NDPS Act 53Aअध्याय V · Procedure
धारा 53A · कुछ परिस्थितियों में कथनों की प्रासंगिकता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [53ए. कुछ परिस्थितियों में कथनों की प्रासंगिकता। -- (1) किसी व्यक्ति द्वारा धारा 53 के तहत अपराधों की जांच के लिए सशक्त किसी अधिकारी के समक्ष, ऐसे अधिकारी द्वारा किसी जांच या कार्यवाही के दौरान दिया गया और हस्ताक्षरित कथन, इस अधिनियम के तहत किसी अपराध के लिए किसी अभियोग में उसमें निहित तथ्यों की सत्यता को सिद्ध करने के उद्देश्य से प्रासंगिक होगा,
(क) जब बयान देने वाला व्यक्ति मर चुका हो या न मिल सके, या साक्ष्य देने में असमर्थ हो, या विरोधी पक्ष द्वारा उसे दूर रखा गया हो, या जिसकी उपस्थिति प्राप्त करने में इतनी देरी या खर्च हो कि मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उसे अनुचित समझे; या
(ख) जब बयान देने वाले व्यक्ति की अदालत के समक्ष मामले में गवाह के रूप में जांच की जाती है और अदालत की राय है कि मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, न्याय के हित में बयान को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
(2) उपधारा (1) के प्रावधान, न्यायालय के समक्ष कार्यवाही को छोड़कर, इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या आदेशों के अधीन किसी भी कार्यवाही के संबंध में, उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के संबंध में लागू होते हैं।]
(क) जब बयान देने वाला व्यक्ति मर चुका हो या न मिल सके, या साक्ष्य देने में असमर्थ हो, या विरोधी पक्ष द्वारा उसे दूर रखा गया हो, या जिसकी उपस्थिति प्राप्त करने में इतनी देरी या खर्च हो कि मामले की परिस्थितियों में न्यायालय उसे अनुचित समझे; या
(ख) जब बयान देने वाले व्यक्ति की अदालत के समक्ष मामले में गवाह के रूप में जांच की जाती है और अदालत की राय है कि मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, न्याय के हित में बयान को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
(2) उपधारा (1) के प्रावधान, न्यायालय के समक्ष कार्यवाही को छोड़कर, इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या आदेशों के अधीन किसी भी कार्यवाही के संबंध में, उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के संबंध में लागू होते हैं।]
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