बीएनएसएस → सीआरपीसी
180 प्रविष्टियाँ
धारा 230 का अनुपालन।
जब किसी पुलिस रिपोर्ट पर शुरू किए गए वारंट मामले में, आरोपी मुकदमे की शुरुआत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश होता है या लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने धारा 230 के प्रावधानों का अनुपालन किया है।
पूरा पढ़ेंधारा 238. धारा 207 का अनुपालन
238. धारा 207 का अनुपालन जब किसी पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित वारंट-मामले में अभियुक्त विचारण के प्रारंभ में मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट अपना यह समाधान कर लेगा कि उसने धारा 207 के उपबंधों का अनुपालन कर लिया है।
पूरा पढ़ेंजब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
(1) अभियुक्त धारा 230 के तहत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराए जाने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर बरी होने के लिए आवेदन कर सकता है। (2) यदि पुलिस रिपोर्ट और धारा 193 के तहत इसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने और अभियुक्त की ऐसी जांच करने के बाद, चाहे शारीरिक रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों…
पूरा पढ़ेंधारा 239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा
239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा यदि पुलिस रिपोर्ट और धारा 173 के अधीन उसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने के पश्चात् और अभियुक्त की ऐसी परीक्षा, यदि कोई हो, करने के पश्चात्, जो मजिस्ट्रेट आवश्यक समझे, तथा अभियोजन और अभियुक्त को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध…
पूरा पढ़ेंजब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
(1) अभियुक्त धारा 230 के तहत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराए जाने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर बरी होने के लिए आवेदन कर सकता है। (2) यदि पुलिस रिपोर्ट और धारा 193 के तहत इसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने और अभियुक्त की ऐसी जांच करने के बाद, चाहे शारीरिक रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
(1) अभियुक्त धारा 230 के तहत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराए जाने की तिथि से साठ दिनों की अवधि के भीतर बरी होने के लिए आवेदन कर सकता है। (2) यदि पुलिस रिपोर्ट और धारा 193 के तहत इसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने और अभियुक्त की ऐसी जांच करने के बाद, चाहे शारीरिक रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों…
पूरा पढ़ेंधारा 239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा
239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा यदि पुलिस रिपोर्ट और धारा 173 के अधीन उसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने के पश्चात् और अभियुक्त की ऐसी परीक्षा, यदि कोई हो, करने के पश्चात्, जो मजिस्ट्रेट आवश्यक समझे, तथा अभियोजन और अभियुक्त को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध…
पूरा पढ़ेंआरोप का निर्धारण।
(1) यदि ऐसे विचार, जांच (यदि कोई हो) और सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट की राय हो कि यह अनुमान लगाने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के अंतर्गत विचारणीय अपराध किया है, जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है और जिसे उसकी राय में वह पर्याप्त रूप से दंडित कर सकता है, तो वह आरोप पर पहली सुनवाई की तारीख से साठ दिनों…
पूरा पढ़ेंधारा 240. आरोप की विरचना
240. आरोप की विरचना (1) यदि ऐसे विचार, परीक्षा, यदि कोई हो, और सुनवाई पर मजिस्ट्रेट की यह राय है कि यह उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है, जो इस अध्याय के अधीन विचारणीय है और जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है तथा जो उसकी राय में उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है, तो…
पूरा पढ़ेंदोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
यदि अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार करता है, तो मजिस्ट्रेट उस स्वीकारोक्ति को दर्ज करेगा और अपने विवेकानुसार उसे दोषी ठहरा सकता है।
पूरा पढ़ेंधारा 241. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
241. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है, तो मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को अभिलिखित करेगा और अपने विवेकानुसार उस पर उसे दोषसिद्ध कर सकेगा।
पूरा पढ़ेंअभियोजन के लिए साक्ष्य।
(1) यदि अभियुक्त अपना पक्ष रखने से इनकार करता है या अपना पक्ष नहीं रखता है, या मुकदमे की मांग करता है, या मजिस्ट्रेट धारा 264 के तहत अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराता है, तो मजिस्ट्रेट गवाहों की परीक्षा के लिए एक तिथि निर्धारित करेगा: बशर्ते कि मजिस्ट्रेट जांच के दौरान पुलिस द्वारा दर्ज किए गए गवाहों के बयान आरोपी को पहले…
पूरा पढ़ेंधारा 242. अभियोजन के लिए साक्ष्य
242. अभियोजन के लिए साक्ष्य (1) यदि अभियुक्त अभिवाक् करने से इनकार करता है या अभिवाक् नहीं करता, या विचारण किए जाने का दावा करता है, अथवा मजिस्ट्रेट धारा 241 के अधीन अभियुक्त को दोषसिद्ध नहीं करता, तो मजिस्ट्रेट साक्षियों की परीक्षा के लिए कोई तारीख नियत करेगा। परन्तु मजिस्ट्रेट अभियुक्त को, पुलिस द्वारा अन्वेषण के…
पूरा पढ़ेंबचाव पक्ष के साक्ष्य।
(1) इसके बाद अभियुक्त को अपना बचाव करने और अपना साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा; और यदि अभियुक्त कोई लिखित बयान देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख में दर्ज करेगा। (2) यदि अभियुक्त, अपना बचाव प्रस्तुत करने के बाद, किसी गवाह की परीक्षा या जिरह के उद्देश्य से उसकी उपस्थिति को बाध्य करने, या किसी दस्तावेज या अन्य…
