PGST Act 66अध्याय XIII · Audit
धारा 66 · विशेष लेखापरीक्षा
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(1)
यदि जांच, पूछताछ, छानबीन या उसके समक्ष किसी अन्य कार्यवाही के किसी भी चरण में, सहायक आयुक्त से कम रैंक का कोई अधिकारी, मामले की प्रकृति और जटिलता तथा राजस्व के हित को ध्यान में रखते हुए, इस राय का हो कि मूल्य सही ढंग से घोषित नहीं किया गया है या लिया गया ऋण सामान्य सीमा के भीतर नहीं है, तो वह आयुक्त की पूर्व स्वीकृति से, ऐसे पंजीकृत व्यक्ति को लिखित रूप में एक पत्र द्वारा निर्देश दे सकता है कि वह अपने अभिलेखों, जिनमें लेखा-पुस्तकें भी शामिल हैं, की जांच और लेखापरीक्षा आयुक्त द्वारा नामित चार्टर्ड लेखाकार या लागत लेखाकार से करवाए।(2)
इस प्रकार नामित चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट, नब्बे दिनों की अवधि के भीतर, उक्त सहायक आयुक्त को अपने द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित और प्रमाणित ऐसी लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें अन्य निर्दिष्ट विवरणों का उल्लेख होगा: बशर्ते कि सहायक आयुक्त, पंजीकृत व्यक्ति या चार्टर्ड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट द्वारा इस संबंध में किए गए आवेदन पर या किसी ठोस और पर्याप्त कारण से, उक्त अवधि को नब्बे दिनों की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकता है।(3)
उपधारा (1) के प्रावधान प्रभावी होंगे, भले ही पंजीकृत व्यक्ति के खातों का लेखापरीक्षण इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत किया गया हो।(4)
उपधारा (1) के तहत विशेष लेखापरीक्षा के आधार पर एकत्रित किसी भी सामग्री के संबंध में पंजीकृत व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा, जिसका उपयोग इस अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों के तहत उसके विरुद्ध किसी कार्यवाही में किया जाना प्रस्तावित है।(5)
उपधारा (1) के अधीन अभिलेखों की जांच और लेखापरीक्षा के व्यय, जिसमें ऐसे चार्टर्ड लेखाकार या लागत लेखाकार का पारिश्रमिक शामिल है, आयुक्त द्वारा निर्धारित और भुगतान किया जाएगा और ऐसा निर्धारण अंतिम होगा।(6)
जहां उपधारा (1) के तहत किए गए विशेष लेखापरीक्षा में कर का भुगतान न होने, कम भुगतान होने, गलत तरीके से वापस किए जाने, या इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत तरीके से लाभ उठाने या उपयोग करने का पता चलता है, तो उचित अधिकारी धारा 73 या धारा 74 के तहत कार्रवाई शुरू कर सकता है।इस धारा पर आपका निजी नोट
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