FEM Act 28अध्याय V · Adjudication and Appeal
धारा 28 · अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) की प्रक्रिया और शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (5 ऑफ 1908) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं होंगे, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होंगे और इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) को अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्तियां प्राप्त होंगी।
(2) इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन हेतु अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) को निम्नलिखित मामलों के संबंध में, वाद की सुनवाई करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियाँ प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की मांग करना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(f) अपने निर्णयों की समीक्षा करना;
(जी) चूक के अभ्यावेदन को खारिज करना या उस पर एकतरफा निर्णय लेना;
(h) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकतरफा पारित किसी आदेश को रद्द करना; और
(i) कोई अन्य मामला जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) द्वारा दिया गया आदेश अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) द्वारा दीवानी न्यायालय के डिक्री के रूप में निष्पादन योग्य होगा और इस उद्देश्य के लिए, अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) के पास दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी।
(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) अपने द्वारा दिए गए किसी आदेश को स्थानीय अधिकार क्षेत्र वाले सिविल न्यायालय को भेज सकता है और ऐसा सिविल न्यायालय उस आदेश को इस प्रकार निष्पादित करेगा मानो वह उस न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निर्णय हो।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) के समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए एक सिविल न्यायालय माना जाएगा।
(2) इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन हेतु अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) को निम्नलिखित मामलों के संबंध में, वाद की सुनवाई करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियाँ प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1 ऑफ 1872) की धारा 123 और 124 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की मांग करना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(f) अपने निर्णयों की समीक्षा करना;
(जी) चूक के अभ्यावेदन को खारिज करना या उस पर एकतरफा निर्णय लेना;
(h) चूक के कारण किसी अभ्यावेदन को खारिज करने के किसी आदेश या उसके द्वारा एकतरफा पारित किसी आदेश को रद्द करना; और
(i) कोई अन्य मामला जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) द्वारा दिया गया आदेश अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) द्वारा दीवानी न्यायालय के डिक्री के रूप में निष्पादन योग्य होगा और इस उद्देश्य के लिए, अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) के पास दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी।
(4) उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, अपीलीय न्यायाधिकरण या विशेष निदेशक (अपील) अपने द्वारा दिए गए किसी आदेश को स्थानीय अधिकार क्षेत्र वाले सिविल न्यायालय को भेज सकता है और ऐसा सिविल न्यायालय उस आदेश को इस प्रकार निष्पादित करेगा मानो वह उस न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निर्णय हो।
(5) अपीलीय न्यायाधिकरण और विशेष निदेशक (अपील) के समक्ष सभी कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी और अपीलीय न्यायाधिकरण को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए एक सिविल न्यायालय माना जाएगा।
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