FEM Act 49अध्याय VII · Miscellaneous
धारा 49 · निरसन और बचत।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (46 ऑफ 1973) को इसके द्वारा निरस्त किया जाता है और उक्त अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (1) के तहत गठित अपीलीय बोर्ड (जिसे इसके बाद निरस्त अधिनियम कहा जाएगा) भंग हो जाएगा।
(2) उक्त अपीलीय बोर्ड के विघटन पर, अपीलीय बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति और सदस्य के रूप में नियुक्त तथा उस तिथि से ठीक पहले पद धारण करने वाला प्रत्येक अन्य व्यक्ति अपने-अपने पद खाली कर देगा और ऐसा कोई अध्यक्ष या अन्य व्यक्ति अपने कार्यकाल या किसी सेवा अनुबंध की समयपूर्व समाप्ति के लिए किसी मुआवजे का दावा करने का हकदार नहीं होगा।
(3) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद कोई न्यायालय निरस्त अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा तथा कोई निर्णय अधिकारी निरस्त अधिनियम की धारा 51 के अंतर्गत किसी उल्लंघन का संज्ञान नहीं लेगा।
(4) उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निरस्त अधिनियम के तहत किए गए सभी अपराध निरस्त अधिनियम के प्रावधानों द्वारा शासित होते रहेंगे, मानो वह अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
(5) ऐसे निरसन के बावजूद,--
(क) इस अधिनियम के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति, पुष्टि या घोषणा करना या कोई लाइसेंस, अनुमति, प्राधिकरण या छूट देना या कोई दस्तावेज या उपकरण निष्पादित करना या कोई निर्देश देना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) निरस्त अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (2) के तहत अपीलीय बोर्ड को दी गई कोई भी अपील, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले निपटाई नहीं गई हो, इस अधिनियम के तहत गठित अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएगी और उसके द्वारा निपटाई जाएगी;
(ग) निरस्त अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के तहत अपीलीय बोर्ड के किसी निर्णय या आदेश से प्रत्येक अपील, यदि इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले दायर नहीं की गई है, तो ऐसे प्रारंभ होने के साठ दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में दायर की जाएगी।
बशर्ते कि उच्च न्यायालय उक्त साठ दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी ऐसी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारणवश उक्त अवधि के भीतर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।
(6) उपधारा (3) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उपधारा (2) , (4) और (5) में विशेष मामलों का उल्लेख निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) उक्त अपीलीय बोर्ड के विघटन पर, अपीलीय बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त व्यक्ति और सदस्य के रूप में नियुक्त तथा उस तिथि से ठीक पहले पद धारण करने वाला प्रत्येक अन्य व्यक्ति अपने-अपने पद खाली कर देगा और ऐसा कोई अध्यक्ष या अन्य व्यक्ति अपने कार्यकाल या किसी सेवा अनुबंध की समयपूर्व समाप्ति के लिए किसी मुआवजे का दावा करने का हकदार नहीं होगा।
(3) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद कोई न्यायालय निरस्त अधिनियम के अंतर्गत किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा तथा कोई निर्णय अधिकारी निरस्त अधिनियम की धारा 51 के अंतर्गत किसी उल्लंघन का संज्ञान नहीं लेगा।
(4) उपधारा (3) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निरस्त अधिनियम के तहत किए गए सभी अपराध निरस्त अधिनियम के प्रावधानों द्वारा शासित होते रहेंगे, मानो वह अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
(5) ऐसे निरसन के बावजूद,--
(क) इस अधिनियम के तहत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई, जिसमें कोई नियम, अधिसूचना, निरीक्षण, आदेश या नोटिस जारी करना या कोई नियुक्ति, पुष्टि या घोषणा करना या कोई लाइसेंस, अनुमति, प्राधिकरण या छूट देना या कोई दस्तावेज या उपकरण निष्पादित करना या कोई निर्देश देना शामिल है, इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत न होने की सीमा तक, इस अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत किया गया या लिया गया माना जाएगा;
(ख) निरस्त अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (2) के तहत अपीलीय बोर्ड को दी गई कोई भी अपील, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले निपटाई नहीं गई हो, इस अधिनियम के तहत गठित अपीलीय न्यायाधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएगी और उसके द्वारा निपटाई जाएगी;
(ग) निरस्त अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के तहत अपीलीय बोर्ड के किसी निर्णय या आदेश से प्रत्येक अपील, यदि इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले दायर नहीं की गई है, तो ऐसे प्रारंभ होने के साठ दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में दायर की जाएगी।
बशर्ते कि उच्च न्यायालय उक्त साठ दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी ऐसी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारणवश उक्त अवधि के भीतर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।
(6) उपधारा (3) में अन्यथा प्रावधान किए जाने के अलावा, उपधारा (2) , (4) और (5) में विशेष मामलों का उल्लेख निरसन के प्रभाव के संबंध में सामान्य खंड अधिनियम, 1897 (10 ऑफ 1897) की धारा 6 के सामान्य अनुप्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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