NCISM Act 10अध्याय · National Commission for Indian System of Medicine
धारा 10 · आयोग की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करेगा, अर्थात्:--
(क) भारतीय चिकित्सा प्रणाली की शिक्षा में उच्च गुणवत्ता और उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए नीतियां निर्धारित करना और इस संबंध में आवश्यक नियम बनाना;
(ख) चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा अनुसंधानों और चिकित्सा पेशेवरों को विनियमित करने के लिए नीतियां निर्धारित करना और इस संबंध में आवश्यक नियम बनाना;
(ग) स्वास्थ्य सेवा में आवश्यकताओं का आकलन करना, जिसमें स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना शामिल हैं, और ऐसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक रोड मैप विकसित करना;
(घ) भारतीय चिकित्सा प्रणाली के आयोग, स्वायत्त बोर्डों और राज्य चिकित्सा परिषदों के उचित कामकाज के लिए आवश्यक नियम बनाकर दिशा-निर्देश तैयार करना और नीतियां निर्धारित करना;
(ई) स्वायत्त बोर्डों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना;
(f) भारतीय चिकित्सा प्रणाली की राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए दिशा-निर्देशों और विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, इस अधिनियम के अंतर्गत उनके प्रभावी कामकाज हेतु, ऐसे उपाय करना, जो आवश्यक हों;
(जी) स्वायत्त बोर्डों के निर्णयों के संबंध में अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना;
(h) चिकित्सा पेशे में व्यावसायिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित करना और चिकित्सा चिकित्सकों द्वारा देखभाल प्रदान करने के दौरान नैतिक आचरण को बढ़ावा देना;
(i) इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों और मानित विश्वविद्यालयों में पचास प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क और अन्य सभी प्रभारों के निर्धारण हेतु दिशानिर्देश तैयार करना;
(j) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना और ऐसे अन्य कार्यों का निष्पादन करना जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(2) आयोग के सभी आदेश और निर्णय सचिव के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किए जाएंगे और आयोग प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर अपनी ऐसी शक्तियां, जैसा वह उचित समझे, सचिव को सौंप सकता है।
(3) आयोग उप-समितियों का गठन कर सकता है और उन्हें अपनी ऐसी शक्तियाँ सौंप सकता है जो उन्हें विशिष्ट कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
(क) भारतीय चिकित्सा प्रणाली की शिक्षा में उच्च गुणवत्ता और उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए नीतियां निर्धारित करना और इस संबंध में आवश्यक नियम बनाना;
(ख) चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा अनुसंधानों और चिकित्सा पेशेवरों को विनियमित करने के लिए नीतियां निर्धारित करना और इस संबंध में आवश्यक नियम बनाना;
(ग) स्वास्थ्य सेवा में आवश्यकताओं का आकलन करना, जिसमें स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन और स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना शामिल हैं, और ऐसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक रोड मैप विकसित करना;
(घ) भारतीय चिकित्सा प्रणाली के आयोग, स्वायत्त बोर्डों और राज्य चिकित्सा परिषदों के उचित कामकाज के लिए आवश्यक नियम बनाकर दिशा-निर्देश तैयार करना और नीतियां निर्धारित करना;
(ई) स्वायत्त बोर्डों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना;
(f) भारतीय चिकित्सा प्रणाली की राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए दिशा-निर्देशों और विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, इस अधिनियम के अंतर्गत उनके प्रभावी कामकाज हेतु, ऐसे उपाय करना, जो आवश्यक हों;
(जी) स्वायत्त बोर्डों के निर्णयों के संबंध में अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करना;
(h) चिकित्सा पेशे में व्यावसायिक नैतिकता का पालन सुनिश्चित करना और चिकित्सा चिकित्सकों द्वारा देखभाल प्रदान करने के दौरान नैतिक आचरण को बढ़ावा देना;
(i) इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत संचालित निजी चिकित्सा संस्थानों और मानित विश्वविद्यालयों में पचास प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क और अन्य सभी प्रभारों के निर्धारण हेतु दिशानिर्देश तैयार करना;
(j) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना और ऐसे अन्य कार्यों का निष्पादन करना जैसा कि निर्धारित किया जा सके।
(2) आयोग के सभी आदेश और निर्णय सचिव के हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणित किए जाएंगे और आयोग प्रशासनिक और वित्तीय मामलों पर अपनी ऐसी शक्तियां, जैसा वह उचित समझे, सचिव को सौंप सकता है।
(3) आयोग उप-समितियों का गठन कर सकता है और उन्हें अपनी ऐसी शक्तियाँ सौंप सकता है जो उन्हें विशिष्ट कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों।
इस धारा पर आपका निजी नोट
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