पूरा पढ़ेंधारा 243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य (1) तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और यदि अभियुक्त कोई लिखित कथन देता है, तो मजिस्ट्रेट उसे अभिलेख के साथ फाइल करेगा। (2) यदि अभियुक्त, अपनी प्रतिरक्षा आरंभ कर देने के पश्चात्, मजिस्ट्रेट से यह आवेदन करता है कि वह किसी साक्षी की…
पूरा पढ़ेंअभियोजन के लिए साक्ष्य।
(1) जब किसी वारंट मामले में, जो पुलिस रिपोर्ट के अलावा किसी अन्य आधार पर दर्ज किया गया हो, आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट अभियोजन की सुनवाई करेगा और अभियोजन के समर्थन में प्रस्तुत किए गए सभी साक्ष्य लेगा। (2) मजिस्ट्रेट अभियोजन पक्ष के आवेदन पर उसके किसी गवाह को समन जारी कर…
पूरा पढ़ेंअभियोजन के लिए साक्ष्य।
(1) जब किसी वारंट मामले में, जो पुलिस रिपोर्ट के अलावा किसी अन्य आधार पर दर्ज किया गया हो, आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है, तो मजिस्ट्रेट अभियोजन की सुनवाई करेगा और अभियोजन के समर्थन में प्रस्तुत किए गए सभी साक्ष्य लेगा। (2) मजिस्ट्रेट अभियोजन पक्ष के आवेदन पर उसके किसी गवाह को समन जारी कर…
पूरा पढ़ेंजब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
(1) यदि धारा 267 में निर्दिष्ट सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद, मजिस्ट्रेट, दर्ज किए जाने वाले कारणों से, यह मानता है कि अभियुक्त के विरुद्ध कोई मामला नहीं बनता है, जो कि खंडन न होने पर उसकी दोषसिद्धि को उचित ठहराएगा, तो मजिस्ट्रेट उसे बरी कर देगा। (2) इस धारा में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे मजिस्ट्रेट को…
पूरा पढ़ेंधारा 245. अभियुक्त कब उन्मोचित किया जाएगा
245. अभियुक्त कब उन्मोचित किया जाएगा (1) यदि धारा 244 में निर्दिष्ट सब साक्ष्य ले लेने पर मजिस्ट्रेट, ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएंगे, यह समझता है कि अभियुक्त के विरुद्ध ऐसा कोई मामला नहीं बनाया गया है, जो यदि उसका खंडन न किया जाए तो उसकी दोषसिद्धि को न्यायानुमत ठहराएगा, तो मजिस्ट्रेट उसे उन्मोचित कर देगा। (2) इस…
पूरा पढ़ेंवह प्रक्रिया जिसमें आरोपी को बरी नहीं किया जाता है।
(1) यदि ऐसा साक्ष्य लिए जाने पर, या मामले के किसी पूर्व चरण में, मजिस्ट्रेट की राय हो कि यह अनुमान लगाने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के अंतर्गत विचारणीय अपराध किया है, जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है और जिसे, उसकी राय में, वह पर्याप्त रूप से दंडित कर सकता है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध लिखित…
पूरा पढ़ेंवह प्रक्रिया जिसमें आरोपी को बरी नहीं किया जाता है।
(1) यदि ऐसा साक्ष्य लिए जाने पर, या मामले के किसी पूर्व चरण में, मजिस्ट्रेट की राय हो कि यह अनुमान लगाने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के अंतर्गत विचारणीय अपराध किया है, जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है और जिसे, उसकी राय में, वह पर्याप्त रूप से दंडित कर सकता है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध लिखित…
पूरा पढ़ेंवह प्रक्रिया जिसमें आरोपी को बरी नहीं किया जाता है।
(1) यदि ऐसा साक्ष्य लिए जाने पर, या मामले के किसी पूर्व चरण में, मजिस्ट्रेट की राय हो कि यह अनुमान लगाने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के अंतर्गत विचारणीय अपराध किया है, जिसका विचारण करने के लिए ऐसा मजिस्ट्रेट सक्षम है और जिसे, उसकी राय में, वह पर्याप्त रूप से दंडित कर सकता है, तो वह अभियुक्त के विरुद्ध लिखित…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
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बचाव पक्ष के साक्ष्य।
इसके बाद अभियुक्त को अपना बचाव प्रस्तुत करने और साक्ष्य पेश करने के लिए कहा जाएगा; और धारा 266 के प्रावधान इस मामले पर लागू होंगे।
पूरा पढ़ेंधारा 247. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
247. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य तब अभियुक्त से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी प्रतिरक्षा आरंभ करे और अपना साक्ष्य पेश करे; और धारा 243 के उपबंध उस मामले को लागू होंगे।
पूरा पढ़ेंदोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
(1) यदि इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में, जिसमें आरोप तय किया गया हो, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निर्दोष पाता है, तो वह बरी करने का आदेश दर्ज करेगा। (2) जहाँ इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, परन्तु धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता, तो वह सजा के…
पूरा पढ़ेंधारा 248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि (1) यदि इस अध्याय के अधीन किसी ऐसे मामले में, जिसमें आरोप विरचित किया गया है, मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी नहीं पाता, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा। (2) जहां इस अध्याय के अधीन किसी मामले में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दोषी पाता है, किंतु धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार…
पूरा पढ़ेंशिकायतकर्ता की अनुपस्थिति।
जब शिकायत के आधार पर कार्यवाही शुरू की गई हो और मामले की सुनवाई के लिए निर्धारित किसी भी दिन शिकायतकर्ता अनुपस्थित हो, और अपराध का विधिवत समझौता किया जा सकता हो या वह संज्ञेय अपराध न हो, तो मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता को उपस्थित होने के लिए तीस दिन का समय देने के बाद, अपने विवेक से, इसमें पहले निहित किसी भी बात के बावजूद,…
पूरा पढ़ेंधारा 249. परिवादी की अनुपस्थिति
