DV Act 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "पीड़ित व्यक्ति" से तात्पर्य किसी ऐसी महिला से है जो प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में है या रही है तथा जो प्रतिवादी द्वारा घरेलू हिंसा के किसी कृत्य का शिकार होने का आरोप लगाती है;
(ख) "बच्चा" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है तथा इसमें दत्तक, सौतेला या पालक बच्चा भी शामिल है;
(ग) "मुआवजा आदेश" से तात्पर्य धारा 22 के तहत दिए गए आदेश से है;
(घ) "हिरासत आदेश" से तात्पर्य धारा 21 के तहत जारी किए गए आदेश से है;
(ई) "घरेलू घटना रिपोर्ट" से तात्पर्य पीड़ित व्यक्ति से घरेलू हिंसा की शिकायत प्राप्त होने पर निर्धारित प्रपत्र में दी गई रिपोर्ट से है;
(f) "घरेलू संबंध" से तात्पर्य दो व्यक्तियों के बीच के संबंध से है जो एक साझा घर में एक साथ रहते हैं या किसी भी समय एक साथ रहे हैं, जब वे रक्त संबंध, विवाह, या विवाह की प्रकृति के संबंध, गोद लेने या संयुक्त परिवार के रूप में एक साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों से संबंधित हों;
(जी) "घरेलू हिंसा" का वही अर्थ होगा जो धारा 3 में दिया गया है;
(h) "दहेज" का वही अर्थ होगा जो दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (28 ऑफ 1961) की धारा 2 में दिया गया है;
(i) "मजिस्ट्रेट" से तात्पर्य प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से है, या जैसा भी मामला हो, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट से है, जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के तहत उस क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता है जहां पीड़ित व्यक्ति अस्थायी रूप से या अन्यथा निवास करता है या प्रतिवादी निवास करता है या घरेलू हिंसा होने का आरोप है;
(जे) "चिकित्सा सुविधा" से तात्पर्य ऐसी सुविधा से है जिसे राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए चिकित्सा सुविधा के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है;
(k) "मौद्रिक राहत" से तात्पर्य उस मुआवजे से है जिसे मजिस्ट्रेट इस अधिनियम के अंतर्गत किसी राहत की मांग करने वाले आवेदन की सुनवाई के दौरान किसी भी चरण में पीड़ित व्यक्ति को घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति द्वारा किए गए खर्चों और नुकसान की भरपाई के लिए भुगतान करने का आदेश दे सकता है;
(एल) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(m) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(n) "संरक्षण अधिकारी" से तात्पर्य धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी से है;
(ओ) "संरक्षण आदेश" से तात्पर्य धारा 18 के तहत जारी किए गए आदेश से है;
(पी) "निवास आदेश" से तात्पर्य धारा 19 की उपधारा (1) के अनुसार दिए गए आदेश से है;
(q) “प्रतिवादी” से तात्पर्य किसी भी वयस्क पुरुष व्यक्ति से है जो पीड़ित व्यक्ति के साथ घरेलू संबंध में है या रहा है और जिसके विरुद्ध पीड़ित व्यक्ति ने इस अधिनियम के अंतर्गत कोई राहत मांगी है:
बशर्ते कि पीड़ित पत्नी या विवाह के स्वरूप वाले संबंध में रहने वाली महिला पति या पुरुष साथी के किसी रिश्तेदार के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कर सकती है;
(आर) "सेवा प्रदाता" से तात्पर्य धारा 10 की उपधारा (1) के अंतर्गत पंजीकृत इकाई से है;
(s) "साझा घर" से तात्पर्य ऐसे घर से है जहाँ पीड़ित व्यक्ति रहता है या किसी भी अवस्था में घरेलू संबंध में अकेले या प्रतिवादी के साथ रहा है तथा इसमें ऐसा घर शामिल है चाहे वह पीड़ित व्यक्ति और प्रतिवादी द्वारा संयुक्त रूप से स्वामित्व में हो या किराए पर लिया गया हो, या उनमें से किसी एक के स्वामित्व में हो या किराए पर लिया गया हो, जिसके संबंध में पीड़ित व्यक्ति या प्रतिवादी या दोनों का संयुक्त रूप से या अकेले कोई अधिकार, हक, हित या इक्विटी हो तथा इसमें ऐसा घर भी शामिल है जो उस संयुक्त परिवार का हो जिसका प्रतिवादी सदस्य है, भले ही प्रतिवादी या पीड़ित व्यक्ति का साझा घर में कोई अधिकार, हक या हित हो या न हो;
(टी) "आश्रय गृह" से तात्पर्य किसी भी आश्रय गृह से है जिसे राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आश्रय गृह के रूप में अधिसूचित किया गया हो।
