DV Act 20अध्याय IV · Procedure for Obtaining Orders of Reliefs
धारा 20 · मौद्रिक राहतें।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 12 की उपधारा (1) के तहत आवेदन का निपटारा करते समय, मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति और पीड़ित व्यक्ति के किसी बच्चे द्वारा किए गए खर्चों और नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्देश दे सकता है, और ऐसी सहायता में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं:--
(क) आय की हानि;
(ख) चिकित्सा व्यय;
(ग) पीड़ित व्यक्ति के नियंत्रण से किसी संपत्ति के विनाश, क्षति या हटाए जाने के कारण हुई हानि; और
(घ) पीड़ित व्यक्ति और उसके बच्चों (यदि कोई हो) के लिए भरण-पोषण, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 125 या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत भरण-पोषण के आदेश के तहत या उसके अतिरिक्त आदेश शामिल है।
(2) इस धारा के तहत दी जाने वाली मौद्रिक राहत पर्याप्त, उचित और तर्कसंगत होगी तथा पीड़ित व्यक्ति के जीवन स्तर के अनुरूप होगी।
(3) मजिस्ट्रेट को मामले की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुसार उचित एकमुश्त भुगतान या मासिक भरण-पोषण भुगतान का आदेश देने का अधिकार होगा।
(4) मजिस्ट्रेट उपधारा (1) के तहत मौद्रिक राहत के लिए दिए गए आदेश की एक प्रति आवेदन के पक्षकारों और उस पुलिस स्टेशन के प्रभारी को भेजेगा जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर प्रतिवादी निवास करता है।
(5) प्रतिवादी उपधारा (1) के तहत आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर पीड़ित व्यक्ति को दी गई मौद्रिक राहत का भुगतान करेगा।
(6) उपधारा (1) के तहत आदेश के अनुसार प्रतिवादी द्वारा भुगतान करने में विफल रहने पर, मजिस्ट्रेट नियोक्ता या प्रतिवादी के देनदार को निर्देश दे सकता है कि वह पीड़ित व्यक्ति को सीधे भुगतान करे या प्रतिवादी को देय या उसके खाते में जमा किए गए वेतन या मजदूरी या ऋण का एक हिस्सा न्यायालय में जमा करे, जिसे प्रतिवादी द्वारा देय मौद्रिक राहत के लिए समायोजित किया जा सकता है।
(क) आय की हानि;
(ख) चिकित्सा व्यय;
(ग) पीड़ित व्यक्ति के नियंत्रण से किसी संपत्ति के विनाश, क्षति या हटाए जाने के कारण हुई हानि; और
(घ) पीड़ित व्यक्ति और उसके बच्चों (यदि कोई हो) के लिए भरण-पोषण, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 125 या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत भरण-पोषण के आदेश के तहत या उसके अतिरिक्त आदेश शामिल है।
(2) इस धारा के तहत दी जाने वाली मौद्रिक राहत पर्याप्त, उचित और तर्कसंगत होगी तथा पीड़ित व्यक्ति के जीवन स्तर के अनुरूप होगी।
(3) मजिस्ट्रेट को मामले की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुसार उचित एकमुश्त भुगतान या मासिक भरण-पोषण भुगतान का आदेश देने का अधिकार होगा।
(4) मजिस्ट्रेट उपधारा (1) के तहत मौद्रिक राहत के लिए दिए गए आदेश की एक प्रति आवेदन के पक्षकारों और उस पुलिस स्टेशन के प्रभारी को भेजेगा जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा के भीतर प्रतिवादी निवास करता है।
(5) प्रतिवादी उपधारा (1) के तहत आदेश में निर्दिष्ट अवधि के भीतर पीड़ित व्यक्ति को दी गई मौद्रिक राहत का भुगतान करेगा।
(6) उपधारा (1) के तहत आदेश के अनुसार प्रतिवादी द्वारा भुगतान करने में विफल रहने पर, मजिस्ट्रेट नियोक्ता या प्रतिवादी के देनदार को निर्देश दे सकता है कि वह पीड़ित व्यक्ति को सीधे भुगतान करे या प्रतिवादी को देय या उसके खाते में जमा किए गए वेतन या मजदूरी या ऋण का एक हिस्सा न्यायालय में जमा करे, जिसे प्रतिवादी द्वारा देय मौद्रिक राहत के लिए समायोजित किया जा सकता है।
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