249. परिवादी की अनुपस्थिति जब कार्यवाहियां परिवाद पर संस्थित की गई हैं और मामले की सुनवाई के लिए नियत किसी दिन परिवादी अनुपस्थित है तथा अपराध का विधिपूर्वक शमन किया जा सकता है या वह संज्ञेय अपराध नहीं है, तब मजिस्ट्रेट, इसमें इसके पूर्व अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अपने विवेकानुसार, आरोप विरचित किए जाने से…
पूरा पढ़ेंबिना उचित कारण के आरोप लगाने पर मुआवजा।
(1) यदि किसी शिकायत या पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को दी गई सूचना के आधार पर किसी मामले में, एक या एक से अधिक व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष किसी ऐसे अपराध के लिए आरोपित हैं, जिस पर मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, और जिस मजिस्ट्रेट द्वारा मामले की सुनवाई की जाती है वह सभी या किसी भी आरोपी को बरी कर देता है, और मजिस्ट्रेट…
पूरा पढ़ेंधारा 250. युक्तियुक्त कारण के बिना अभियोग लगाने के लिए प्रतिकर
250. युक्तियुक्त कारण के बिना अभियोग लगाने के लिए प्रतिकर (1) यदि परिवाद पर, या पुलिस अधिकारी को या मजिस्ट्रेट को दी गई इत्तिला पर, संस्थित किसी मामले में एक या अधिक व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष ऐसे किसी अपराध के अभियुक्त हैं, जो मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, और वह मजिस्ट्रेट, जिसके द्वारा मामला सुना जाता है, सभी…
पूरा पढ़ेंआरोप का सार बताया जाना चाहिए।
जब किसी समन मामले में आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होता है या उसे लाया जाता है, तो उसे उस अपराध का विवरण बताया जाएगा जिसका उस पर आरोप है, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने की बात स्वीकार करता है या उसके पास बचाव में कुछ कहना है, लेकिन औपचारिक आरोप तय करना आवश्यक नहीं होगा। बशर्ते कि यदि मजिस्ट्रेट आरोप को…
पूरा पढ़ेंधारा 251. अभियोग का सार बताया जाना
251. अभियोग का सार बताया जाना जब किसी समन-मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तब उस अपराध की विशिष्टियां, जिसका वह अभियुक्त है, उसे बताई जाएंगी और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी होने का अभिवाक् करता है या उसे कोई प्रतिरक्षा करनी है, किंतु औपचारिक आरोप विरचित करना आवश्यक न होगा।
पूरा पढ़ेंदोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
यदि अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार करता है, तो मजिस्ट्रेट अभियुक्त द्वारा प्रयुक्त शब्दों में यथासंभव उसका बयान दर्ज करेगा और अपने विवेकानुसार उसे दोषी ठहरा सकता है।
पूरा पढ़ेंधारा 252. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
252. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है, तो मजिस्ट्रेट उस अभिवाक् को यथासंभव उन्हीं शब्दों में अभिलिखित करेगा, जो अभियुक्त द्वारा प्रयोग किए गए हैं, और अपने विवेकानुसार उस पर उसे दोषसिद्ध कर सकेगा।
पूरा पढ़ेंछोटे-मोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि।
(1) जहां धारा 229 के तहत समन जारी किया गया है और आरोपी मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हुए बिना आरोप स्वीकार करना चाहता है, तो वह डाक या संदेशवाहक द्वारा मजिस्ट्रेट को एक पत्र भेजेगा जिसमें उसका निवेदन और समन में निर्दिष्ट जुर्माने की राशि भी होगी। (2) मजिस्ट्रेट अपने विवेक से, अभियुक्त की अनुपस्थिति में, उसके अपराध…
पूरा पढ़ेंधारा 253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि (1) जहां धारा 206 के अधीन कोई समन जारी किया गया है और अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर हुए बिना आरोप के लिए दोषी होने का अभिवचन करना चाहता है, वहां वह मजिस्ट्रेट को डाक द्वारा या संदेशवाहक द्वारा एक पत्र भेजेगा, जिसमें उसका अभिवाक्…
पूरा पढ़ेंदोषी न ठहराए जाने की स्थिति में प्रक्रिया।
(1) यदि मजिस्ट्रेट धारा 275 या धारा 276 के तहत अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराता है, तो मजिस्ट्रेट अभियोजन पक्ष की सुनवाई करेगा और अभियोजन पक्ष के समर्थन में प्रस्तुत किए गए सभी साक्ष्य लेगा, और अभियुक्त की भी सुनवाई करेगा और उसके बचाव में प्रस्तुत किए गए सभी साक्ष्य लेगा। (2) मजिस्ट्रेट, यदि वह उचित समझे, तो अभियोजन पक्ष…
पूरा पढ़ेंधारा 254. दोषसिद्ध न किए जाने पर प्रक्रिया
254. दोषसिद्ध न किए जाने पर प्रक्रिया (1) यदि मजिस्ट्रेट अभियुक्त को धारा 252 या धारा 253 के अधीन दोषसिद्ध नहीं करता है, तो मजिस्ट्रेट अभियोजन को सुनने और ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए, जो अभियोजन के समर्थन में पेश किया जाए, तथा अभियुक्त को सुनने और ऐसा सब साक्ष्य लेने के लिए, जो वह अपनी प्रतिरक्षा में पेश करे, अग्रसर…
पूरा पढ़ेंदोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
(1) यदि मजिस्ट्रेट धारा 277 में निर्दिष्ट साक्ष्य और ऐसे अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वयं प्रस्तुत करवाए, पर विचार करने के बाद अभियुक्त को निर्दोष पाता है, तो वह बरी करने का आदेश दर्ज करेगा। (2) जहाँ मजिस्ट्रेट धारा 364 या धारा 401 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, तो यदि वह अभियुक्त को दोषी…
पूरा पढ़ेंधारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि (1) यदि मजिस्ट्रेट, धारा 254 में निर्दिष्ट साक्ष्य तथा ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य, यदि कोई हो, जो वह स्वप्रेरणा से पेश कराए, लेने पर अभियुक्त को दोषी नहीं पाता है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा। (2) जहां मजिस्ट्रेट धारा 325 या धारा 360 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही नहीं करता है, वहां…
पूरा पढ़ेंशिकायतकर्ता की अनुपस्थिति या मृत्यु।
