्य और किसी ऐसी समिति के सदस्यों की पदावधि;
(ञ) ऐसी किसी समिति के अधिवेशन बुलाना और उनका आयोजन, उनमें कारबार के संव्यवहार और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य-संख्या;
(ट) विधिज्ञ परिषद् के सचिव, लेखापाल और अन्य कर्मचारियों की अर्हताएं और उनकी सेवा की शर्तें;
(ठ) विधिज्ञ परिषद् द्वारा लेखा-बहियों तथा अन्य पुस्तकों का रखा जाना;
(ड) लेखापरीक्षकों की नियुक्ति और विधिज्ञ परिषद् के लेखाओं की लेखापरीक्षा ।
(ण) विधिज्ञ परिषद् की निधियों का प्रबन्ध और विनिधान ।
(3) किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् द्वारा इस धारा के अधीन बनाए गए नियम तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक भारतीय विधिज्ञ परिषद् उनका अनुमोदन न कर दे ।
(2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगे-
(क) विधिज्ञ परिषद् के सदस्यों का गुप्त मतदान द्वारा निर्वाचन, जिसके अन्तर्गत वे शर्तें भी हैं जिनके अधीन रहते हुए व्यक्ति डाक मतपत्र द्वारा मतदान के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं, निर्वाचक नामावलियां तैयार करना और उनका पुनरीक्षण और वह रीति जिससे निर्वाचन के परिणाम प्रकाशित किए जाएंगे;]
(ग) विधिज्ञ परिषद् के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन की रीति;
(घ) वह रीति, जिससे, और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा विधिज्ञ परिषद् के लिए 4[या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद के लिएट किसी निर्वाचन की विधिमान्यता के बारे में शंकाओं और विवादों का अन्तिम रूप से विनिश्चय किया जाएगा;
(च) विधिज्ञ परिषद् में आकस्मिक रिक्तियों का भरना;
(छ) विधिज्ञ परिषद् के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य;
(छक) धारा 6 की उपधारा (2) और धारा 7 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट वित्तीय सहायता देने या विधिक सहायता या सलाह देने के प्रयोजन के लिए विधिज्ञ परिषद् द्वारा एक या अधिक निधियों का गठन;
(छख) निर्धनों के लिए विधिक सहायता और सलाह देने के लिए आयोजन, और उस प्रयोजन के लिए समितियों और उपसमितियों का गठन और उनके कृत्य तथा उन कार्यवाहियों का विवरण जिनके सम्बन्ध में विधिक सहायता या सलाह दी जा सकती है;
(ज) विधिज्ञ परिषद् के अधिवेशन बुलाना और उनका आयोजन, उनमें कारबार का संचालन और उनमें गणूपर्ति के लिए आवश्यक सदस्य-संख्या
(झ) विधिज्ञ परिषद् की किसी समिति का गठन और उसके कृत्य और किसी ऐसी समिति के सदस्यों की पदावधि;
(ञ) ऐसी किसी समिति के अधिवेशन बुलाना और उनका आयोजन, उनमें कारबार के संव्यवहार और गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य-संख्या;
(ट) विधिज्ञ परिषद् के सचिव, लेखापाल और अन्य कर्मचारियों की अर्हताएं और उनकी सेवा की शर्तें;
(ठ) विधिज्ञ परिषद् द्वारा लेखा-बहियों तथा अन्य पुस्तकों का रखा जाना;
(ड) लेखापरीक्षकों की नियुक्ति और विधिज्ञ परिषद् के लेखाओं की लेखापरीक्षा ।
(ण) विधिज्ञ परिषद् की निधियों का प्रबन्ध और विनिधान ।
(3) किसी राज्य विधिज्ञ परिषद् द्वारा इस धारा के अधीन बनाए गए नियम तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक भारतीय विधिज्ञ परिषद् उनका अनुमोदन न कर दे ।
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