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22 प्रविष्टियाँ
धारा 42. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी
42. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी (1) जब कोई ऐसा व्यक्ति, जिसने किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में कोई असंज्ञेय अपराध किया है या उसे करने का अभियोग उस पर लगाया गया है, ऐसे अधिकारी की मांग पर अपना नाम और निवास बताने से इंकार करता है, या ऐसा नाम या निवास बताता है, जिसके बारे में ऐसे अधिकारी को यह विश्वास…
पूरा पढ़ेंनाम और निवास स्थान बताने से इनकार करने पर गिरफ्तारी।
(1) जब कोई व्यक्ति, जिसने किसी पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में कोई गैर-संज्ञेय अपराध किया हो या उस पर ऐसे अपराध का आरोप लगाया गया हो, ऐसे अधिकारी की मांग पर अपना नाम और पता बताने से इनकार करता है या ऐसा नाम या पता बताता है जिसके बारे में ऐसे अधिकारी को यह मानने का कारण हो कि वह झूठा है, तो ऐसे अधिकारी द्वारा उसे…
पूरा पढ़ेंधारा 45. सशस्त्र बलों के सदस्यों का गिरफ्तारी से संरक्षण
45. सशस्त्र बलों के सदस्यों का गिरफ्तारी से संरक्षण (1) धारा 41 से धारा 44 तक (दोनों सहित) में किसी बात के होते हुए भी, संघ के सशस्त्र बलों का कोई सदस्य अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में उसके द्वारा की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित किसी बात के लिए, केंद्रीय सरकार की सहमति अभिप्राप्त किए बिना, गिरफ्तार नहीं किया…
पूरा पढ़ेंसशस्त्र बलों के सदस्यों को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करना।
(1) धारा 35 और धारा 39 से 41 (दोनों सहित) में किसी बात के होते हुए भी, संघ के सशस्त्र बलों के किसी भी सदस्य को उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए या किए जाने वाले किसी कार्य के लिए केंद्र सरकार की सहमति प्राप्त किए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। (2) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकती है कि…
पूरा पढ़ेंधारा 379. कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील
379. कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील जहां उच्च न्यायालय ने अपील पर किसी अभियुक्त व्यक्ति की दोषमुक्ति के आदेश को उलट दिया है और उसे दोषसिद्ध करके उसे मृत्यु या आजीवन कारावास या दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास का दंडादेश दिया है, वहां वह उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकेगा।
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दी गई सजा के विरुद्ध अपील।
जहां उच्च न्यायालय ने अपील पर किसी आरोपी व्यक्ति के बरी होने के आदेश को पलट दिया है और उसे दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड या आजीवन कारावास या दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास की सजा सुनाई है, तो वह सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
पूरा पढ़ेंधारा 380. कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार
380. कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, जब एक ही विचारण में एक से अधिक व्यक्ति दोषसिद्ध किए जाते हैं और ऐसे व्यक्तियों में से किसी के बारे में ऐसा निर्णय या आदेश दिया गया है जिसकी अपील हो सकती है, तब ऐसे विचारण में दोषसिद्ध किए गए सब या किन्हीं व्यक्तियों को अपील का अधिकार होगा।
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार।
इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, जब एक ही मुकदमे में एक से अधिक व्यक्तियों को दोषी ठहराया जाता है, और ऐसे किसी व्यक्ति के संबंध में अपील योग्य निर्णय या आदेश पारित किया गया हो, तो ऐसे मुकदमे में दोषी ठहराए गए सभी या किसी भी व्यक्ति को अपील करने का अधिकार होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 381. सेशन न्यायालय में अपील किस प्रकार सुनी जाए
381. सेशन न्यायालय में अपील किस प्रकार सुनी जाए (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सेशन न्यायालय या सेशन न्यायाधीश के समक्ष अपील सेशन न्यायाधीश द्वारा या अपर सेशन न्यायाधीश द्वारा सुनी जाएगी: परन्तु द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में हुई दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील सहायक सेशन न्यायाधीश या मुख्य…
पूरा पढ़ेंसत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई कैसे होती है?