(1) यदि शिकायत पर समन जारी किया गया है, और आरोपी की उपस्थिति के लिए निर्धारित दिन पर, या उसके बाद किसी ऐसे दिन पर जिस पर सुनवाई स्थगित की जा सकती है, शिकायतकर्ता उपस्थित नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता को उपस्थित होने के लिए तीस दिन का समय देने के बाद, इसमें पहले निहित किसी भी बात के बावजूद, आरोपी को बरी कर…
पूरा पढ़ेंधारा 256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु
256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु (1) यदि समन परिवाद पर जारी किया गया है और अभियुक्त की हाजिरी के लिए नियत दिन को, अथवा उसके पश्चात्वर्ती किसी ऐसे दिन को जिसके लिए सुनवाई स्थगित की जाए, परिवादी हाजिर नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट, इसमें इसके पूर्व अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अभियुक्त को दोषमुक्त कर देगा, जब…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि कोई शिकायतकर्ता, इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय, मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर देता है कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हैं, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर दे कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हों, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
शिकायत के अलावा किसी अन्य तरीके से दायर किए गए किसी भी समन मामले में, प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व स्वीकृति से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, बिना कोई निर्णय सुनाए किसी भी स्तर पर कार्यवाही रोक सकता है, और यदि मुख्य गवाहों के साक्ष्य…
पूरा पढ़ेंधारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति किसी ऐसे समन-मामले में, जो परिवाद पर संस्थित मामले से भिन्न है, प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम पर कोई निर्णय सुनाए बिना रोक…
पूरा पढ़ेंन्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
जब किसी ऐसे अपराध से संबंधित समन मामले की सुनवाई के दौरान, जिसके लिए छह महीने से अधिक की कारावास की सजा का प्रावधान है, मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में, अपराध की सुनवाई वारंट मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए, तो मजिस्ट्रेट इस संहिता में वारंट मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित…
पूरा पढ़ेंधारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति जब छह मास से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध से संबंधित समन-मामले के विचारण के दौरान मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में उस अपराध का विचारण वारंट-मामलों के विचारण के लिए उपबंधित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए, तब ऐसा…
पूरा पढ़ेंसंक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट, निम्नलिखित में से सभी या किसी भी अपराध का संक्षिप्त तरीके से निपटारा किया जाएगा:— (i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अंतर्गत चोरी, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का…
पूरा पढ़ेंधारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति (1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) कोई महानगर मजिस्ट्रेट; (ग) प्रथम वर्ग का कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया है, यदि ठीक समझे तो निम्नलिखित सब या किन्हीं अपराधों का विचारण संक्षिप्त रूप…
पूरा पढ़ेंसंक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट, निम्नलिखित में से सभी या किसी भी अपराध का संक्षिप्त तरीके से निपटारा किया जाएगा:— (i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अंतर्गत चोरी, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का…
पूरा पढ़ेंधारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति (1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) कोई महानगर मजिस्ट्रेट; (ग) प्रथम वर्ग का कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया है, यदि ठीक समझे तो निम्नलिखित सब या किन्हीं अपराधों का विचारण संक्षिप्त रूप…
पूरा पढ़ेंसंक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट, निम्नलिखित में से सभी या किसी भी अपराध का संक्षिप्त तरीके से निपटारा किया जाएगा:— (i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अंतर्गत चोरी, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का…
पूरा पढ़ेंधारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति (1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) कोई महानगर मजिस्ट्रेट; (ग) प्रथम वर्ग का कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया है, यदि ठीक समझे तो निम्नलिखित सब या किन्हीं अपराधों का विचारण संक्षिप्त रूप…
पूरा पढ़ेंद्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
उच्च न्यायालय द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से युक्त किसी भी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी भी अपराध की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्रदान कर सकता है जो केवल जुर्माने या छह महीने से अधिक की अवधि के कारावास (जुर्माने सहित या बिना जुर्माने के) से दंडनीय हो, और ऐसे किसी भी अपराध के लिए उकसाने या प्रयास करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण उच्च न्यायालय, द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से निहित किसी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी अपराध का, जो केवल जुर्माने से, या छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास से, जुर्माने सहित या रहित, दंडनीय है, तथा ऐसे किसी अपराध के दुष्प्रेरण या उसे करने के प्रयत्न का,…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
