RTI Act 18अध्याय V · Powers and Functions of the Information Commissions, Appeal and Penalties
धारा 18 · सूचना आयोगों की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, का यह कर्तव्य होगा कि वह किसी व्यक्ति से प्राप्त शिकायत को प्राप्त करे और उसकी जांच करे,--
(क) जो केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, को अनुरोध प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा हो, या तो इस कारण से कि इस अधिनियम के तहत ऐसे किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है, या क्योंकि केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, ने इस अधिनियम के तहत सूचना या अपील के लिए उसके आवेदन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, ताकि उसे केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या धारा 19 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट वरिष्ठ अधिकारी या केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को अग्रेषित किया जा सके;
(ख) जिसे इस अधिनियम के तहत मांगी गई किसी भी जानकारी तक पहुंच से वंचित कर दिया गया हो;
(ग) जिसे इस अधिनियम के तहत निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सूचना या सूचना तक पहुंच के अनुरोध का जवाब नहीं दिया गया है;
(घ) जिसे शुल्क की ऐसी राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया हो जिसे वह अनुचित समझता हो;
(ई) जिसे यह विश्वास हो कि उसे इस अधिनियम के अंतर्गत अपूर्ण, भ्रामक या झूठी जानकारी दी गई है; और
(f) इस अधिनियम के अंतर्गत अभिलेखों तक पहुँच का अनुरोध करने या प्राप्त करने से संबंधित किसी अन्य मामले के संबंध में।
(2) जहाँ केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो कि मामले की जाँच करने के लिए उचित आधार हैं, तो वह इस संबंध में जाँच आरंभ कर सकता है।
(3) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, इस धारा के अंतर्गत किसी मामले की जांच करते समय, निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के समान शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति को लागू करना तथा उन्हें शपथ पर मौखिक या लिखित साक्ष्य देने तथा दस्तावेज़ या वस्तुएँ प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और निरीक्षण की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रतियां मंगवाना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए समन जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(4) संसद या राज्य विधानमंडल के किसी अन्य अधिनियम में निहित किसी असंगत बात के बावजूद, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के अंतर्गत किसी शिकायत की जांच के दौरान, इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले किसी भी अभिलेख की जांच कर सकता है जो सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रण में है, और ऐसे किसी अभिलेख को किसी भी आधार पर उससे रोका नहीं जा सकता है।
(क) जो केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, को अनुरोध प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा हो, या तो इस कारण से कि इस अधिनियम के तहत ऐसे किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है, या क्योंकि केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, ने इस अधिनियम के तहत सूचना या अपील के लिए उसके आवेदन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, ताकि उसे केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या धारा 19 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट वरिष्ठ अधिकारी या केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को अग्रेषित किया जा सके;
(ख) जिसे इस अधिनियम के तहत मांगी गई किसी भी जानकारी तक पहुंच से वंचित कर दिया गया हो;
(ग) जिसे इस अधिनियम के तहत निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सूचना या सूचना तक पहुंच के अनुरोध का जवाब नहीं दिया गया है;
(घ) जिसे शुल्क की ऐसी राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया हो जिसे वह अनुचित समझता हो;
(ई) जिसे यह विश्वास हो कि उसे इस अधिनियम के अंतर्गत अपूर्ण, भ्रामक या झूठी जानकारी दी गई है; और
(f) इस अधिनियम के अंतर्गत अभिलेखों तक पहुँच का अनुरोध करने या प्राप्त करने से संबंधित किसी अन्य मामले के संबंध में।
(2) जहाँ केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो कि मामले की जाँच करने के लिए उचित आधार हैं, तो वह इस संबंध में जाँच आरंभ कर सकता है।
(3) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, इस धारा के अंतर्गत किसी मामले की जांच करते समय, निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के समान शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) व्यक्तियों को बुलाना और उनकी उपस्थिति को लागू करना तथा उन्हें शपथ पर मौखिक या लिखित साक्ष्य देने तथा दस्तावेज़ या वस्तुएँ प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और निरीक्षण की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रतियां मंगवाना;
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए समन जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(4) संसद या राज्य विधानमंडल के किसी अन्य अधिनियम में निहित किसी असंगत बात के बावजूद, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के अंतर्गत किसी शिकायत की जांच के दौरान, इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले किसी भी अभिलेख की जांच कर सकता है जो सार्वजनिक प्राधिकरण के नियंत्रण में है, और ऐसे किसी अभिलेख को किसी भी आधार पर उससे रोका नहीं जा सकता है।
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