(1) उपधारा (2) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, सत्र न्यायालय या सत्र न्यायाधीश के समक्ष अपील की सुनवाई सत्र न्यायाधीश या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा की जाएगी: बशर्ते कि द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा आयोजित मुकदमे में दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील की सुनवाई और निपटारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया जा सकता…
पूरा पढ़ेंधारा 382. अपील की अर्जी
382. अपील की अर्जी हर अपील अपीलार्थी या उसके प्लीडर द्वारा उपस्थित की गई लिखित अर्जी के रूप में की जाएगी, और हर ऐसी अर्जी के साथ (जब तक कि वह न्यायालय, जिसमें वह उपस्थित की जाती है, अन्यथा निदेश न दे) उस निर्णय या आदेश की एक प्रति होगी जिसके विरुद्ध अपील की गई है। राज्य संशोधन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा…
पूरा पढ़ेंअपील याचिका।
प्रत्येक अपील अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत लिखित याचिका के रूप में की जाएगी, और ऐसी प्रत्येक याचिका (जब तक कि जिस न्यायालय में इसे प्रस्तुत किया जाता है वह अन्यथा निर्देश न दे) के साथ अपील किए गए निर्णय या आदेश की एक प्रति संलग्न होनी चाहिए।
पूरा पढ़ेंधारा 383. जब अपीलार्थी कारागार में हो तब प्रक्रिया
383. जब अपीलार्थी कारागार में हो तब प्रक्रिया यदि अपीलार्थी कारागार में है, तो वह अपनी अपील की अर्जी और उसके साथ की प्रतियां कारागार के भारसाधक अधिकारी को उपस्थित कर सकेगा, जो तब ऐसी अर्जी और प्रतियां उचित अपील न्यायालय को भेजेगा। राज्य संशोधन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह तथा लक्षद्वीप: धारा 383 में, अंत में निम्नलिखित…
पूरा पढ़ेंजब अपीलकर्ता जेल में हो तो प्रक्रिया।
यदि अपीलकर्ता जेल में है, तो वह अपनी अपील याचिका और उसकी प्रतियां जेल के प्रभारी अधिकारी को प्रस्तुत कर सकता है, जो इसके बाद ऐसी याचिका और प्रतियां उचित अपीलीय न्यायालय को अग्रेषित करेगा।
पूरा पढ़ेंधारा 384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना (1) यदि अपील की अर्जी और धारा 382 या धारा 383 के अधीन प्राप्त निर्णय की प्रति की परीक्षा करने पर अपील न्यायालय यह समझता है कि हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह अपील को संक्षेपतः खारिज कर सकेगा: परन्तु— (क) धारा 382 के अधीन प्रस्तुत कोई अपील तब तक खारिज न की जाएगी…
पूरा पढ़ेंअपील को संक्षिप्त रूप से खारिज कर दिया गया।
(1) यदि अपील याचिका और धारा 423 या धारा 424 के तहत प्राप्त निर्णय की प्रति की जांच करने पर अपीलीय न्यायालय को हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार न मिले, तो वह अपील को संक्षेप में खारिज कर सकता है: उसे उपलब्ध कराया--- (क) धारा 423 के तहत प्रस्तुत कोई भी अपील तब तक खारिज नहीं की जाएगी जब तक कि अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता को…
पूरा पढ़ेंधारा 385. उन अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया जो संक्षेपतः खारिज नहीं की जातीं
385. उन अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया जो संक्षेपतः खारिज नहीं की जातीं (1) यदि अपील न्यायालय अपील को संक्षेपतः खारिज नहीं करता है, तो वह उस समय और स्थान की, जिस पर ऐसी अपील सुनी जाएगी, सूचना— (i) अपीलार्थी या उसके प्लीडर को; (ii) ऐसे अधिकारी को, जिसे राज्य सरकार इस निमित्त नियुक्त करे; (iii) यदि अपील परिवाद पर…
पूरा पढ़ेंउन अपीलों की सुनवाई की प्रक्रिया जिन्हें संक्षेप में खारिज नहीं किया गया है।