(1) इस अध्याय के अंतर्गत मुकदमों में, समन-मामलों के मुकदमे के लिए इस संहिता में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, सिवाय इसके कि जैसा कि आगे उल्लेख किया गया है। (2) इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी दोषसिद्धि के मामले में तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास की सजा नहीं दी जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया (1) इस अध्याय के अधीन विचारणों में, इसमें इसके पश्चात् वर्णित बातों के सिवाय, समन-मामलों के विचारण के लिए इस संहिता में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा। (2) इस अध्याय के अधीन किसी दोषसिद्धि की दशा में तीन मास से अधिक की अवधि के कारावास का दंडादेश नहीं दिया जाएगा।
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
संक्षिप्त सुनवाई वाले प्रत्येक मामले में, मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा निर्देशित प्रपत्र में निम्नलिखित विवरण दर्ज करेगा, अर्थात्:— (क) मामले का क्रमांक; (ख) अपराध किए जाने की तिथि; (ग) रिपोर्ट या शिकायत की तिथि; (घ) शिकायतकर्ता का नाम (यदि कोई हो); (ई) अभियुक्त का नाम, पिता का नाम और निवास स्थान; (f) शिकायत किया गया…
पूरा पढ़ेंधारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख संक्षेपतः विचारित प्रत्येक मामले में मजिस्ट्रेट, ऐसे प्ररूप में जैसा राज्य सरकार निदेश दे, निम्नलिखित विशिष्टियां प्रविष्ट करेगा, अर्थात्:— (क) मामले की क्रम संख्या; (ख) अपराध किए जाने की तारीख; (ग) रिपोर्ट या परिवाद की तारीख; (घ) परिवादी का नाम (यदि कोई हो); (ङ) अभियुक्त का नाम,…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
प्रत्येक ऐसे मामले में जिसकी संक्षिप्त सुनवाई की जाती है और जिसमें आरोपी अपना अपराध स्वीकार नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्यों का सार और निर्णय दर्ज करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त विवरण होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय संक्षेपतः विचारित प्रत्येक ऐसे मामले में, जिसमें अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्य का सार और ऐसा निर्णय अभिलिखित करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन हो।
पूरा पढ़ेंरिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
(1) ऐसा प्रत्येक अभिलेख एवं निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय किसी भी मजिस्ट्रेट को, जिसे अपराधों की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में नियुक्त अधिकारी के माध्यम से उपर्युक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों तैयार करने के लिए अधिकृत कर सकता है, और…
पूरा पढ़ेंधारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
265. अभिलेख और निर्णय की भाषा (1) प्रत्येक ऐसा अभिलेख और निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय, अपराधों का संक्षेपतः विचारण करने के लिए सशक्त किसी मजिस्ट्रेट को यह प्राधिकार दे सकेगा कि वह पूर्वोक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी के…
पूरा पढ़ेंअध्याय का अनुप्रयोग।
(1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा धारा 193 के तहत रिपोर्ट भेजी गई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो उस अपराध से इतर है जिसके लिए उस समय लागू कानून के तहत मृत्युदंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से…
पूरा पढ़ेंधारा 265A. अध्याय का लागू होना
265A. अध्याय का लागू होना (1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा धारा 173 के अधीन यह अभिकथन करते हुए रिपोर्ट भेजी गई है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो ऐसा अपराध नहीं है जिसके लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन मृत्यु या आजीवन कारावास…
पूरा पढ़ेंसमझौता ज्ञापन के लिए आवेदन।
(1) किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति, उस न्यायालय में, जिसमें ऐसा अपराध विचाराधीन है, आरोप तय होने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन दाखिल कर सकता है। (2) उपधारा (1) के अंतर्गत आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त विवरण होना चाहिए जिसके संबंध में आवेदन दाखिल किया गया है, जिसमें उस अपराध का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन
265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन (1) किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में, जिसमें ऐसा अपराध विचारण के लिए लंबित है, अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा। (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन में उस मामले का संक्षिप्त वर्णन होगा जिससे संबंधित वह आवेदन फाइल किया गया है, जिसके अंतर्गत वह अपराध भी है जिससे…
पूरा पढ़ेंपारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान के लिए दिशानिर्देश।
धारा 290 की उपधारा (4) के खंड (क) के तहत पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान करते समय न्यायालय निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करेगा, अर्थात्:— (क) पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज किए गए किसी मामले में, न्यायालय लोक अभियोजक, मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी, आरोपी और पीड़ित को मामले के संतोषजनक निपटारे के लिए बैठक में भाग लेने…
पूरा पढ़ेंधारा 265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत धारा 265ख की उपधारा (4) के खंड (क) के अधीन पारस्परिक संतोषप्रद निपटारा तैयार करने में, न्यायालय निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, अर्थात्:— (क) पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामले में, न्यायालय लोक अभियोजक को, उस पुलिस अधिकारी को जिसने मामले का अन्वेषण किया…
पूरा पढ़ेंआपसी सहमति से हुए समझौते की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
