PGST Act 75अध्याय XV · Demands and Recovery
धारा 75 · कर निर्धारण से संबंधित सामान्य प्रावधान
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(1)
जहाँ किसी न्यायालय या अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश द्वारा नोटिस की तामील या आदेश जारी करने पर रोक लगा दी गई हो, तो धारा 73 की उपधारा (2) और (10) या धारा 74 की उपधारा (2) और (10) में निर्दिष्ट अवधि की गणना में ऐसी रोक की अवधि को बाहर रखा जाएगा।(2)
जहाँ कोई अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि धारा 74 की उपधारा (1) के अंतर्गत जारी किया गया नोटिस इस कारण से मान्य नहीं है कि जिस व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया था, उसके विरुद्ध धोखाधड़ी या कर से बचने के लिए जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को छुपाने के आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, तो उचित अधिकारी ऐसे व्यक्ति द्वारा देय कर का निर्धारण इस प्रकार करेगा मानो नोटिस धारा 73 की उपधारा (1) के अंतर्गत जारी किया गया हो।(3)
जहां अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय के निर्देश के अनुसरण में कोई आदेश जारी करना आवश्यक हो, तो ऐसा आदेश उक्त निर्देश की सूचना की तिथि से दो वर्ष के भीतर जारी किया जाएगा।(4)
सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा जहाँ कर या जुर्माना के लिए उत्तरदायी व्यक्ति से लिखित में अनुरोध प्राप्त होता है, या जहाँ ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कोई प्रतिकूल निर्णय विचाराधीन है।(5)
उचित अधिकारी, यदि कर के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा पर्याप्त कारण बताया जाता है, तो उक्त व्यक्ति को समय देगा और लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से सुनवाई स्थगित करेगा: बशर्ते कि कार्यवाही के दौरान किसी व्यक्ति को तीन बार से अधिक स्थगन नहीं दिया जाएगा।(6)
उचित अधिकारी अपने आदेश में प्रासंगिक तथ्यों और अपने निर्णय के आधार को स्पष्ट करेगा।(7)
आदेश में मांगे गए कर, ब्याज और जुर्माने की राशि नोटिस में निर्दिष्ट राशि से अधिक नहीं होगी और नोटिस में निर्दिष्ट आधारों के अलावा किसी अन्य आधार पर कोई मांग की पुष्टि नहीं की जाएगी।(8)
जहां अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय उचित अधिकारी द्वारा निर्धारित कर की राशि में संशोधन करता है, तो ब्याज और जुर्माने की राशि तदनुसार संशोधित कर की राशि को ध्यान में रखते हुए संशोधित हो जाएगी।(9)
कम भुगतान किए गए या भुगतान न किए गए कर पर ब्याज देय होगा, चाहे कर देयता निर्धारित करने वाले आदेश में निर्दिष्ट हो या न हो।(10)
यदि धारा 73 की उपधारा (10) में दिए गए प्रावधान के अनुसार तीन वर्ष के भीतर या धारा 74 की उपधारा (10) में दिए गए प्रावधान के अनुसार पांच वर्ष के भीतर आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो न्यायनिर्णय कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी।(11)
यदि किसी अन्य कार्यवाही में अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय ने ऐसा निर्णय दिया है जो राजस्व के हित के प्रतिकूल है, और अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय के ऐसे निर्णय के विरुद्ध अपीलीय न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील लंबित है, तो अपीलीय प्राधिकारी और अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय की तिथि के बीच या अपीलीय न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय के निर्णय की तिथि के बीच या उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की तिथि के बीच की अवधि को धारा 73 की उपधारा (10) या धारा 74 की उपधारा (10) में निर्दिष्ट अवधि की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा, जहाँ उक्त धाराओं के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्यवाही प्रारंभ की जाती है।(12)
धारा 73 या धारा 74 में किसी बात के होते हुए भी, यदि धारा 39 के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए विवरण के अनुसार स्व-निर्धारित कर की कोई राशि पूर्णतः या आंशिकतः अदा न की गई हो, या ऐसे कर पर देय ब्याज की कोई राशि अदा न की गई हो, तो उसे धारा 79 के प्रावधानों के अंतर्गत वसूल किया जाएगा।(13)
जहाँ धारा 73 या धारा 74 के तहत कोई दंड लगाया जाता है, तो उसी कार्य या चूक के लिए उसी व्यक्ति पर इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के तहत कोई दंड नहीं लगाया जाएगा।इस धारा पर आपका निजी नोट
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