(1) यदि अपीलीय न्यायालय अपील को संक्षेप में खारिज नहीं करता है, तो वह उस समय और स्थान की सूचना देगा जहाँ ऐसी अपील की सुनवाई होगी--- (i) अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता को; (ii) ऐसे अधिकारी को जिसे राज्य सरकार इस संबंध में नियुक्त करे; (iii) यदि अपील किसी शिकायत पर दायर मामले में दोषसिद्धि के निर्णय से है, तो शिकायतकर्ता…
पूरा पढ़ेंधारा 386. अपील न्यायालय की शक्तियां
386. अपील न्यायालय की शक्तियां ऐसे अभिलेख के परिशीलन के पश्चात् और अपीलार्थी या उसके प्लीडर को, यदि वह हाजिर हो, तथा लोक अभियोजक को, यदि वह हाजिर हो, तथा धारा 377 या धारा 378 के अधीन अपील की दशा में अभियुक्त को, यदि वह हाजिर हो, सुनने के पश्चात्, अपील न्यायालय, यदि वह यह समझता है कि हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त आधार नहीं…
पूरा पढ़ेंअपीलीय न्यायालय की शक्तियाँ।
ऐसे अभिलेखों का अवलोकन करने और अपीलकर्ता या उसके अधिवक्ता (यदि वह उपस्थित हो) तथा लोक अभियोजक (यदि वह उपस्थित हो) तथा धारा 418 या धारा 419 के अंतर्गत अपील के मामले में अभियुक्त (यदि वह उपस्थित हो) की सुनवाई करने के बाद, अपीलीय न्यायालय, यदि वह हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त आधार न समझे, तो अपील को खारिज कर सकता है,…
पूरा पढ़ेंधारा 387. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय
387. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय आरंभिक अधिकारिता वाले दंड न्यायालय के निर्णय के बारे में अध्याय 27 में अंतर्विष्ट नियम, जहां तक साध्य हो, सत्र न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अपील में दिए गए निर्णय को लागू होंगे: परन्तु जब तक अपील न्यायालय अन्यथा निदेश न दे, अभियुक्त निर्णय सुनाए जाने को सुनने के लिए न तो…
पूरा पढ़ेंअधीनस्थ अपीलीय न्यायालयों के निर्णय।
अध्याय XXIX में मूल अधिकार क्षेत्र वाले आपराधिक न्यायालय के निर्णय के संबंध में दिए गए नियम, जहां तक संभव हो, सत्र न्यायालय या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अपीलीय निर्णय पर भी लागू होंगे। बशर्ते कि जब तक अपीलीय न्यायालय अन्यथा निर्देश न दे, अभियुक्त को निर्णय सुनाए जाने के समय उपस्थित होने के लिए न तो लाया जाएगा और न…
पूरा पढ़ेंधारा 388. अपील पर उच्च न्यायालय के आदेश का अवर न्यायालय को प्रमाणित किया जाना
388. अपील पर उच्च न्यायालय के आदेश का अवर न्यायालय को प्रमाणित किया जाना (1) जब कभी इस अध्याय के अधीन उच्च न्यायालय द्वारा अपील पर किसी मामले का विनिश्चय किया जाता है, तब वह अपने निर्णय या आदेश को उस न्यायालय को प्रमाणित करेगा जिसके द्वारा वह निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश, जिसकी अपील की गई थी, अभिलिखित या पारित किया गया…
पूरा पढ़ेंउच्च न्यायालय के अपील संबंधी आदेश को निचली अदालत को प्रमाणित किया जाना चाहिए।
(1) जब भी इस अध्याय के अंतर्गत उच्च न्यायालय द्वारा अपील पर किसी मामले का निर्णय किया जाता है, तो वह अपने निर्णय या आदेश को उस न्यायालय को प्रमाणित करेगा जिसके द्वारा अपील के विरुद्ध निर्णय, सजा या आदेश दर्ज या पारित किया गया था, और यदि ऐसा न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अलावा किसी अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का है,…
पूरा पढ़ेंधारा 420. वारंट किसके पास परिबद्ध किया जाएगा
420. वारंट किसके पास परिबद्ध किया जाएगा जब बंदी को जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तब वारंट जेलर के पास परिबद्ध किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंवारंट किसके पास जमा किया जाना है।
