BC Act 10अध्याय V · Miscellaneous
धारा 10 · खातों को बंद करना और मुनाफे का निपटान करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक पत्राचार नया बैंक 31 दिसंबर [या प्रत्येक वर्ष में ऐसी अन्य तिथि, जैसा कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे] को अपनी पुस्तकों को बंद और संतुलित करवाएगा तथा रिजर्व बैंक की पूर्व स्वीकृति से अपने खातों के लेखापरीक्षा हेतु लेखापरीक्षकों की नियुक्ति करेगा।
2. इस उपधारा के अधीन एक लेखा अवधि से दूसरी लेखा अवधि में संक्रमण को सुगम बनाने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, संबंधित वर्षों के लिए पुस्तकों को बंद करने और संतुलित करने, या उनसे संबंधित अन्य मामलों के लिए, ऐसे प्रावधान कर सकती है जिन्हें वह आवश्यक या उपयुक्त समझे।
(2) किसी संगत नए बैंक का प्रत्येक लेखा परीक्षक ऐसा व्यक्ति होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 141 के तहत कंपनी के लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए योग्य हो और उसे ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त होगा जैसा संगत नया बैंक निर्धारित करे।
(3) प्रत्येक लेखा परीक्षक को वार्षिक बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते की एक प्रति तथा संबंधित नए बैंक द्वारा रखी गई सभी पुस्तकों की एक सूची उपलब्ध कराई जाएगी, और लेखा परीक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते की उससे संबंधित खातों और वाउचरों सहित जांच करे, और अपने कर्तव्यों के पालन में, लेखा परीक्षक--
(क) संबंधित नए बैंक की पुस्तकों, खातों और अन्य दस्तावेजों तक सभी उचित समय पर पहुंच होगी;
(ख) संबंधित नए बैंक के खर्चे पर, वह ऐसे खातों की जांच में सहायता के लिए लेखाकार या अन्य व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है; और
(ग) ऐसे खातों के संबंध में, वह अभिरक्षक या संबंधित नए बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की जांच कर सकता है।
(4) प्रत्येक समवर्ती नए बैंक का लेखा परीक्षक केंद्र सरकार को वार्षिक बैलेंस शीट और खातों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में वह यह बताएगा--
(क) क्या उनकी राय में बैलेंस शीट एक पूर्ण और निष्पक्ष बैलेंस शीट है जिसमें सभी आवश्यक विवरण शामिल हैं और इसे इस प्रकार उचित रूप से तैयार किया गया है जिससे संबंधित नए बैंक के मामलों का सही और निष्पक्ष चित्रण हो सके, और यदि उन्होंने कोई स्पष्टीकरण या जानकारी मांगी है, तो क्या वह दी गई है और क्या वह संतोषजनक है;
(ख) क्या संबंधित नए बैंक के वे लेन-देन, जो उसके संज्ञान में आए हैं, उस बैंक की शक्तियों के दायरे में हैं या नहीं;
(ग) क्या संबंधित नए बैंक के कार्यालयों और शाखाओं से प्राप्त प्रतिफल उसके लेखापरीक्षा के उद्देश्य के लिए पर्याप्त पाए गए हैं या नहीं;
(घ) क्या लाभ और हानि खाता उक्त खाते द्वारा कवर की गई अवधि के लिए लाभ या हानि का सही शेष दर्शाता है; और
(ई) कोई अन्य मामला जिसे वह केंद्र सरकार के संज्ञान में लाना उचित समझता हो।
5 [ स्पष्टीकरण I.--- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए,---
(क) बैलेंस शीट को संबंधित नए बैंक के मामलों का सही और निष्पक्ष विवरण न देने वाला नहीं माना जाएगा, और ऐसे खाते द्वारा कवर की गई अवधि के लिए, केवल इस कारण से कि बैलेंस शीट या, जैसा भी मामला हो, लाभ और हानि खाते में ऐसे किसी भी मामले का खुलासा नहीं किया गया है, जिनका खुलासा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) के प्रावधानों के अनुसार, इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाए, तो नहीं किया जाना आवश्यक है।
स्पष्टीकरण II.--- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, संबंधित नए बैंक के खातों को केवल इस आधार पर विधिवत रूप से तैयार नहीं माना जाएगा कि उनमें कुछ मामलों का खुलासा नहीं किया गया है, यदि---
(i) वे मामले ऐसे हैं जिन्हें संबंधित नए बैंक को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) में निहित किसी प्रावधान के आधार पर, इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाए, प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है; और
