DV Act 31अध्याय V · Miscellaneous
धारा 31 · प्रतिवादी द्वारा सुरक्षा आदेश के उल्लंघन के लिए दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रतिवादी द्वारा संरक्षण आदेश या अंतरिम संरक्षण आदेश का उल्लंघन इस अधिनियम के तहत अपराध होगा और इसके लिए किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या बीस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय होगा।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत अपराध का मुकदमा जहाँ तक संभव हो, उस मजिस्ट्रेट द्वारा चलाया जाएगा जिसने वह आदेश पारित किया था, जिसके उल्लंघन का आरोप अभियुक्त पर लगाया गया है।
(3) उपधारा (1) के तहत आरोप तय करते समय, मजिस्ट्रेट भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 498ए या उस संहिता के किसी अन्य प्रावधान या दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (1961 का 28) के तहत भी आरोप तय कर सकता है, जैसा भी मामला हो, यदि तथ्यों से उन प्रावधानों के तहत अपराध का पता चलता है।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत अपराध का मुकदमा जहाँ तक संभव हो, उस मजिस्ट्रेट द्वारा चलाया जाएगा जिसने वह आदेश पारित किया था, जिसके उल्लंघन का आरोप अभियुक्त पर लगाया गया है।
(3) उपधारा (1) के तहत आरोप तय करते समय, मजिस्ट्रेट भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 498ए या उस संहिता के किसी अन्य प्रावधान या दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (1961 का 28) के तहत भी आरोप तय कर सकता है, जैसा भी मामला हो, यदि तथ्यों से उन प्रावधानों के तहत अपराध का पता चलता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 1 वर्ष
- जुर्माना
- ₹20,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
