RTI Act 25अध्याय VI · Miscellaneous
धारा 25 · निगरानी और रिपोर्टिंग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र उस वर्ष के दौरान इस अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति उपयुक्त सरकार को भेजेगा।
(2) प्रत्येक मंत्रालय या विभाग अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत सार्वजनिक प्राधिकरणों के संबंध में, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को, जैसा भी मामला हो, ऐसी सूचना एकत्र करेगा और प्रदान करेगा, जो इस धारा के अंतर्गत रिपोर्ट तैयार करने के लिए आवश्यक हो, और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस सूचना को प्रस्तुत करने और अभिलेख रखने संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन करेगा।
(3) प्रत्येक रिपोर्ट में उस वर्ष के संबंध में, जिससे रिपोर्ट संबंधित है, यह उल्लेख किया जाएगा,--
(क) प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण को किए गए अनुरोधों की संख्या;
(ख) उन निर्णयों की संख्या जिनमें आवेदकों को अनुरोधों के अनुसार दस्तावेजों तक पहुंच का अधिकार नहीं था, इस अधिनियम के वे प्रावधान जिनके तहत ये निर्णय लिए गए थे और ऐसे प्रावधानों को कितनी बार लागू किया गया था;
(ग) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को समीक्षा के लिए भेजे गए अपीलों की संख्या, अपीलों की प्रकृति और अपीलों का परिणाम;
(घ) इस अधिनियम के प्रशासन के संबंध में किसी अधिकारी के विरुद्ध की गई किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण;
(ई) इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा वसूल की गई प्रभारों की राशि;
(f) कोई भी तथ्य जो सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा इस अधिनियम की भावना और इरादे को प्रशासित और कार्यान्वित करने के प्रयास को इंगित करता हो;
(जी) सुधार के लिए सिफारिशें, जिनमें विशेष सार्वजनिक प्राधिकरणों के संबंध में इस अधिनियम या अन्य विधान या सामान्य कानून या सूचना तक पहुंच के अधिकार को लागू करने के लिए प्रासंगिक किसी अन्य मामले के विकास, सुधार, आधुनिकीकरण, सुधार या संशोधन के लिए सिफारिशें शामिल हैं।
(4) केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र, उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष या, जैसा भी मामला हो, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जहाँ दो सदन हों, और जहाँ राज्य विधानमंडल का एक सदन हो, उस सदन के समक्ष रखवा सकती है।
(5) यदि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत अपने कार्यों के निष्पादन के संबंध में किसी सार्वजनिक प्राधिकरण का अभ्यास इस अधिनियम के प्रावधानों या भावना के अनुरूप नहीं है, तो वह प्राधिकरण को एक सिफारिश दे सकता है जिसमें उन कदमों को निर्दिष्ट किया गया हो जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने चाहिए।
(2) प्रत्येक मंत्रालय या विभाग अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत सार्वजनिक प्राधिकरणों के संबंध में, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को, जैसा भी मामला हो, ऐसी सूचना एकत्र करेगा और प्रदान करेगा, जो इस धारा के अंतर्गत रिपोर्ट तैयार करने के लिए आवश्यक हो, और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस सूचना को प्रस्तुत करने और अभिलेख रखने संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन करेगा।
(3) प्रत्येक रिपोर्ट में उस वर्ष के संबंध में, जिससे रिपोर्ट संबंधित है, यह उल्लेख किया जाएगा,--
(क) प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण को किए गए अनुरोधों की संख्या;
(ख) उन निर्णयों की संख्या जिनमें आवेदकों को अनुरोधों के अनुसार दस्तावेजों तक पहुंच का अधिकार नहीं था, इस अधिनियम के वे प्रावधान जिनके तहत ये निर्णय लिए गए थे और ऐसे प्रावधानों को कितनी बार लागू किया गया था;
(ग) केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को समीक्षा के लिए भेजे गए अपीलों की संख्या, अपीलों की प्रकृति और अपीलों का परिणाम;
(घ) इस अधिनियम के प्रशासन के संबंध में किसी अधिकारी के विरुद्ध की गई किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण;
(ई) इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा वसूल की गई प्रभारों की राशि;
(f) कोई भी तथ्य जो सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा इस अधिनियम की भावना और इरादे को प्रशासित और कार्यान्वित करने के प्रयास को इंगित करता हो;
(जी) सुधार के लिए सिफारिशें, जिनमें विशेष सार्वजनिक प्राधिकरणों के संबंध में इस अधिनियम या अन्य विधान या सामान्य कानून या सूचना तक पहुंच के अधिकार को लागू करने के लिए प्रासंगिक किसी अन्य मामले के विकास, सुधार, आधुनिकीकरण, सुधार या संशोधन के लिए सिफारिशें शामिल हैं।
(4) केंद्र सरकार या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के बाद यथाशीघ्र, उपधारा (1) में निर्दिष्ट केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष या, जैसा भी मामला हो, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जहाँ दो सदन हों, और जहाँ राज्य विधानमंडल का एक सदन हो, उस सदन के समक्ष रखवा सकती है।
(5) यदि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, को यह प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत अपने कार्यों के निष्पादन के संबंध में किसी सार्वजनिक प्राधिकरण का अभ्यास इस अधिनियम के प्रावधानों या भावना के अनुरूप नहीं है, तो वह प्राधिकरण को एक सिफारिश दे सकता है जिसमें उन कदमों को निर्दिष्ट किया गया हो जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने चाहिए।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
