NCISM Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "स्वायत्त बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित किसी भी स्वायत्त बोर्ड से है;
(ख) "आयुर्वेद बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(ग) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए आचार एवं पंजीकरण बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(घ) "यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(ई) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 5 के अधीन नियुक्त भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष से है;
(f) "आयोग" से तात्पर्य धारा 3 के अधीन गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग से है;
(जी) "परिषद" से तात्पर्य धारा 11 के अधीन गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली सलाहकार परिषद से है;
(h) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली" से तात्पर्य अष्टांग आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियों से है, जिसमें ऐसे आधुनिक विकास, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति शामिल हैं, जिन्हें आयोग केंद्र सरकार के परामर्श से समय-समय पर अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकता है;
(i) “लाइसेंस” से तात्पर्य धारा 33 की उपधारा (1) के तहत प्रदान की गई भारतीय चिकित्सा प्रणाली के किसी भी अभ्यास के लिए लाइसेंस से है;
(जे) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के तहत गठित बोर्ड से है;
(k) "चिकित्सा संस्थान" से तात्पर्य भारत के भीतर या बाहर स्थित किसी भी संस्थान से है जो भारतीय चिकित्सा प्रणाली में डिग्री, डिप्लोमा या लाइसेंस प्रदान करता है और इसमें संबद्ध महाविद्यालय और विश्वविद्यालय माने जाने वाले संस्थान शामिल हैं;
(एल) "सदस्य" से तात्पर्य धारा 4 में निर्दिष्ट आयोग के सदस्य से है तथा इसमें उसका अध्यक्ष भी शामिल है;
(m) "राष्ट्रीय रजिस्टर" से तात्पर्य भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर से है, जिसे धारा 32 के तहत भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए आचार एवं पंजीकरण बोर्ड द्वारा अनुरक्षित किया जाता है;
(n) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(ओ) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(पी) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 20 के अधीन नियुक्त स्वायत्त बोर्ड के अध्यक्ष से है;
(q) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों से है;
(आर) "राज्य चिकित्सा परिषद" से तात्पर्य किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सकों के अभ्यास और पंजीकरण को विनियमित करने के लिए उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में लागू किसी कानून के तहत गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली की राज्य चिकित्सा परिषद से है;
(एस) "राज्य रजिस्टर" से तात्पर्य किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सकों के पंजीकरण के लिए किसी भी कानून के तहत बनाए गए भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राज्य रजिस्टर से है;
(टी) "विश्वविद्यालय" का वही अर्थ होगा जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (3 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड ( एफ ) में दिया गया है और इसमें स्वास्थ्य विश्वविद्यालय भी शामिल है।
(क) "स्वायत्त बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित किसी भी स्वायत्त बोर्ड से है;
(ख) "आयुर्वेद बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(ग) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए आचार एवं पंजीकरण बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(घ) "यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के अधीन गठित बोर्ड से है;
(ई) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 5 के अधीन नियुक्त भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष से है;
(f) "आयोग" से तात्पर्य धारा 3 के अधीन गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग से है;
(जी) "परिषद" से तात्पर्य धारा 11 के अधीन गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली सलाहकार परिषद से है;
(h) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली" से तात्पर्य अष्टांग आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियों से है, जिसमें ऐसे आधुनिक विकास, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति शामिल हैं, जिन्हें आयोग केंद्र सरकार के परामर्श से समय-समय पर अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकता है;
(i) “लाइसेंस” से तात्पर्य धारा 33 की उपधारा (1) के तहत प्रदान की गई भारतीय चिकित्सा प्रणाली के किसी भी अभ्यास के लिए लाइसेंस से है;
(जे) "भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड" से तात्पर्य धारा 18 के तहत गठित बोर्ड से है;
(k) "चिकित्सा संस्थान" से तात्पर्य भारत के भीतर या बाहर स्थित किसी भी संस्थान से है जो भारतीय चिकित्सा प्रणाली में डिग्री, डिप्लोमा या लाइसेंस प्रदान करता है और इसमें संबद्ध महाविद्यालय और विश्वविद्यालय माने जाने वाले संस्थान शामिल हैं;
(एल) "सदस्य" से तात्पर्य धारा 4 में निर्दिष्ट आयोग के सदस्य से है तथा इसमें उसका अध्यक्ष भी शामिल है;
(m) "राष्ट्रीय रजिस्टर" से तात्पर्य भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर से है, जिसे धारा 32 के तहत भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए आचार एवं पंजीकरण बोर्ड द्वारा अनुरक्षित किया जाता है;
(n) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(ओ) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(पी) "अध्यक्ष" से तात्पर्य धारा 20 के अधीन नियुक्त स्वायत्त बोर्ड के अध्यक्ष से है;
(q) "विनियम" से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों से है;
(आर) "राज्य चिकित्सा परिषद" से तात्पर्य किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सकों के अभ्यास और पंजीकरण को विनियमित करने के लिए उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में लागू किसी कानून के तहत गठित भारतीय चिकित्सा प्रणाली की राज्य चिकित्सा परिषद से है;
(एस) "राज्य रजिस्टर" से तात्पर्य किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सकों के पंजीकरण के लिए किसी भी कानून के तहत बनाए गए भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राज्य रजिस्टर से है;
(टी) "विश्वविद्यालय" का वही अर्थ होगा जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (3 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड ( एफ ) में दिया गया है और इसमें स्वास्थ्य विश्वविद्यालय भी शामिल है।
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