(क) "पीड़ित व्यक्ति" से तात्पर्य किसी ऐसी महिला से है जो प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में है या रही है तथा जो प्रतिवादी द्वारा घरेलू हिंसा के किसी कृत्य का शिकार होने का आरोप लगाती है;
(ख) "बच्चा" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है तथा इसमें दत्तक, सौतेला या पालक बच्चा भी शामिल है;
(ग) "मुआवजा आदेश" से तात्पर्य धारा 22 के तहत दिए गए आदेश से है;
(घ) "हिरासत आदेश" से तात्पर्य धारा 21 के तहत जारी किए गए आदेश से है;
(ई) "घरेलू घटना रिपोर्ट" से तात्पर्य पीड़ित व्यक्ति से घरेलू हिंसा की शिकायत प्राप्त होने पर निर्धारित प्रपत्र में दी गई रिपोर्ट से है;
(f) "घरेलू संबंध" से तात्पर्य दो व्यक्तियों के बीच के संबंध से है जो एक साझा घर में एक साथ रहते हैं या किसी भी समय एक साथ रहे हैं, जब वे रक्त संबंध, विवाह, या विवाह की प्रकृति के संबंध, गोद लेने या संयुक्त परिवार के रूप में एक साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों से संबंधित हों;
(जी) "घरेलू हिंसा" का वही अर्थ होगा जो धारा 3 में दिया गया है;
(h) "दहेज" का वही अर्थ होगा जो दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (28 ऑफ 1961) की धारा 2 में दिया गया है;
(i) "मजिस्ट्रेट" से तात्पर्य प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से है, या जैसा भी मामला हो, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट से है, जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के तहत उस क्षेत्र में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता है जहां पीड़ित व्यक्ति अस्थायी रूप से या अन्यथा निवास करता है या प्रतिवादी निवास करता है या घरेलू हिंसा होने का आरोप है;
(जे) "चिकित्सा सुविधा" से तात्पर्य ऐसी सुविधा से है जिसे राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए चिकित्सा सुविधा के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है;
(k) "मौद्रिक राहत" से तात्पर्य उस मुआवजे से है जिसे मजिस्ट्रेट इस अधिनियम के अंतर्गत किसी राहत की मांग करने वाले आवेदन की सुनवाई के दौरान किसी भी चरण में पीड़ित व्यक्ति को घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति द्वारा किए गए खर्चों और नुकसान की भरपाई के लिए भुगतान करने का आदेश दे सकता है;
(एल) "अधिसूचना" से तात्पर्य राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है तथा "अधिसूचित" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(m) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(n) "संरक्षण अधिकारी" से तात्पर्य धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी से है;
(ओ) "संरक्षण आदेश" से तात्पर्य धारा 18 के तहत जारी किए गए आदेश से है;
(पी) "निवास आदेश" से तात्पर्य धारा 19 की उपधारा (1) के अनुसार दिए गए आदेश से है;
(q) “प्रतिवादी” से तात्पर्य किसी भी वयस्क पुरुष व्यक्ति से है जो पीड़ित व्यक्ति के साथ घरेलू संबंध में है या रहा है और जिसके विरुद्ध पीड़ित व्यक्ति ने इस अधिनियम के अंतर्गत कोई राहत मांगी है:
बशर्ते कि पीड़ित पत्नी या विवाह के स्वरूप वाले संबंध में रहने वाली महिला पति या पुरुष साथी के किसी रिश्तेदार के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कर सकती है;
(आर) "सेवा प्रदाता" से तात्पर्य धारा 10 की उपधारा (1) के अंतर्गत पंजीकृत इकाई से है;
(s) "साझा घर" से तात्पर्य ऐसे घर से है जहाँ पीड़ित व्यक्ति रहता है या किसी भी अवस्था में घरेलू संबंध में अकेले या प्रतिवादी के साथ रहा है तथा इसमें ऐसा घर शामिल है चाहे वह पीड़ित व्यक्ति और प्रतिवादी द्वारा संयुक्त रूप से स्वामित्व में हो या किराए पर लिया गया हो, या उनमें से किसी एक के स्वामित्व में हो या किराए पर लिया गया हो, जिसके संबंध में पीड़ित व्यक्ति या प्रतिवादी या दोनों का संयुक्त रूप से या अकेले कोई अधिकार, हक, हित या इक्विटी हो तथा इसमें ऐसा घर भी शामिल है जो उस संयुक्त परिवार का हो जिसका प्रतिवादी सदस्य है, भले ही प्रतिवादी या पीड़ित व्यक्ति का साझा घर में कोई अधिकार, हक या हित हो या न हो;
(टी) "आश्रय गृह" से तात्पर्य किसी भी आश्रय गृह से है जिसे राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आश्रय गृह के रूप में अधिसूचित किया गया हो।
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