जहां धारा 291 के तहत हुई बैठक में मामले का संतोषजनक निपटारा हो गया हो, वहां न्यायालय ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी और बैठक में भाग लेने वाले अन्य सभी व्यक्तियों के हस्ताक्षर होंगे। यदि ऐसा कोई निपटारा नहीं हुआ है, तो न्यायालय इस अवलोकन को दर्ज करेगा और इस संहिता के प्रावधानों के…
पूरा पढ़ेंधारा 265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना
265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना जहां धारा 265ग के अधीन किसी बैठक में मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा और उन सभी अन्य व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे…
पूरा पढ़ेंमामले का निपटारा।
जहां धारा 292 के तहत मामले का संतोषजनक निपटारा हो चुका हो, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित तरीके से करेगा, अर्थात्:— (क) न्यायालय धारा 292 के अधीन किए गए निर्णय के अनुसार पीड़ित को मुआवजा प्रदान करेगा और सजा की मात्रा, अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर या धारा 401 के तहत चेतावनी के बाद अभियुक्त को रिहा करने या…
पूरा पढ़ेंधारा 265E. मामले का निपटारा
265E. मामले का निपटारा जहां धारा 265घ के अधीन मामले का संतोषप्रद निपटारा तैयार कर लिया गया है, वहां न्यायालय मामले का निपटारा निम्नलिखित रीति से करेगा, अर्थात्:— (क) न्यायालय धारा 265घ के अधीन निपटारे के अनुसार पीड़ित को प्रतिकर अधिनिर्णीत करेगा और दंड की मात्रा पर, धारा 360 के अधीन सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना…
पूरा पढ़ेंन्यायालय का निर्णय।
न्यायालय धारा 293 के अनुसार खुले न्यायालय में अपना निर्णय सुनाएगा और उस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे।
पूरा पढ़ेंधारा 265F. न्यायालय का निर्णय
265F. न्यायालय का निर्णय न्यायालय धारा 265ङ के निबंधनों में अपना निर्णय खुले न्यायालय में सुनाएगा और उस पर न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
पूरा पढ़ेंनिर्णय की अंतिमता।
इस धारा के तहत न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम होगा और ऐसे निर्णय के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में कोई अपील (संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका और अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका को छोड़कर) नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 265G. निर्णय की अंतिमता
265G. निर्णय की अंतिमता धारा 265च के अधीन न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम होगा और ऐसे निर्णय के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई अपील (संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन विशेष इजाजत याचिका तथा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 227 के अधीन रिट याचिका के सिवाय) नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंसमझौता ज्ञापन में न्यायालय की शक्ति।
इस अध्याय के अंतर्गत अपने कार्यों के निर्वहन हेतु न्यायालय को इस संहिता के अंतर्गत जमानत, अपराधों के परीक्षण और किसी मामले के निपटारे से संबंधित अन्य मामलों के संबंध में प्राप्त सभी शक्तियां प्राप्त होंगी।
पूरा पढ़ेंधारा 265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति
265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति इस अध्याय के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए न्यायालय को वे सभी शक्तियां होंगी जो इस संहिता के अधीन ऐसे न्यायालय में जमानत, अपराधों के विचारण और मामले के निपटारे से संबंधित अन्य विषयों की बाबत निहित हैं।
पूरा पढ़ेंअभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
इस अध्याय के अंतर्गत लगाए गए कारावास की सजा के विरुद्ध अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को समायोजित करने के लिए धारा 468 के प्रावधान उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे इस संहिता के अन्य प्रावधानों के अंतर्गत कारावास के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ेंधारा 265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना
265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना इस अध्याय के अधीन अधिरोपित कारावास के दंडादेश में अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का मुजरा करने के लिए धारा 428 के उपबंध उसी रीति से लागू होंगे जिस रीति से वे इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन कारावास के संबंध में लागू होते हैं।
पूरा पढ़ेंबचत।
इस अध्याय के प्रावधान इस संहिता के किसी अन्य प्रावधान में निहित किसी भी असंगत बात के बावजूद प्रभावी होंगे और ऐसे अन्य प्रावधानों में किसी भी बात को इस अध्याय के किसी भी प्रावधान के अर्थ को सीमित करने के रूप में नहीं समझा जाएगा। स्पष्टीकरण। —इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, "लोक अभियोजक" अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा जो…
पूरा पढ़ेंधारा 265J. व्यावृत्ति
265J. व्यावृत्ति इस अध्याय के उपबंध, इस संहिता के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे और ऐसे अन्य उपबंधों की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह इस अध्याय के किसी उपबंध के अर्थ को निर्बंधित करती है। स्पष्टीकरण—इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, "लोक अभियोजक" पद का वही…
पूरा पढ़ेंअभियुक्तों के बयान का उपयोग नहीं किया जाएगा।
किसी भी कानून में फिलहाल लागू किसी भी बात के होते हुए भी, धारा 290 के तहत दायर प्ली बार्गेनिंग आवेदन में आरोपी द्वारा दिए गए बयान या तथ्यों का उपयोग इस अध्याय के उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना
