JJ Act 101अध्याय X · Miscellaneous
धारा 101 · अपीलें।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अंतर्गत समिति या बोर्ड द्वारा दिए गए किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश की तिथि से तीस दिनों के भीतर बाल न्यायालय में अपील कर सकता है, सिवाय समिति द्वारा पालक देखभाल और प्रायोजन पश्चात देखभाल से संबंधित निर्णयों के लिए, जिनके लिए अपील जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष की जाएगी:
बशर्ते कि सत्र न्यायालय या जिला मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, उक्त तीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था, और ऐसी अपील का निर्णय तीस दिनों की अवधि के भीतर किया जाएगा।
(2) अधिनियम की धारा 15 के तहत किसी जघन्य अपराध में प्रारंभिक आकलन करने के बाद बोर्ड द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील की जा सकती है और न्यायालय अपील का निर्णय करते समय उन अनुभवी मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सहायता ले सकता है जिनकी सहायता बोर्ड ने उक्त धारा के तहत आदेश पारित करने में प्राप्त की है।
1 [(3) बोर्ड द्वारा किसी ऐसे बच्चे के संबंध में दिए गए बरी करने के आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी, जिस पर सोलह वर्ष की आयु पूरी कर चुके या उससे अधिक आयु के बच्चे द्वारा जघन्य अपराध के अलावा कोई अन्य अपराध करने का आरोप हो।]
(4) इस धारा के अंतर्गत अपील में सत्र न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश से दूसरी अपील नहीं होगी।
(5) बाल न्यायालय के किसी आदेश से पीड़ित कोई भी व्यक्ति दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में निर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है।
2 [(6) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दत्तक ग्रहण आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित ऐसे आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर, संभागीय आयुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
(7) उपधारा (6) के अंतर्गत दायर की गई प्रत्येक अपील का निर्णय यथाशीघ्र किया जाएगा तथा अपील दायर करने की तिथि से चार सप्ताह की अवधि के भीतर उसका निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
बशर्ते कि जहां कोई संभागीय आयुक्त न हो, वहां राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना द्वारा संभागीय आयुक्त के समकक्ष रैंक के किसी अधिकारी को अपील का निर्णय करने के लिए सशक्त कर सकता है।]
बशर्ते कि सत्र न्यायालय या जिला मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, उक्त तीस दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, यदि वह संतुष्ट हो कि अपीलकर्ता पर्याप्त कारण से समय पर अपील दाखिल करने में असमर्थ था, और ऐसी अपील का निर्णय तीस दिनों की अवधि के भीतर किया जाएगा।
(2) अधिनियम की धारा 15 के तहत किसी जघन्य अपराध में प्रारंभिक आकलन करने के बाद बोर्ड द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील की जा सकती है और न्यायालय अपील का निर्णय करते समय उन अनुभवी मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सहायता ले सकता है जिनकी सहायता बोर्ड ने उक्त धारा के तहत आदेश पारित करने में प्राप्त की है।
1 [(3) बोर्ड द्वारा किसी ऐसे बच्चे के संबंध में दिए गए बरी करने के आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी, जिस पर सोलह वर्ष की आयु पूरी कर चुके या उससे अधिक आयु के बच्चे द्वारा जघन्य अपराध के अलावा कोई अन्य अपराध करने का आरोप हो।]
(4) इस धारा के अंतर्गत अपील में सत्र न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश से दूसरी अपील नहीं होगी।
(5) बाल न्यायालय के किसी आदेश से पीड़ित कोई भी व्यक्ति दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में निर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है।
2 [(6) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दत्तक ग्रहण आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित ऐसे आदेश की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर, संभागीय आयुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
(7) उपधारा (6) के अंतर्गत दायर की गई प्रत्येक अपील का निर्णय यथाशीघ्र किया जाएगा तथा अपील दायर करने की तिथि से चार सप्ताह की अवधि के भीतर उसका निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
बशर्ते कि जहां कोई संभागीय आयुक्त न हो, वहां राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना द्वारा संभागीय आयुक्त के समकक्ष रैंक के किसी अधिकारी को अपील का निर्णय करने के लिए सशक्त कर सकता है।]
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
