FEM Act 17अध्याय V · Adjudication and Appeal
धारा 17 · विशेष निदेशक (अपील) से अपील।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा इस धारा के अंतर्गत न्यायनिर्णय प्राधिकारियों के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए एक या एक से अधिक विशेष निदेशक (अपील) नियुक्त करेगी तथा उक्त अधिसूचना में उन मामलों और स्थानों को भी निर्दिष्ट करेगी जिनके संबंध में विशेष निदेशक (अपील) क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है।
(2) न्यायनिर्णय प्राधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश से पीड़ित कोई भी व्यक्ति, जो प्रवर्तन का सहायक निदेशक या प्रवर्तन का उप निदेशक हो, विशेष निदेशक (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है।
(3) उपधारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक अपील, न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा दिए गए आदेश की प्रति पीड़ित व्यक्ति को प्राप्त होने की तिथि से पैंतालीस दिनों के भीतर दाखिल की जाएगी और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और इसके साथ ऐसा शुल्क संलग्न होगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि विशेष निदेशक (अपील) उक्त पैंतालीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकते हैं, यदि वे संतुष्ट हों कि उस अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(4) उपधारा (1) के तहत अपील प्राप्त होने पर, विशेष निदेशक (अपील) अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, अपील के विरुद्ध आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए, जैसा वह उचित समझे, वैसा आदेश पारित कर सकता है।
(5) विशेष निदेशक (अपील) अपने द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपील करने वाले पक्षों और संबंधित न्यायनिर्णय प्राधिकारी को भेजेगा।
(6) विशेष निदेशक (अपील) को सिविल न्यायालय की वही शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो धारा 28 की उपधारा (2) के अधीन अपीलीय न्यायाधिकरण को प्रदत्त हैं।
(क) उसके समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी;
(ख) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए इसे सिविल न्यायालय माना जाएगा।
(2) न्यायनिर्णय प्राधिकारी द्वारा दिए गए किसी आदेश से पीड़ित कोई भी व्यक्ति, जो प्रवर्तन का सहायक निदेशक या प्रवर्तन का उप निदेशक हो, विशेष निदेशक (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है।
(3) उपधारा (1) के अंतर्गत प्रत्येक अपील, न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा दिए गए आदेश की प्रति पीड़ित व्यक्ति को प्राप्त होने की तिथि से पैंतालीस दिनों के भीतर दाखिल की जाएगी और यह ऐसे प्रपत्र में होगी, ऐसे तरीके से सत्यापित होगी और इसके साथ ऐसा शुल्क संलग्न होगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि विशेष निदेशक (अपील) उक्त पैंतालीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकते हैं, यदि वे संतुष्ट हों कि उस अवधि के भीतर अपील दायर न करने का पर्याप्त कारण था।
(4) उपधारा (1) के तहत अपील प्राप्त होने पर, विशेष निदेशक (अपील) अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, अपील के विरुद्ध आदेश की पुष्टि, संशोधन या निरस्त करने के लिए, जैसा वह उचित समझे, वैसा आदेश पारित कर सकता है।
(5) विशेष निदेशक (अपील) अपने द्वारा दिए गए प्रत्येक आदेश की एक प्रति अपील करने वाले पक्षों और संबंधित न्यायनिर्णय प्राधिकारी को भेजेगा।
(6) विशेष निदेशक (अपील) को सिविल न्यायालय की वही शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो धारा 28 की उपधारा (2) के अधीन अपीलीय न्यायाधिकरण को प्रदत्त हैं।
(क) उसके समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी;
(ख) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए इसे सिविल न्यायालय माना जाएगा।
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