RTI Act 8अध्याय II · Right to Information and Obligations of Public Authorities
धारा 8 · सूचना के प्रकटीकरण से छूट।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी नागरिक को देने का कोई दायित्व नहीं होगा,--
(क) ऐसी सूचना, जिसका खुलासा भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य के सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेशी राज्यों के साथ संबंधों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा या किसी अपराध को उकसाने का कारण बनेगा;
(ख) ऐसी जानकारी जिसे किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा प्रकाशित करने से स्पष्ट रूप से मना किया गया हो या जिसका खुलासा न्यायालय की अवमानना हो सकता हो;
(ग) ऐसी सूचना, जिसका खुलासा संसद या राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार का उल्लंघन करेगा;
(घ) वाणिज्यिक गोपनीयता, व्यापार रहस्य या बौद्धिक संपदा सहित ऐसी जानकारी, जिसका खुलासा किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचाएगा, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी जानकारी के खुलासे को उचित ठहराता है;
(ई) किसी व्यक्ति को उसके न्यासी संबंध में उपलब्ध जानकारी, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी जानकारी के प्रकटीकरण को उचित ठहराता है;
(f) विदेशी सरकार से गोपनीय रूप से प्राप्त जानकारी;
(जी) ऐसी जानकारी, जिसका खुलासा किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है या कानून प्रवर्तन या सुरक्षा उद्देश्यों के लिए गोपनीय रूप से दी गई जानकारी या सहायता के स्रोत की पहचान कर सकता है;
(h) ऐसी जानकारी जो अपराधियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करे;
(i) मंत्रिमंडल के कागजात जिनमें मंत्रिपरिषद, सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख शामिल हैं:
बशर्ते कि मंत्रिपरिषद के निर्णय, उनके कारण और वे सामग्रियां जिनके आधार पर निर्णय लिए गए थे, निर्णय लिए जाने और मामला पूर्ण हो जाने के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे:
इसके अलावा, इस धारा में निर्दिष्ट छूटों के अंतर्गत आने वाले मामलों का खुलासा नहीं किया जाएगा;
(j) ऐसी सूचना जो व्यक्तिगत सूचना से संबंधित हो और जिसका खुलासा किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से संबंधित न हो, या जिससे व्यक्ति की निजता का अनुचित उल्लंघन हो, जब तक कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी सूचना के खुलासे को उचित ठहराता है:
बशर्ते कि जो जानकारी संसद या राज्य विधानमंडल को देने से इनकार नहीं किया जा सकता, वह किसी भी व्यक्ति को देने से इनकार नहीं किया जाएगा।
(2) आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 (1923 का 19) में किसी भी बात के होते हुए भी, न ही उप-धारा (1) के अनुसार अनुमत किसी भी छूट के होते हुए, कोई सार्वजनिक प्राधिकरण सूचना तक पहुंच की अनुमति दे सकता है, यदि प्रकटीकरण में सार्वजनिक हित संरक्षित हितों को होने वाले नुकसान से अधिक हो।
(3) उपधारा (1) के खंड (क) , (ग) और (i) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, धारा 6 के तहत अनुरोध किए जाने की तिथि से बीस वर्ष पूर्व घटित हुई किसी घटना, विषय या मामले से संबंधित कोई भी जानकारी उस धारा के तहत अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रदान की जाएगी:
बशर्ते कि यदि इस बात को लेकर कोई प्रश्न उठता है कि उक्त बीस वर्ष की अवधि की गणना किस तिथि से की जानी है, तो इस अधिनियम में दिए गए सामान्य अपील प्रावधानों के अधीन रहते हुए केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
(क) ऐसी सूचना, जिसका खुलासा भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य के सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेशी राज्यों के साथ संबंधों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा या किसी अपराध को उकसाने का कारण बनेगा;
(ख) ऐसी जानकारी जिसे किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा प्रकाशित करने से स्पष्ट रूप से मना किया गया हो या जिसका खुलासा न्यायालय की अवमानना हो सकता हो;
(ग) ऐसी सूचना, जिसका खुलासा संसद या राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार का उल्लंघन करेगा;
(घ) वाणिज्यिक गोपनीयता, व्यापार रहस्य या बौद्धिक संपदा सहित ऐसी जानकारी, जिसका खुलासा किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचाएगा, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी जानकारी के खुलासे को उचित ठहराता है;
(ई) किसी व्यक्ति को उसके न्यासी संबंध में उपलब्ध जानकारी, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी जानकारी के प्रकटीकरण को उचित ठहराता है;
(f) विदेशी सरकार से गोपनीय रूप से प्राप्त जानकारी;
(जी) ऐसी जानकारी, जिसका खुलासा किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है या कानून प्रवर्तन या सुरक्षा उद्देश्यों के लिए गोपनीय रूप से दी गई जानकारी या सहायता के स्रोत की पहचान कर सकता है;
(h) ऐसी जानकारी जो अपराधियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करे;
(i) मंत्रिमंडल के कागजात जिनमें मंत्रिपरिषद, सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख शामिल हैं:
बशर्ते कि मंत्रिपरिषद के निर्णय, उनके कारण और वे सामग्रियां जिनके आधार पर निर्णय लिए गए थे, निर्णय लिए जाने और मामला पूर्ण हो जाने के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे:
इसके अलावा, इस धारा में निर्दिष्ट छूटों के अंतर्गत आने वाले मामलों का खुलासा नहीं किया जाएगा;
(j) ऐसी सूचना जो व्यक्तिगत सूचना से संबंधित हो और जिसका खुलासा किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से संबंधित न हो, या जिससे व्यक्ति की निजता का अनुचित उल्लंघन हो, जब तक कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी सूचना के खुलासे को उचित ठहराता है:
बशर्ते कि जो जानकारी संसद या राज्य विधानमंडल को देने से इनकार नहीं किया जा सकता, वह किसी भी व्यक्ति को देने से इनकार नहीं किया जाएगा।
(2) आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 (1923 का 19) में किसी भी बात के होते हुए भी, न ही उप-धारा (1) के अनुसार अनुमत किसी भी छूट के होते हुए, कोई सार्वजनिक प्राधिकरण सूचना तक पहुंच की अनुमति दे सकता है, यदि प्रकटीकरण में सार्वजनिक हित संरक्षित हितों को होने वाले नुकसान से अधिक हो।
(3) उपधारा (1) के खंड (क) , (ग) और (i) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, धारा 6 के तहत अनुरोध किए जाने की तिथि से बीस वर्ष पूर्व घटित हुई किसी घटना, विषय या मामले से संबंधित कोई भी जानकारी उस धारा के तहत अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रदान की जाएगी:
बशर्ते कि यदि इस बात को लेकर कोई प्रश्न उठता है कि उक्त बीस वर्ष की अवधि की गणना किस तिथि से की जानी है, तो इस अधिनियम में दिए गए सामान्य अपील प्रावधानों के अधीन रहते हुए केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा।
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