RTI Act 19अध्याय V · Powers and Functions of the Information Commissions, Appeal and Penalties
धारा 19 · निवेदन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई भी व्यक्ति जिसे धारा 7 की उपधारा (1) या उपधारा (3) के खंड (क) में निर्दिष्ट समय के भीतर निर्णय प्राप्त नहीं होता है, या केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, के निर्णय से व्यथित होता है, तो वह ऐसी अवधि की समाप्ति से या ऐसे निर्णय की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर ऐसे अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है जो केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, से वरिष्ठ पद पर हो, प्रत्येक लोक प्राधिकरण में।
बशर्ते कि यदि ऐसा अधिकारी संतुष्ट है कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था, तो वह तीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।
(2) जहां केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा धारा 11 के तहत तृतीय पक्ष सूचना प्रकट करने के आदेश के विरुद्ध अपील की जाती है, तो संबंधित तृतीय पक्ष द्वारा अपील आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर की जाएगी।
(3) उपधारा (1) के तहत लिए गए निर्णय के विरुद्ध दूसरी अपील, निर्णय लिए जाने की तिथि से या वास्तव में निर्णय प्राप्त होने की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग के समक्ष की जा सकेगी।
बशर्ते कि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, नब्बे दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।
(4) यदि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, का वह निर्णय जिसके विरुद्ध अपील की गई है, किसी तीसरे पक्ष की सूचना से संबंधित है, तो केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, उस तीसरे पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर देगा।
(5) किसी भी अपील कार्यवाही में, यह साबित करने का भार कि अनुरोध को अस्वीकार करना उचित था, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी पर होगा, जैसा भी मामला हो, जिसने अनुरोध को अस्वीकार किया था।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत अपील का निपटारा अपील प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर या अपील दाखिल करने की तिथि से कुल पैंतालीस दिनों से अधिक की विस्तारित अवधि के भीतर, जैसा भी मामला हो, लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर किया जाएगा।
(7) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग का निर्णय, जैसा भी मामला हो, बाध्यकारी होगा।
(8) अपने निर्णय में, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को यह शक्ति प्राप्त है कि--
(क) सार्वजनिक प्राधिकरण को इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें शामिल हैं--
(i) अनुरोध किए जाने पर किसी विशेष रूप में सूचना उपलब्ध कराकर;
(ii) केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति द्वारा, जैसा भी मामला हो;
(iii) कुछ सूचना या सूचनाओं की श्रेणियों को प्रकाशित करके;
(iv) अभिलेखों के रखरखाव, प्रबंधन और नष्ट करने से संबंधित अपनी प्रक्रियाओं में आवश्यक परिवर्तन करके;
(v) अपने अधिकारियों के लिए सूचना के अधिकार पर प्रशिक्षण के प्रावधान को बढ़ाकर;
(vi) धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अनुपालन में इसे वार्षिक रिपोर्ट प्रदान करके;
(ख) सार्वजनिक प्राधिकरण को शिकायतकर्ता को हुए किसी भी नुकसान या अन्य हानि के लिए मुआवजा देने की आवश्यकता होगी;
(ग) इस अधिनियम के तहत निर्धारित किसी भी दंड को लागू करना;
(घ) आवेदन अस्वीकार करना।
(9) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, शिकायतकर्ता और सार्वजनिक प्राधिकरण को अपील के किसी भी अधिकार सहित अपने निर्णय की सूचना देगा।
(10) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, अपील का निर्णय ऐसी प्रक्रिया के अनुसार करेगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
बशर्ते कि यदि ऐसा अधिकारी संतुष्ट है कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था, तो वह तीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।
(2) जहां केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा धारा 11 के तहत तृतीय पक्ष सूचना प्रकट करने के आदेश के विरुद्ध अपील की जाती है, तो संबंधित तृतीय पक्ष द्वारा अपील आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर की जाएगी।
(3) उपधारा (1) के तहत लिए गए निर्णय के विरुद्ध दूसरी अपील, निर्णय लिए जाने की तिथि से या वास्तव में निर्णय प्राप्त होने की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग के समक्ष की जा सकेगी।
बशर्ते कि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, नब्बे दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था।
(4) यदि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, का वह निर्णय जिसके विरुद्ध अपील की गई है, किसी तीसरे पक्ष की सूचना से संबंधित है, तो केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, उस तीसरे पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर देगा।
(5) किसी भी अपील कार्यवाही में, यह साबित करने का भार कि अनुरोध को अस्वीकार करना उचित था, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी पर होगा, जैसा भी मामला हो, जिसने अनुरोध को अस्वीकार किया था।
(6) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत अपील का निपटारा अपील प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर या अपील दाखिल करने की तिथि से कुल पैंतालीस दिनों से अधिक की विस्तारित अवधि के भीतर, जैसा भी मामला हो, लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर किया जाएगा।
(7) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग का निर्णय, जैसा भी मामला हो, बाध्यकारी होगा।
(8) अपने निर्णय में, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को यह शक्ति प्राप्त है कि--
(क) सार्वजनिक प्राधिकरण को इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें शामिल हैं--
(i) अनुरोध किए जाने पर किसी विशेष रूप में सूचना उपलब्ध कराकर;
(ii) केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति द्वारा, जैसा भी मामला हो;
(iii) कुछ सूचना या सूचनाओं की श्रेणियों को प्रकाशित करके;
(iv) अभिलेखों के रखरखाव, प्रबंधन और नष्ट करने से संबंधित अपनी प्रक्रियाओं में आवश्यक परिवर्तन करके;
(v) अपने अधिकारियों के लिए सूचना के अधिकार पर प्रशिक्षण के प्रावधान को बढ़ाकर;
(vi) धारा 4 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अनुपालन में इसे वार्षिक रिपोर्ट प्रदान करके;
(ख) सार्वजनिक प्राधिकरण को शिकायतकर्ता को हुए किसी भी नुकसान या अन्य हानि के लिए मुआवजा देने की आवश्यकता होगी;
(ग) इस अधिनियम के तहत निर्धारित किसी भी दंड को लागू करना;
(घ) आवेदन अस्वीकार करना।
(9) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, शिकायतकर्ता और सार्वजनिक प्राधिकरण को अपील के किसी भी अधिकार सहित अपने निर्णय की सूचना देगा।
(10) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, अपील का निर्णय ऐसी प्रक्रिया के अनुसार करेगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
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