DV Act 37अध्याय V · Miscellaneous
धारा 37 · नियम बनाने की केंद्रीय सरकार की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन संरक्षण अधिकारी के पास आवश्यक योग्यताएँ एवं अनुभव;
(ख) धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन संरक्षण अधिकारियों और उनके अधीनस्थ अन्य अधिकारियों की सेवा की शर्तें एवं नियम;
(ग) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत घरेलू घटना रिपोर्ट किस रूप और किस विधि से दर्ज की जा सकती है;
(घ) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन मजिस्ट्रेट को संरक्षण आदेश हेतु आवेदन करने का प्रपत्र एवं विधि;
(ई) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (डी) के तहत शिकायत दर्ज करने का प्रपत्र;
(f) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन संरक्षण अधिकारी द्वारा किए जाने वाले अन्य कर्तव्य;
(जी) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन सेवा प्रदाताओं के पंजीकरण को विनियमित करने वाले नियम;
(h) धारा 12 की उपधारा (1) के तहत इस अधिनियम के अंतर्गत राहत मांगने हेतु आवेदन जिस प्रपत्र में किया जा सकता है तथा ऐसे आवेदन में उस धारा की उपधारा (3) के अंतर्गत जो विवरण शामिल होंगे;
(i) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन नोटिस तामील करने के साधन;
(j) धारा 13 की उपधारा (2) के तहत संरक्षण अधिकारी द्वारा नोटिस की तामील की घोषणा का प्रपत्र;
(k) परामर्श में वे योग्यताएँ एवं अनुभव जो सेवा प्रदाता के किसी सदस्य के पास धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन होने चाहिए;
(एल) वह प्रपत्र जिसमें पीड़ित व्यक्ति धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन हलफनामा दाखिल कर सकता है;
(m) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित किया जाना है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन संरक्षण अधिकारी के पास आवश्यक योग्यताएँ एवं अनुभव;
(ख) धारा 8 की उपधारा (3) के अधीन संरक्षण अधिकारियों और उनके अधीनस्थ अन्य अधिकारियों की सेवा की शर्तें एवं नियम;
(ग) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ख) के तहत घरेलू घटना रिपोर्ट किस रूप और किस विधि से दर्ज की जा सकती है;
(घ) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन मजिस्ट्रेट को संरक्षण आदेश हेतु आवेदन करने का प्रपत्र एवं विधि;
(ई) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (डी) के तहत शिकायत दर्ज करने का प्रपत्र;
(f) धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन संरक्षण अधिकारी द्वारा किए जाने वाले अन्य कर्तव्य;
(जी) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन सेवा प्रदाताओं के पंजीकरण को विनियमित करने वाले नियम;
(h) धारा 12 की उपधारा (1) के तहत इस अधिनियम के अंतर्गत राहत मांगने हेतु आवेदन जिस प्रपत्र में किया जा सकता है तथा ऐसे आवेदन में उस धारा की उपधारा (3) के अंतर्गत जो विवरण शामिल होंगे;
(i) धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन नोटिस तामील करने के साधन;
(j) धारा 13 की उपधारा (2) के तहत संरक्षण अधिकारी द्वारा नोटिस की तामील की घोषणा का प्रपत्र;
(k) परामर्श में वे योग्यताएँ एवं अनुभव जो सेवा प्रदाता के किसी सदस्य के पास धारा 14 की उपधारा (1) के अधीन होने चाहिए;
(एल) वह प्रपत्र जिसमें पीड़ित व्यक्ति धारा 23 की उपधारा (2) के अधीन हलफनामा दाखिल कर सकता है;
(m) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित किया जाना है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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