OSH Code 95अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 95 · मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता आदि के कार्य में बाधा उत्पन्न करने पर दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई जानबूझकर---
(i) मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या उपयुक्त सरकार के किसी अधिकारी या इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों या उपनियमों के अधीन किसी कर्तव्य का निर्वहन करने या किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए अधिकृत व्यक्ति को ऐसे कर्तव्य का निर्वहन करने या ऐसी शक्ति का प्रयोग करने से रोकता है या बाधा उत्पन्न करता है; या
(ii) मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या धारा 35 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( i ) में निर्दिष्ट व्यक्ति या सार्वजनिक प्राधिकरण या धारा 37 में निर्दिष्ट विशेषज्ञ को किसी ऐसे स्थान पर प्रवेश करने से मना करता है जहाँ ऐसे मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या ऐसे व्यक्ति या प्राधिकरण या विशेषज्ञ को प्रवेश करने का अधिकार है; या
(iii) वह कोई ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है या इनकार करता है जिसे प्रस्तुत करना उसके लिए आवश्यक है; या
(iv) यदि वह इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या उपनियमों के तहत उसे जारी किए गए किसी भी आदेश या निर्देश का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे तीन महीने तक के कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) यदि उपधारा ( 1 ) के अधीन दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया कोई व्यक्ति उसी प्रावधान के अधीन किसी अपराध के लिए फिर से दोषी ठहराया जाता है, तो उसे छह महीने तक के कारावास या एक लाख रुपये से कम नहीं, बल्कि दो लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(i) मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या उपयुक्त सरकार के किसी अधिकारी या इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों या उपनियमों के अधीन किसी कर्तव्य का निर्वहन करने या किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए अधिकृत व्यक्ति को ऐसे कर्तव्य का निर्वहन करने या ऐसी शक्ति का प्रयोग करने से रोकता है या बाधा उत्पन्न करता है; या
(ii) मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या धारा 35 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( i ) में निर्दिष्ट व्यक्ति या सार्वजनिक प्राधिकरण या धारा 37 में निर्दिष्ट विशेषज्ञ को किसी ऐसे स्थान पर प्रवेश करने से मना करता है जहाँ ऐसे मुख्य निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता या ऐसे व्यक्ति या प्राधिकरण या विशेषज्ञ को प्रवेश करने का अधिकार है; या
(iii) वह कोई ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहता है या इनकार करता है जिसे प्रस्तुत करना उसके लिए आवश्यक है; या
(iv) यदि वह इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों, विनियमों या उपनियमों के तहत उसे जारी किए गए किसी भी आदेश या निर्देश का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे तीन महीने तक के कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
(2) यदि उपधारा ( 1 ) के अधीन दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया कोई व्यक्ति उसी प्रावधान के अधीन किसी अपराध के लिए फिर से दोषी ठहराया जाता है, तो उसे छह महीने तक के कारावास या एक लाख रुपये से कम नहीं, बल्कि दो लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- जुर्माना
- ₹2,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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