JJ Act 44अध्याय VII · Rehabilitation and Social Re-integration
धारा 44 · पालन पोषण संबंधी देखभाल।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को समिति के आदेशों के माध्यम से, इस संबंध में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद, उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए सामूहिक देखभाल सहित पालक देखभाल में रखा जा सकता है, ऐसे परिवार में जिसमें बच्चे के जैविक या दत्तक माता-पिता शामिल न हों या राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त माने जाने वाले किसी असंबंधित परिवार में, अल्प या विस्तारित अवधि के लिए।
(2) पालक परिवार का चयन परिवार की क्षमता, इरादे, योग्यता और बच्चों की देखभाल करने के पूर्व अनुभव के आधार पर किया जाएगा।
(3) भाई-बहनों को पालक परिवारों में एक साथ रखने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे, जब तक कि उन्हें एक साथ न रखना उनके सर्वोत्तम हित में न हो।
(4) राज्य सरकार, बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, बच्चों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए, जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से ऐसे पालक देखभाल के लिए मासिक निधि प्रदान करेगी।
(5) ऐसे मामलों में जहां बच्चों को इस कारण से पालक परिवार में रखा गया है कि समिति द्वारा उनके माता-पिता को अयोग्य या अक्षम पाया गया है, बच्चे के माता-पिता नियमित अंतराल पर पालक परिवार में बच्चे से मिल सकते हैं, जब तक कि समिति को यह न लगे कि ऐसे दौरे बच्चे के सर्वोत्तम हित में नहीं हैं, जिसके लिए कारण दर्ज किए जाएंगे; और अंततः, बच्चा माता-पिता के घर लौट सकता है जब समिति द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि समिति बच्चे की देखभाल करने के लिए योग्य है।
(6) पालक परिवार बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होगा और बच्चे की समग्र भलाई को इस प्रकार सुनिश्चित करेगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(7) राज्य सरकार बच्चों के लिए पालक देखभाल सेवाएं प्रदान करने की प्रक्रिया, मानदंड और तरीके को परिभाषित करने के उद्देश्य से नियम बना सकती है।
(8) समिति द्वारा निर्धारित प्रारूप में बच्चे की भलाई की जाँच के लिए हर महीने पालक परिवारों का निरीक्षण किया जाएगा और जब भी कोई पालक परिवार बच्चे की देखभाल में कमी करता पाया जाएगा, तो बच्चे को उस पालक परिवार से हटाकर समिति द्वारा उचित समझे जाने वाले किसी अन्य पालक परिवार में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
(9) समिति द्वारा गोद लेने योग्य समझे जाने वाले किसी भी बच्चे को दीर्घकालिक पालक देखभाल के लिए नहीं दिया जाएगा।
(2) पालक परिवार का चयन परिवार की क्षमता, इरादे, योग्यता और बच्चों की देखभाल करने के पूर्व अनुभव के आधार पर किया जाएगा।
(3) भाई-बहनों को पालक परिवारों में एक साथ रखने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे, जब तक कि उन्हें एक साथ न रखना उनके सर्वोत्तम हित में न हो।
(4) राज्य सरकार, बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, बच्चों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए, जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से ऐसे पालक देखभाल के लिए मासिक निधि प्रदान करेगी।
(5) ऐसे मामलों में जहां बच्चों को इस कारण से पालक परिवार में रखा गया है कि समिति द्वारा उनके माता-पिता को अयोग्य या अक्षम पाया गया है, बच्चे के माता-पिता नियमित अंतराल पर पालक परिवार में बच्चे से मिल सकते हैं, जब तक कि समिति को यह न लगे कि ऐसे दौरे बच्चे के सर्वोत्तम हित में नहीं हैं, जिसके लिए कारण दर्ज किए जाएंगे; और अंततः, बच्चा माता-पिता के घर लौट सकता है जब समिति द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि समिति बच्चे की देखभाल करने के लिए योग्य है।
(6) पालक परिवार बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होगा और बच्चे की समग्र भलाई को इस प्रकार सुनिश्चित करेगा, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(7) राज्य सरकार बच्चों के लिए पालक देखभाल सेवाएं प्रदान करने की प्रक्रिया, मानदंड और तरीके को परिभाषित करने के उद्देश्य से नियम बना सकती है।
(8) समिति द्वारा निर्धारित प्रारूप में बच्चे की भलाई की जाँच के लिए हर महीने पालक परिवारों का निरीक्षण किया जाएगा और जब भी कोई पालक परिवार बच्चे की देखभाल में कमी करता पाया जाएगा, तो बच्चे को उस पालक परिवार से हटाकर समिति द्वारा उचित समझे जाने वाले किसी अन्य पालक परिवार में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
(9) समिति द्वारा गोद लेने योग्य समझे जाने वाले किसी भी बच्चे को दीर्घकालिक पालक देखभाल के लिए नहीं दिया जाएगा।
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