IBC 77अध्याय II · Chapter VII Offences and Penalties
धारा 77 · कॉर्पोरेट देनदार द्वारा आवेदन में गलत जानकारी देने पर दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
कहाँ
(क) कोई निगम देनदार धारा 10 के तहत आवेदन में ऐसी जानकारी प्रदान करता है जो महत्वपूर्ण विवरणों में झूठी है, यह जानते हुए कि वह झूठी है और किसी महत्वपूर्ण तथ्य को जानबूझकर छोड़ देता है; या
(ख) कोई भी व्यक्ति जिसने जानबूझकर और स्वेच्छा से उप-खंड (क) के अंतर्गत ऐसी जानकारी प्रदान करने की अनुमति दी हो,
ऐसे निगमित देनदार या व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, को कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जो पांच वर्ष तक बढ़ सकती है, या कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो एक करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है, या दोनों।
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(क) कोई निगम देनदार धारा 10 के तहत आवेदन में ऐसी जानकारी प्रदान करता है जो महत्वपूर्ण विवरणों में झूठी है, यह जानते हुए कि वह झूठी है और किसी महत्वपूर्ण तथ्य को जानबूझकर छोड़ देता है; या
(ख) कोई भी व्यक्ति जिसने जानबूझकर और स्वेच्छा से उप-खंड (क) के अंतर्गत ऐसी जानकारी प्रदान करने की अनुमति दी हो,
ऐसे निगमित देनदार या व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, को कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जो पांच वर्ष तक बढ़ सकती है, या कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो एक करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है, या दोनों।
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अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 5 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- ₹1,00,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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