(ii) खंड (i) में निर्दिष्ट प्रावधान संबंधित नए बैंक के बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते में या लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में निर्दिष्ट हैं।]
(5) लेखा परीक्षक की रिपोर्ट सत्यापित, हस्ताक्षरित और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
(6) लेखा परीक्षक लेखापरीक्षा रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित नए बैंक और रिजर्व बैंक को भी भेजेगा।
(7) अशोध्य एवं संदिग्ध ऋणों, परिसंपत्तियों में मूल्यह्रास, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्ति निधियों में अंशदान और अन्य सभी मामलों के लिए प्रावधान करने के बाद, जिनके लिए किसी कानून के तहत प्रावधान आवश्यक है, या जिनके लिए आमतौर पर बैंकिंग कंपनियों द्वारा प्रावधान किया जाता है, एक संगत नया बैंक 6 [अपने शुद्ध लाभ में से लाभांश घोषित कर सकता है और यदि कोई अधिशेष हो तो उसे अपने पास रख सकता है।]
7 [(7ए) प्रत्येक पत्राचार करने वाला नया बैंक केंद्र सरकार 8 [और रिजर्व बैंक को] वार्षिक बैलेंस शीट, लाभ और हानि खाता, लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और खातों द्वारा कवर की गई अवधि के दौरान बैंक के कामकाज और गतिविधियों पर अपने निदेशक मंडल की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।]
(8) केंद्र सरकार प्रत्येक लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और प्रत्येक संबंधित नए बैंक के कामकाज और गतिविधियों पर रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष यथाशीघ्र प्रस्तुत करवाएगी ।
8 (9) पूर्वोक्त प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार किसी भी समय, समरूप नए बैंक के खातों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए उतने लेखा परीक्षकों की नियुक्ति कर सकती है जितने वह उचित समझे, और इस प्रकार नियुक्त लेखा परीक्षकों को समरूप नए बैंक के खातों के लेखापरीक्षा के संबंध में वे सभी अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो समरूप नए बैंक द्वारा इस धारा के अंतर्गत नियुक्त लेखा परीक्षक को प्राप्त होते हैं।]
2. इस उपधारा के अधीन एक लेखा अवधि से दूसरी लेखा अवधि में संक्रमण को सुगम बनाने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, संबंधित वर्षों के लिए पुस्तकों को बंद करने और संतुलित करने, या उनसे संबंधित अन्य मामलों के लिए, ऐसे प्रावधान कर सकती है जिन्हें वह आवश्यक या उपयुक्त समझे।
(2) किसी संगत नए बैंक का प्रत्येक लेखा परीक्षक ऐसा व्यक्ति होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 141 के तहत कंपनी के लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए योग्य हो और उसे ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त होगा जैसा संगत नया बैंक निर्धारित करे।
(3) प्रत्येक लेखा परीक्षक को वार्षिक बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते की एक प्रति तथा संबंधित नए बैंक द्वारा रखी गई सभी पुस्तकों की एक सूची उपलब्ध कराई जाएगी, और लेखा परीक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते की उससे संबंधित खातों और वाउचरों सहित जांच करे, और अपने कर्तव्यों के पालन में, लेखा परीक्षक--
(क) संबंधित नए बैंक की पुस्तकों, खातों और अन्य दस्तावेजों तक सभी उचित समय पर पहुंच होगी;
(ख) संबंधित नए बैंक के खर्चे पर, वह ऐसे खातों की जांच में सहायता के लिए लेखाकार या अन्य व्यक्तियों को नियुक्त कर सकता है; और
(ग) ऐसे खातों के संबंध में, वह अभिरक्षक या संबंधित नए बैंक के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी की जांच कर सकता है।
(4) प्रत्येक समवर्ती नए बैंक का लेखा परीक्षक केंद्र सरकार को वार्षिक बैलेंस शीट और खातों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट में वह यह बताएगा--