265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुए भी, धारा 265B के अधीन फाइल किए गए सौदा अभिवाक् के आवेदन में अभियुक्त द्वारा किए गए कथनों या उसमें कथित तथ्यों का उपयोग, इस अध्याय के प्रयोजन से भिन्न किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंअध्याय का लागू न होना।
इस अध्याय में कोई भी बात किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2 ऑफ 2016) की धारा 2 में परिभाषित किसी किशोर या बच्चे पर लागू नहीं होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 265L. अध्याय का लागू न होना
265L. अध्याय का लागू न होना इस अध्याय की कोई बात किसी ऐसे किशोर या बालक को लागू नहीं होगी जो किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (2000 का 56) की धारा 2 के खंड (ट) में यथापरिभाषित है।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस अध्याय में,--- (क) "हिरासत में लिया गया" में निवारक हिरासत का प्रावधान करने वाले किसी भी कानून के तहत हिरासत में लिया गया शामिल है; (ख) "कारागार" में निम्नलिखित शामिल हैं,--- (i) कोई भी स्थान जिसे राज्य सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा सहायक कारागार घोषित किया गया हो; (ii) कोई सुधारगृह, बोर्स्टल संस्था या…
पूरा पढ़ेंधारा 266. परिभाषाएं
266. परिभाषाएं इस अध्याय में,— (क) "निरुद्ध" के अंतर्गत निवारक निरोध के लिए उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन निरुद्ध होना भी है; (ख) "कारागार" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं,— (i) कोई ऐसा स्थान, जिसे राज्य सरकार ने, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, सहायक जेल घोषित किया है; (ii) कोई सुधारालय, बोर्स्टल संस्था या वैसी ही…
पूरा पढ़ेंकैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
(1) जब भी, इस संहिता के अंतर्गत किसी जाँच, परीक्षण या कार्यवाही के दौरान, किसी आपराधिक न्यायालय को यह प्रतीत हो कि,--- (क) कि किसी कारागार में बंद या हिरासत में रखे गए व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन से न्यायालय के समक्ष लाया जाए; या (ख) न्याय के उद्देश्यों…
पूरा पढ़ेंधारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति (1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी दंड न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि— (क) किसी कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध व्यक्ति को किसी अपराध के आरोप का उत्तर देने के लिए, या उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए, न्यायालय के…
पूरा पढ़ेंधारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
(1) राज्य सरकार या केंद्र सरकार, जैसा भी मामला हो, उपधारा (2) में निर्दिष्ट मामलों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को उस कारागार से नहीं हटाया जाएगा जिसमें वे बंद या हिरासत में हैं, और इसके बाद, जब तक यह आदेश लागू रहता है, धारा…
पूरा पढ़ेंधारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति (1) राज्य सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि किसी व्यक्ति को या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उस कारागार से, जिसमें वह या वे परिरुद्ध या निरुद्ध…
पूरा पढ़ेंकुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
जहां वह व्यक्ति जिसके संबंध में धारा 302 के तहत आदेश दिया गया है--- (क) बीमारी या दुर्बलता के कारण कारागार से निकाले जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) मुकदमे की सुनवाई के लिए हिरासत में है या मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने तक या प्रारंभिक जांच लंबित रहने तक हिरासत में है; या (ग) वह ऐसी अवधि के लिए हिरासत में है जो आदेश का…
पूरा पढ़ेंधारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 267 के अधीन आदेश दिया गया है,— (क) रुग्णता या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या (ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण लंबित रहने तक अथवा प्रारंभिक अन्वेषण…
पूरा पढ़ेंकैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
धारा 304 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कारागार प्रभारी अधिकारी, धारा 302 की उपधारा (1) के तहत जारी किए गए और आवश्यक होने पर उसकी उपधारा (2) के तहत विधिवत प्रतिहस्ताक्षरित आदेश की प्राप्ति पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाने की व्यवस्था करेगा जिसमें उसकी उपस्थिति आवश्यक है, ताकि वह आदेश में उल्लिखित…
पूरा पढ़ेंधारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना धारा 269 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन किए गए और, जहां आवश्यक हो वहां, उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को उस न्यायालय में ले जाएगा जिसमें उसकी…
पूरा पढ़ें- BNSS §261CRPC §238
धारा 230 का अनुपालन।
धारा 238. धारा 207 का अनुपालन
- BNSS §262CRPC §239बदलाव हुआ
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
धारा 239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा
- BNSS §262(1)CRPC §New Sub-Section
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
नई उपधारा
BNSS §262(1)CRPC §New Sub-Section - BNSS §262CRPC §239
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
धारा 239. कब अभियुक्त उन्मोचित किया जाएगा
- BNSS §263CRPC §240बदलाव हुआ
आरोप का निर्धारण।
धारा 240. आरोप की विरचना
- BNSS §264CRPC §241
दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
धारा 241. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
- BNSS §265CRPC §242बदलाव हुआ
अभियोजन के लिए साक्ष्य।
धारा 242. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- BNSS §266CRPC §243बदलाव हुआ
बचाव पक्ष के साक्ष्य।
धारा 243. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
- BNSS §267CRPC §244
अभियोजन के लिए साक्ष्य।
