BC Act 7अध्याय IV · Management of Corresponding New Banks
धारा 7 · मुख्यालय एवं प्रबंधन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक समरूप नए बैंक का प्रधान कार्यालय ऐसे स्थान पर होगा जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट करे, और जब तक ऐसा कोई स्थान निर्दिष्ट नहीं किया जाता, तब तक वह ऐसे स्थान पर होगा जहाँ उस मौजूदा बैंक का प्रधान कार्यालय स्थित है जिसके संबंध में यह समरूप नया बैंक है, इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर।
(2) किसी समरूप नए बैंक के मामलों और व्यवसाय का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन निदेशक मंडल में निहित होगा, जो उन सभी शक्तियों का प्रयोग करने और उन सभी कार्यों और चीजों को करने का हकदार होगा, जिन्हें समरूप नया बैंक करने और प्रयोग करने के लिए अधिकृत है।
(3) (क) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के तुरंत बाद, केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, एक समरूप नए बैंक के प्रथम निदेशक मंडल का गठन करेगी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले सात से अधिक व्यक्ति नहीं होंगे, और इस प्रकार नियुक्त प्रत्येक निदेशक तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक कि धारा 9 के तहत बनाई गई योजना के अनुसार ऐसे समरूप नए बैंक के निदेशक मंडल का गठन नहीं हो जाता।
बशर्ते कि केंद्र सरकार, यदि उसकी राय में संबंधित नए बैंक के हित में ऐसा करना आवश्यक हो, तो प्रथम निदेशक मंडल की सदस्यता से किसी व्यक्ति को हटाकर उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है।
(ख) प्रथम निदेशक मंडल का प्रत्येक सदस्य (जो केंद्र सरकार या रिजर्व बैंक का अधिकारी न हो) ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो उस पारिश्रमिक के बराबर हो जो मौजूदा बैंक के निदेशक मंडल का कोई सदस्य इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले प्राप्त करने का हकदार था।
(4) जब तक केंद्र सरकार द्वारा उप-धारा (3) के अधीन प्रथम निदेशक मंडल नियुक्त नहीं किया जाता, तब तक किसी समरूप नए बैंक के मामलों और व्यवसाय का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन एक संरक्षक में निहित रहेगा, जो उस बैंक का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा और वह उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और वे सभी कार्य और चीजें कर सकता है जो उस बैंक द्वारा प्रयोग या किए जा सकते हैं।
(5) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी मौजूदा बैंक के अध्यक्ष के पद पर आसीन व्यक्ति, संबंधित नए बैंक के संरक्षक होंगे और उन्हें वही पारिश्रमिक प्राप्त होंगे जो उन्हें इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले प्राप्त हो रहे थे।
बशर्ते कि यदि किसी मौजूदा बैंक का अध्यक्ष संबंधित नए बैंक का संरक्षक बनने या उस पद पर बने रहने से इनकार करता है, या यदि केंद्र सरकार की राय है कि संबंधित नए बैंक के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित नए बैंक का संरक्षक नियुक्त कर सकती है और इस प्रकार नियुक्त संरक्षक को केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट पारिश्रमिक प्राप्त होंगे।
स्पष्टीकरण। --इस उपधारा में और धारा 12 की उपधारा (1) में, किसी भी मौजूदा बैंक के संबंध में "अध्यक्ष" अभिव्यक्ति में वह व्यक्ति शामिल है जो अध्यक्ष के कर्तव्यों का निर्वहन करता है या अन्यथा उस बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करता है।
(6) संरक्षक केंद्रीय सरकार की इच्छा के अनुसार पद पर बना रहेगा।
(2) किसी समरूप नए बैंक के मामलों और व्यवसाय का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन निदेशक मंडल में निहित होगा, जो उन सभी शक्तियों का प्रयोग करने और उन सभी कार्यों और चीजों को करने का हकदार होगा, जिन्हें समरूप नया बैंक करने और प्रयोग करने के लिए अधिकृत है।
(3) (क) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के तुरंत बाद, केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक से परामर्श करके, एक समरूप नए बैंक के प्रथम निदेशक मंडल का गठन करेगी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाने वाले सात से अधिक व्यक्ति नहीं होंगे, और इस प्रकार नियुक्त प्रत्येक निदेशक तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक कि धारा 9 के तहत बनाई गई योजना के अनुसार ऐसे समरूप नए बैंक के निदेशक मंडल का गठन नहीं हो जाता।
बशर्ते कि केंद्र सरकार, यदि उसकी राय में संबंधित नए बैंक के हित में ऐसा करना आवश्यक हो, तो प्रथम निदेशक मंडल की सदस्यता से किसी व्यक्ति को हटाकर उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है।
(ख) प्रथम निदेशक मंडल का प्रत्येक सदस्य (जो केंद्र सरकार या रिजर्व बैंक का अधिकारी न हो) ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो उस पारिश्रमिक के बराबर हो जो मौजूदा बैंक के निदेशक मंडल का कोई सदस्य इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले प्राप्त करने का हकदार था।
(4) जब तक केंद्र सरकार द्वारा उप-धारा (3) के अधीन प्रथम निदेशक मंडल नियुक्त नहीं किया जाता, तब तक किसी समरूप नए बैंक के मामलों और व्यवसाय का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन एक संरक्षक में निहित रहेगा, जो उस बैंक का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा और वह उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है और वे सभी कार्य और चीजें कर सकता है जो उस बैंक द्वारा प्रयोग या किए जा सकते हैं।
(5) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी मौजूदा बैंक के अध्यक्ष के पद पर आसीन व्यक्ति, संबंधित नए बैंक के संरक्षक होंगे और उन्हें वही पारिश्रमिक प्राप्त होंगे जो उन्हें इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले प्राप्त हो रहे थे।
बशर्ते कि यदि किसी मौजूदा बैंक का अध्यक्ष संबंधित नए बैंक का संरक्षक बनने या उस पद पर बने रहने से इनकार करता है, या यदि केंद्र सरकार की राय है कि संबंधित नए बैंक के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित नए बैंक का संरक्षक नियुक्त कर सकती है और इस प्रकार नियुक्त संरक्षक को केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट पारिश्रमिक प्राप्त होंगे।
स्पष्टीकरण। --इस उपधारा में और धारा 12 की उपधारा (1) में, किसी भी मौजूदा बैंक के संबंध में "अध्यक्ष" अभिव्यक्ति में वह व्यक्ति शामिल है जो अध्यक्ष के कर्तव्यों का निर्वहन करता है या अन्यथा उस बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करता है।
(6) संरक्षक केंद्रीय सरकार की इच्छा के अनुसार पद पर बना रहेगा।
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