GIG Act 57अध्याय IX · Miscellaneous
धारा 57 · भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की वैधता पर सवाल उठने की स्थिति में कार्यवाही पर रोक लगाना आदि।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि किसी भौगोलिक संकेत के उल्लंघन के मुकदमे में प्रतिवादी यह दलील दे कि वादी से संबंधित भौगोलिक संकेत का पंजीकरण अमान्य है, तो मुकदमे की सुनवाई करने वाला न्यायालय (जिसे इसके बाद न्यायालय कहा जाएगा) निम्नलिखित कार्य करेगा:--
(क) यदि वादी या प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक संकेत के लिए रजिस्टर के सुधार हेतु कोई कार्यवाही रजिस्ट्रार या 1 [उच्च न्यायालय] के समक्ष लंबित है, तो ऐसी कार्यवाही के अंतिम निपटारे तक मुकदमे को स्थगित कर दिया जाए;
(ख) यदि ऐसी कोई कार्यवाही लंबित नहीं है और न्यायालय संतुष्ट है कि वादी या प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की अमान्यता के संबंध में दलील प्रथम दृष्टया मान्य है, तो इस संबंध में एक मुद्दा उठाएं और संबंधित पक्ष को रजिस्टर के सुधार के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन करने में सक्षम बनाने के लिए मुद्दे के निर्धारण की तिथि से तीन महीने की अवधि के लिए मामले को स्थगित कर दें।
(2) यदि संबंधित पक्ष न्यायालय को यह सिद्ध कर दे कि उसने उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट समय के भीतर या न्यायालय द्वारा पर्याप्त कारणवश अनुमत विस्तारित समय के भीतर ऐसा कोई आवेदन किया है, तो सुधार कार्यवाही के अंतिम निपटारे तक वाद की सुनवाई स्थगित रहेगी।
(3) यदि उपर्युक्त समय के भीतर या न्यायालय द्वारा अनुमत विस्तारित समय के भीतर ऐसा कोई आवेदन नहीं किया गया है, तो संबंधित भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की वैधता का मुद्दा परित्यक्त माना जाएगा और न्यायालय मामले में अन्य मुद्दों के संबंध में मुकदमे की कार्यवाही करेगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी भी सुधार कार्यवाही में दिया गया अंतिम आदेश पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा और न्यायालय भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की वैधता के मुद्दे से संबंधित मामले में ऐसे आदेश के अनुरूप वाद का निपटारा करेगा।
(5) इस धारा के तहत किसी भौगोलिक संकेत के उल्लंघन के मुकदमे पर स्थगन न्यायालय को मुकदमे पर स्थगन की अवधि के दौरान कोई अंतरिम आदेश (जिसमें निषेधाज्ञा देना, लेखा-जोखा रखने का निर्देश देना, रिसीवर नियुक्त करना या किसी संपत्ति को कुर्क करना शामिल है) देने से नहीं रोकेगा।
(क) यदि वादी या प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक संकेत के लिए रजिस्टर के सुधार हेतु कोई कार्यवाही रजिस्ट्रार या 1 [उच्च न्यायालय] के समक्ष लंबित है, तो ऐसी कार्यवाही के अंतिम निपटारे तक मुकदमे को स्थगित कर दिया जाए;
(ख) यदि ऐसी कोई कार्यवाही लंबित नहीं है और न्यायालय संतुष्ट है कि वादी या प्रतिवादी से संबंधित भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की अमान्यता के संबंध में दलील प्रथम दृष्टया मान्य है, तो इस संबंध में एक मुद्दा उठाएं और संबंधित पक्ष को रजिस्टर के सुधार के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन करने में सक्षम बनाने के लिए मुद्दे के निर्धारण की तिथि से तीन महीने की अवधि के लिए मामले को स्थगित कर दें।
(2) यदि संबंधित पक्ष न्यायालय को यह सिद्ध कर दे कि उसने उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट समय के भीतर या न्यायालय द्वारा पर्याप्त कारणवश अनुमत विस्तारित समय के भीतर ऐसा कोई आवेदन किया है, तो सुधार कार्यवाही के अंतिम निपटारे तक वाद की सुनवाई स्थगित रहेगी।
(3) यदि उपर्युक्त समय के भीतर या न्यायालय द्वारा अनुमत विस्तारित समय के भीतर ऐसा कोई आवेदन नहीं किया गया है, तो संबंधित भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की वैधता का मुद्दा परित्यक्त माना जाएगा और न्यायालय मामले में अन्य मुद्दों के संबंध में मुकदमे की कार्यवाही करेगा।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी भी सुधार कार्यवाही में दिया गया अंतिम आदेश पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा और न्यायालय भौगोलिक संकेत के पंजीकरण की वैधता के मुद्दे से संबंधित मामले में ऐसे आदेश के अनुरूप वाद का निपटारा करेगा।
(5) इस धारा के तहत किसी भौगोलिक संकेत के उल्लंघन के मुकदमे पर स्थगन न्यायालय को मुकदमे पर स्थगन की अवधि के दौरान कोई अंतरिम आदेश (जिसमें निषेधाज्ञा देना, लेखा-जोखा रखने का निर्देश देना, रिसीवर नियुक्त करना या किसी संपत्ति को कुर्क करना शामिल है) देने से नहीं रोकेगा।
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