FEM Act 39अध्याय VII · Miscellaneous
धारा 39 · कुछ मामलों में दस्तावेजों के संबंध में अनुमान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जहां कोई भी दस्तावेज--
(i) यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत या उपलब्ध कराया गया हो, या किसी व्यक्ति की हिरासत या नियंत्रण से इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत जब्त किया गया हो; या
(ii) यदि यह किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत कथित रूप से किए गए किसी उल्लंघन की जांच के दौरान भारत के बाहर किसी स्थान से (निर्धारित प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा और निर्धारित तरीके से विधिवत प्रमाणित) प्राप्त हुआ हो,
और यदि ऐसा दस्तावेज इस अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही में उसके विरुद्ध, या उसके और उसके साथ संयुक्त रूप से कार्यवाही किए जा रहे किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो न्यायालय या निर्णय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, निम्नलिखित कार्य करेगा:
(क) जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह मान लिया जाएगा कि हस्ताक्षर और ऐसे दस्तावेज़ का हर दूसरा भाग जो किसी विशेष व्यक्ति की लिखावट में प्रतीत होता है या जिसे न्यायालय यथोचित रूप से किसी विशेष व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित या उसकी लिखावट में होने का अनुमान लगा सकता है, उस व्यक्ति की लिखावट में है, और यदि कोई दस्तावेज़ निष्पादित या सत्यापित किया गया है, तो यह मान लिया जाएगा कि इसे उसी व्यक्ति द्वारा निष्पादित या सत्यापित किया गया है जिसके द्वारा इसे निष्पादित या सत्यापित किए जाने का दावा किया गया है;
(ख) यदि कोई दस्तावेज अन्यथा साक्ष्य में स्वीकार्य है, तो भले ही उस पर विधिवत मुहर न लगी हो, उसे साक्ष्य में स्वीकार किया जाएगा;
(ग) खंड (i) के अंतर्गत आने वाले मामले में, जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु की सत्यता को भी मान लें।
(i) यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत या उपलब्ध कराया गया हो, या किसी व्यक्ति की हिरासत या नियंत्रण से इस अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत जब्त किया गया हो; या
(ii) यदि यह किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के अंतर्गत कथित रूप से किए गए किसी उल्लंघन की जांच के दौरान भारत के बाहर किसी स्थान से (निर्धारित प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा और निर्धारित तरीके से विधिवत प्रमाणित) प्राप्त हुआ हो,
और यदि ऐसा दस्तावेज इस अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही में उसके विरुद्ध, या उसके और उसके साथ संयुक्त रूप से कार्यवाही किए जा रहे किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो न्यायालय या निर्णय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, निम्नलिखित कार्य करेगा:
(क) जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, यह मान लिया जाएगा कि हस्ताक्षर और ऐसे दस्तावेज़ का हर दूसरा भाग जो किसी विशेष व्यक्ति की लिखावट में प्रतीत होता है या जिसे न्यायालय यथोचित रूप से किसी विशेष व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित या उसकी लिखावट में होने का अनुमान लगा सकता है, उस व्यक्ति की लिखावट में है, और यदि कोई दस्तावेज़ निष्पादित या सत्यापित किया गया है, तो यह मान लिया जाएगा कि इसे उसी व्यक्ति द्वारा निष्पादित या सत्यापित किया गया है जिसके द्वारा इसे निष्पादित या सत्यापित किए जाने का दावा किया गया है;
(ख) यदि कोई दस्तावेज अन्यथा साक्ष्य में स्वीकार्य है, तो भले ही उस पर विधिवत मुहर न लगी हो, उसे साक्ष्य में स्वीकार किया जाएगा;
(ग) खंड (i) के अंतर्गत आने वाले मामले में, जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, ऐसे दस्तावेज़ की विषयवस्तु की सत्यता को भी मान लें।
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