NCISM Act 28अध्याय V · Autonomous Boards
धारा 28 · भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड की शक्तियां एवं कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड निम्नलिखित कार्य करेगा, अर्थात्:--
(क) आयुर्वेद बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुपालन के आधार पर चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग की प्रक्रिया निर्धारित करना;
(ख) धारा 29 के प्रावधानों के अनुसार किसी नए चिकित्सा संस्थान की स्थापना या किसी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने या सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए अनुमति प्रदान करना;
(ग) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार चिकित्सा संस्थानों का आकलन और रेटिंग करने हेतु उनका निरीक्षण करना:
बशर्ते कि भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड, यदि आवश्यक समझे तो, चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण करने और उनका मूल्यांकन एवं रेटिंग करने के लिए किसी अन्य तृतीय पक्ष एजेंसी या व्यक्ति को नियुक्त एवं अधिकृत कर सकता है:
इसके अलावा, यदि चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड द्वारा अधिकृत किसी तृतीय पक्ष एजेंसी या व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, तो ऐसे संस्थानों के लिए ऐसी एजेंसी या व्यक्ति को पहुंच प्रदान करना अनिवार्य होगा;
(घ) सभी चिकित्सा संस्थानों के खुलने की अवधि के दौरान और उसके बाद प्रत्येक वर्ष, ऐसे समय और ऐसे तरीके से, जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, स्वतंत्र रेटिंग एजेंसियों का संचालन करना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें रेटिंग देना, या जहां वह आवश्यक समझे, उन्हें पैनल में शामिल करना;
(ई) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार, नियमित अंतराल पर अपनी वेबसाइट पर या सार्वजनिक डोमेन में चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग उपलब्ध कराना;
(f) आयुर्वेद बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, यूनानी, सिद्ध और सौवरिग्पा बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार निर्दिष्ट न्यूनतम आवश्यक मानकों को बनाए रखने में विफल रहने पर किसी चिकित्सा संस्थान के विरुद्ध चेतावनी जारी करना, आर्थिक दंड लगाना, प्रवेश कम करना या प्रवेश रोकना तथा मान्यता वापस लेने के लिए आयोग को अनुशंसा करना जैसे उपाय करना।
(2) भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड अपने कार्यों के निर्वहन में आयोग को ऐसी सिफारिशें कर सकता है और आयोग से ऐसे निर्देश मांग सकता है, जैसा वह आवश्यक समझे।
(क) आयुर्वेद बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुपालन के आधार पर चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग की प्रक्रिया निर्धारित करना;
(ख) धारा 29 के प्रावधानों के अनुसार किसी नए चिकित्सा संस्थान की स्थापना या किसी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने या सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए अनुमति प्रदान करना;
(ग) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार चिकित्सा संस्थानों का आकलन और रेटिंग करने हेतु उनका निरीक्षण करना:
बशर्ते कि भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड, यदि आवश्यक समझे तो, चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण करने और उनका मूल्यांकन एवं रेटिंग करने के लिए किसी अन्य तृतीय पक्ष एजेंसी या व्यक्ति को नियुक्त एवं अधिकृत कर सकता है:
इसके अलावा, यदि चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड द्वारा अधिकृत किसी तृतीय पक्ष एजेंसी या व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, तो ऐसे संस्थानों के लिए ऐसी एजेंसी या व्यक्ति को पहुंच प्रदान करना अनिवार्य होगा;
(घ) सभी चिकित्सा संस्थानों के खुलने की अवधि के दौरान और उसके बाद प्रत्येक वर्ष, ऐसे समय और ऐसे तरीके से, जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, स्वतंत्र रेटिंग एजेंसियों का संचालन करना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें रेटिंग देना, या जहां वह आवश्यक समझे, उन्हें पैनल में शामिल करना;
(ई) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार, नियमित अंतराल पर अपनी वेबसाइट पर या सार्वजनिक डोमेन में चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग उपलब्ध कराना;
(f) आयुर्वेद बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, यूनानी, सिद्ध और सौवरिग्पा बोर्ड द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए विनियमों के अनुसार निर्दिष्ट न्यूनतम आवश्यक मानकों को बनाए रखने में विफल रहने पर किसी चिकित्सा संस्थान के विरुद्ध चेतावनी जारी करना, आर्थिक दंड लगाना, प्रवेश कम करना या प्रवेश रोकना तथा मान्यता वापस लेने के लिए आयोग को अनुशंसा करना जैसे उपाय करना।
(2) भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड अपने कार्यों के निर्वहन में आयोग को ऐसी सिफारिशें कर सकता है और आयोग से ऐसे निर्देश मांग सकता है, जैसा वह आवश्यक समझे।
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