OSH Code 103अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 103 · सुरक्षा संबंधी कर्तव्यों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप दुर्घटना होने पर दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि कोई व्यक्ति इस संहिता या इसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों, नियमों, उपनियमों या आदेशों के अधीन किसी कर्तव्य का पालन करने में विफल रहता है या उसका उल्लंघन करता है और ऐसे गैर-अनुपालन या उल्लंघन के परिणामस्वरूप कोई दुर्घटना या खतरनाक घटना घटित होती है जिससे---
(क) मृत्युदंड प्राप्त होने पर, उसे दो वर्ष तक के कारावास या पाँच लाख रुपये से कम न होने वाले जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा; या
(ख) प्रतिष्ठान के भीतर किसी व्यक्ति को गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाने पर, उसे एक वर्ष तक के कारावास या दो लाख रुपये से कम नहीं बल्कि चार लाख रुपये से अधिक नहीं के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
इस धारा के तहत जुर्माना लगाते समय न्यायालय यह निर्देश दे सकता है कि जुर्माने का एक हिस्सा, जो उसके पचास प्रतिशत से कम नहीं होगा, पीड़ित को या उसकी मृत्यु की स्थिति में पीड़ित के कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के अधीन दोषी ठहराया गया हो और फिर उसी उपधारा के अधीन दोषी ठहराया जाए, तो उसे प्रथम दोषसिद्धि के लिए उस उपधारा के अधीन निर्धारित दंड से दुगुना दंड दिया जाएगा।
(क) मृत्युदंड प्राप्त होने पर, उसे दो वर्ष तक के कारावास या पाँच लाख रुपये से कम न होने वाले जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा; या
(ख) प्रतिष्ठान के भीतर किसी व्यक्ति को गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाने पर, उसे एक वर्ष तक के कारावास या दो लाख रुपये से कम नहीं बल्कि चार लाख रुपये से अधिक नहीं के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
इस धारा के तहत जुर्माना लगाते समय न्यायालय यह निर्देश दे सकता है कि जुर्माने का एक हिस्सा, जो उसके पचास प्रतिशत से कम नहीं होगा, पीड़ित को या उसकी मृत्यु की स्थिति में पीड़ित के कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के अधीन दोषी ठहराया गया हो और फिर उसी उपधारा के अधीन दोषी ठहराया जाए, तो उसे प्रथम दोषसिद्धि के लिए उस उपधारा के अधीन निर्धारित दंड से दुगुना दंड दिया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 6 माह
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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