(क) क्या उनकी राय में बैलेंस शीट एक पूर्ण और निष्पक्ष बैलेंस शीट है जिसमें सभी आवश्यक विवरण शामिल हैं और इसे इस प्रकार उचित रूप से तैयार किया गया है जिससे संबंधित नए बैंक के मामलों का सही और निष्पक्ष चित्रण हो सके, और यदि उन्होंने कोई स्पष्टीकरण या जानकारी मांगी है, तो क्या वह दी गई है और क्या वह संतोषजनक है;
(ख) क्या संबंधित नए बैंक के वे लेन-देन, जो उसके संज्ञान में आए हैं, उस बैंक की शक्तियों के दायरे में हैं या नहीं;
(ग) क्या संबंधित नए बैंक के कार्यालयों और शाखाओं से प्राप्त प्रतिफल उसके लेखापरीक्षा के उद्देश्य के लिए पर्याप्त पाए गए हैं या नहीं;
(घ) क्या लाभ और हानि खाता उक्त खाते द्वारा कवर की गई अवधि के लिए लाभ या हानि का सही शेष दर्शाता है; और
(ई) कोई अन्य मामला जिसे वह केंद्र सरकार के संज्ञान में लाना उचित समझता हो।
5 [ स्पष्टीकरण I.--- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए,---
(क) बैलेंस शीट को संबंधित नए बैंक के मामलों का सही और निष्पक्ष विवरण न देने वाला नहीं माना जाएगा, और ऐसे खाते द्वारा कवर की गई अवधि के लिए, केवल इस कारण से कि बैलेंस शीट या, जैसा भी मामला हो, लाभ और हानि खाते में ऐसे किसी भी मामले का खुलासा नहीं किया गया है, जिनका खुलासा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) के प्रावधानों के अनुसार, इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाए, तो नहीं किया जाना आवश्यक है।
स्पष्टीकरण II.--- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, संबंधित नए बैंक के खातों को केवल इस आधार पर विधिवत रूप से तैयार नहीं माना जाएगा कि उनमें कुछ मामलों का खुलासा नहीं किया गया है, यदि---
(i) वे मामले ऐसे हैं जिन्हें संबंधित नए बैंक को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (10 ऑफ 1949) में निहित किसी प्रावधान के आधार पर, इस अधिनियम या किसी अन्य अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाए, प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है; और
(ii) खंड (i) में निर्दिष्ट प्रावधान संबंधित नए बैंक के बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते में या लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में निर्दिष्ट हैं।]
(5) लेखा परीक्षक की रिपोर्ट सत्यापित, हस्ताक्षरित और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
(6) लेखा परीक्षक लेखापरीक्षा रिपोर्ट की एक प्रति संबंधित नए बैंक और रिजर्व बैंक को भी भेजेगा।
(7) अशोध्य एवं संदिग्ध ऋणों, परिसंपत्तियों में मूल्यह्रास, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्ति निधियों में अंशदान और अन्य सभी मामलों के लिए प्रावधान करने के बाद, जिनके लिए किसी कानून के तहत प्रावधान आवश्यक है, या जिनके लिए आमतौर पर बैंकिंग कंपनियों द्वारा प्रावधान किया जाता है, एक संगत नया बैंक 6 [अपने शुद्ध लाभ में से लाभांश घोषित कर सकता है और यदि कोई अधिशेष हो तो उसे अपने पास रख सकता है।]
7 [(7ए) प्रत्येक पत्राचार करने वाला नया बैंक केंद्र सरकार 8 [और रिजर्व बैंक को] वार्षिक बैलेंस शीट, लाभ और हानि खाता, लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और खातों द्वारा कवर की गई अवधि के दौरान बैंक के कामकाज और गतिविधियों पर अपने निदेशक मंडल की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।]
(8) केंद्र सरकार प्रत्येक लेखा परीक्षक की रिपोर्ट और प्रत्येक संबंधित नए बैंक के कामकाज और गतिविधियों पर रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष यथाशीघ्र प्रस्तुत करवाएगी ।
8 (9) पूर्वोक्त प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार किसी भी समय, समरूप नए बैंक के खातों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए उतने लेखा परीक्षकों की नियुक्ति कर सकती है जितने वह उचित समझे, और इस प्रकार नियुक्त लेखा परीक्षकों को समरूप नए बैंक के खातों के लेखापरीक्षा के संबंध में वे सभी अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार प्राप्त होंगे जो समरूप नए बैंक द्वारा इस धारा के अंतर्गत नियुक्त लेखा परीक्षक को प्राप्त होते हैं।]
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
