JJ Act 75अध्याय IX · Other Offences Against Children
धारा 75 · बच्चे के प्रति क्रूरता का दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जो कोई भी किसी बच्चे की वास्तविक देखरेख या नियंत्रण में रहते हुए उस बच्चे पर हमला करता है, उसे त्याग देता है, उसके साथ दुर्व्यवहार करता है, उसे असुरक्षित छोड़ देता है या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करता है, या बच्चे पर हमला, त्याग, दुर्व्यवहार, असुरक्षित छोड़ने या उपेक्षा करवाने का कारण बनता है या ऐसा करवाता है जिससे उस बच्चे को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक पीड़ा होने की संभावना हो, उसे तीन वर्ष तक के कारावास या एक लाख रुपये के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि यह पाया जाता है कि जैविक माता-पिता द्वारा बच्चे का परित्याग उनके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण हुआ है, तो यह माना जाएगा कि ऐसा परित्याग जानबूझकर नहीं किया गया है और ऐसे मामलों में इस धारा के दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होंगे:
इसके अलावा, यदि ऐसा अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो किसी ऐसे संगठन में कार्यरत है या उसका प्रबंधन करता है जिसे बच्चे की देखभाल और संरक्षण का दायित्व सौंपा गया है, तो उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जो पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना जो पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
इसके अलावा, उपर्युक्त क्रूरता के कारण यदि बच्चा शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है या मानसिक रूप से बीमार हो जाता है या नियमित कार्य करने के लिए मानसिक रूप से अयोग्य हो जाता है या उसके जीवन या शरीर को खतरा होता है, तो ऐसे व्यक्ति को कम से कम तीन वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
बशर्ते कि यदि यह पाया जाता है कि जैविक माता-पिता द्वारा बच्चे का परित्याग उनके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण हुआ है, तो यह माना जाएगा कि ऐसा परित्याग जानबूझकर नहीं किया गया है और ऐसे मामलों में इस धारा के दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होंगे:
इसके अलावा, यदि ऐसा अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो किसी ऐसे संगठन में कार्यरत है या उसका प्रबंधन करता है जिसे बच्चे की देखभाल और संरक्षण का दायित्व सौंपा गया है, तो उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जो पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना जो पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
इसके अलावा, उपर्युक्त क्रूरता के कारण यदि बच्चा शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है या मानसिक रूप से बीमार हो जाता है या नियमित कार्य करने के लिए मानसिक रूप से अयोग्य हो जाता है या उसके जीवन या शरीर को खतरा होता है, तो ऐसे व्यक्ति को कम से कम तीन वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 10 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- ₹5,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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