NDPS Act 17अध्याय IV · Offences and Penalties
धारा 17 · तैयार अफीम से संबंधित उल्लंघन के लिए दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [17. तैयार अफीम के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड। -- जो कोई भी इस अधिनियम के किसी प्रावधान या इसके अंतर्गत बनाए गए किसी नियम या आदेश या प्रदत्त लाइसेंस की किसी शर्त का उल्लंघन करते हुए तैयार अफीम का निर्माण, कब्ज़ा, बिक्री, खरीद, परिवहन, अंतरराज्यीय आयात, अंतरराज्यीय निर्यात करता है या उसका उपयोग करता है, वह दंडनीय होगा,--
(क) जहां उल्लंघन में कम मात्रा शामिल हो, वहां एक वर्ष तक की कठोर कारावास या दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों; या
(ख) जहां उल्लंघन में मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से कम लेकिन छोटी मात्रा से अधिक हो, वहां दस वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा; या
(ग) यदि उल्लंघन में वाणिज्यिक मात्रा शामिल है, तो उस पर कम से कम दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा होगी, जो बीस वर्ष तक बढ़ सकती है, और उस पर कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो दो लाख रुपये तक बढ़ सकता है।
बशर्ते कि न्यायालय, निर्णय में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, दो लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा सकता है।]
(क) जहां उल्लंघन में कम मात्रा शामिल हो, वहां एक वर्ष तक की कठोर कारावास या दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों; या
(ख) जहां उल्लंघन में मात्रा वाणिज्यिक मात्रा से कम लेकिन छोटी मात्रा से अधिक हो, वहां दस वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा; या
(ग) यदि उल्लंघन में वाणिज्यिक मात्रा शामिल है, तो उस पर कम से कम दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा होगी, जो बीस वर्ष तक बढ़ सकती है, और उस पर कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो दो लाख रुपये तक बढ़ सकता है।
बशर्ते कि न्यायालय, निर्णय में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, दो लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा सकता है।]
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 20 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 10 वर्ष
- जुर्माना
- ₹2,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
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