- BNSS §268CRPC §245
जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा।
धारा 245. अभियुक्त कब उन्मोचित किया जाएगा
- BNSS §269CRPC §246बदलाव हुआ
वह प्रक्रिया जिसमें आरोपी को बरी नहीं किया जाता है।
- BNSS §269(7)CRPC §New Sub-Section
वह प्रक्रिया जिसमें आरोपी को बरी नहीं किया जाता है।
नई उपधारा
BNSS §269(7)CRPC §New Sub-Section - BNSS §270CRPC §247
बचाव पक्ष के साक्ष्य।
धारा 247. प्रतिरक्षा के लिए साक्ष्य
- BNSS §271CRPC §248
दोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
धारा 248. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- BNSS §272CRPC §249बदलाव हुआ
शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति।
धारा 249. परिवादी की अनुपस्थिति
- BNSS §273CRPC §250बदलाव हुआ
बिना उचित कारण के आरोप लगाने पर मुआवजा।
धारा 250. युक्तियुक्त कारण के बिना अभियोग लगाने के लिए प्रतिकर
- BNSS §274CRPC §251बदलाव हुआ
आरोप का सार बताया जाना चाहिए।
धारा 251. अभियोग का सार बताया जाना
- BNSS §275CRPC §252
दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि।
धारा 252. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
- BNSS §276CRPC §253
छोटे-मोटे मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में दोषी होने की स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि।
धारा 253. क्षुद्र मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि
- BNSS §277CRPC §254
दोषी न ठहराए जाने की स्थिति में प्रक्रिया।
धारा 254. दोषसिद्ध न किए जाने पर प्रक्रिया
- BNSS §278CRPC §255
दोषमुक्ति या दोषसिद्धि।
धारा 255. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- BNSS §279CRPC §256बदलाव हुआ
शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति या मृत्यु।
धारा 256. परिवादी की अनुपस्थिति या मृत्यु
- BNSS §280CRPC §257
शिकायत वापस लेना।
- BNSS §281CRPC §258
कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
धारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
- BNSS §282CRPC §259
न्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
धारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
- BNSS §283CRPC §260 (1)बदलाव हुआ
संक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
धारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
- BNSS §283CRPC §260 (1)
संक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
धारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
- BNSS §283CRPC §260 (2)
संक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
धारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
- BNSS §284CRPC §261
द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
धारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
- BNSS §285CRPC §262
संक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
धारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
- BNSS §286CRPC §263
संक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
धारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
- BNSS §287CRPC §264
संक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
धारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
- BNSS §288CRPC §265
रिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
धारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
- BNSS §289CRPC §265Aबदलाव हुआ
अध्याय का अनुप्रयोग।
धारा 265A. अध्याय का लागू होना
- BNSS §290CRPC §265Bबदलाव हुआ
समझौता ज्ञापन के लिए आवेदन।
धारा 265B. अभिवाक् सौदेबाजी के लिए आवेदन
- BNSS §291CRPC §265C
पारस्परिक रूप से संतोषजनक निपटान के लिए दिशानिर्देश।
धारा 265C. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत
- BNSS §292CRPC §265D
आपसी सहमति से हुए समझौते की रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
धारा 265D. पारस्परिक संतोषप्रद निपटारे की रिपोर्ट का न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना
- BNSS §293CRPC §265Eबदलाव हुआ
मामले का निपटारा।
धारा 265E. मामले का निपटारा
- BNSS §294CRPC §265F
न्यायालय का निर्णय।
धारा 265F. न्यायालय का निर्णय
- BNSS §295CRPC §265G
निर्णय की अंतिमता।
धारा 265G. निर्णय की अंतिमता
- BNSS §296CRPC §265H
समझौता ज्ञापन में न्यायालय की शक्ति।
धारा 265H. अभिवाक् सौदेबाजी में न्यायालय की शक्ति
- BNSS §297CRPC §265-I
अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
धारा 265I. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश में मुजरा किया जाना
- BNSS §298CRPC §265J
बचत।
धारा 265J. व्यावृत्ति
- BNSS §299CRPC §265K
अभियुक्तों के बयान का उपयोग नहीं किया जाएगा।
धारा 265K. अभियुक्त के कथनों का उपयोग न किया जाना
- BNSS §300CRPC §265L
अध्याय का लागू न होना।
धारा 265L. अध्याय का लागू न होना
- BNSS §301CRPC §266
परिभाषाएँ।
धारा 266. परिभाषाएं
- BNSS §302CRPC §267
कैदियों की उपस्थिति अनिवार्य करने का अधिकार।
धारा 267. बंदियों की उपस्थिति अपेक्षित करने की शक्ति
- BNSS §303CRPC §268बदलाव हुआ
धारा 302 के संचालन से कुछ व्यक्तियों को बाहर करने की राज्य सरकार या केंद्र सरकार की शक्ति।
धारा 268. कतिपय व्यक्तियों को धारा 267 के प्रवर्तन से अपवर्जित करने की राज्य सरकार की शक्ति
- BNSS §304CRPC §269
कुछ विशेष परिस्थितियों में कारागार प्रभारी अधिकारी को आदेश का पालन करने से परहेज करने का अधिकार है।
धारा 269. कुछ आकस्मिकताओं में कारागार के भारसाधक अधिकारी द्वारा आदेश का पालन करने से विरत रहना
- BNSS §305CRPC §270
कैदी को हिरासत में अदालत में लाया जाएगा।
धारा 270. बंदी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