जब किसी कैदी को जेल में बंद किया जाना हो, तो वारंट जेलर के पास जमा कराया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 421. जुर्माना उद्गृहीत करने के लिए वारंट
421. जुर्माना उद्गृहीत करने के लिए वारंट (1) जब किसी अपराधी को जुर्माना देने का दंडादेश दिया गया है, तब दंडादेश देने वाला न्यायालय जुर्माने की वसूली के लिए निम्नलिखित रीतियों में से किसी एक से या दोनों से कार्रवाई कर सकेगा, अर्थात् वह— (क) अपराधी की किसी जंगम संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा उस रकम को उद्गृहीत करने…
पूरा पढ़ेंजुर्माना वसूलने का वारंट।
(1) जब किसी अपराधी को जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई हो, लेकिन ऐसा कोई भुगतान न किया गया हो, तो सजा सुनाने वाला न्यायालय निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों तरीकों से जुर्माने की वसूली के लिए कार्रवाई कर सकता है, अर्थात् वह--- (क) अपराधी की किसी चल संपत्ति की कुर्की और बिक्री द्वारा राशि की वसूली के लिए वारंट जारी…
पूरा पढ़ेंधारा 422. ऐसे वारंट का प्रभाव
422. ऐसे वारंट का प्रभाव धारा 421 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन किसी न्यायालय द्वारा जारी किया गया वारंट ऐसे न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के भीतर निष्पादित किया जा सकेगा, और वह ऐसी अधिकारिता के बाहर की किसी ऐसी संपत्ति की कुर्की और विक्रय को तब प्राधिकृत करेगा, जब उसका पृष्ठांकन उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा कर दिया…
पूरा पढ़ेंइस प्रकार के वारंट का प्रभाव।
धारा 461 की उपधारा (1) के खंड (क) के तहत किसी न्यायालय द्वारा जारी वारंट को ऐसे न्यायालय के स्थानीय क्षेत्राधिकार के भीतर निष्पादित किया जा सकता है, और यह ऐसे क्षेत्राधिकार के बाहर किसी भी ऐसी संपत्ति की कुर्की और बिक्री को अधिकृत करेगा, जब इसे उस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमोदित किया जाता है जिसके स्थानीय…
पूरा पढ़ेंधारा 423. ऐसे राज्यक्षेत्र के न्यायालय द्वारा जारी किया गया जुर्माना उद्गृहीत करने का वारंट जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है
423. ऐसे राज्यक्षेत्र के न्यायालय द्वारा जारी किया गया जुर्माना उद्गृहीत करने का वारंट जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है इस संहिता में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, जब किसी ऐसे राज्यक्षेत्र के, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, किसी दंड न्यायालय द्वारा किसी अपराधी को जुर्माना देने…
पूरा पढ़ेंकिसी ऐसे क्षेत्र में स्थित न्यायालय द्वारा जारी किया गया जुर्माना लगाने का वारंट, जिस पर यह संहिता लागू नहीं होती।
इस संहिता या किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, जब किसी अपराधी को किसी ऐसे क्षेत्र में आपराधिक न्यायालय द्वारा जुर्माना अदा करने का दंड दिया गया हो, जिस पर यह संहिता लागू नहीं होती, और दंड देने वाला न्यायालय उस क्षेत्र में, जिस पर यह संहिता लागू होती है, किसी जिले के कलेक्टर को वारंट जारी करता है, जिसमें उसे…
पूरा पढ़ेंधारा 424. कारावास के दंडादेश के निष्पादन का निलंबन
424. कारावास के दंडादेश के निष्पादन का निलंबन (1) जब किसी अपराधी को केवल जुर्माने का और जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश दिया गया है और जुर्माना तुरंत नहीं दिया जाता है, तब न्यायालय— (क) आदेश दे सकेगा कि जुर्माना या तो आदेश की तारीख से तीस दिन से अनधिक किसी तारीख को या उससे पूर्व पूर्णतः…
पूरा पढ़ेंकारावास की सजा के क्रियान्वयन को स्थगित करना।
(1) जब किसी अपराधी को केवल जुर्माने की सजा सुनाई गई हो और जुर्माना न अदा करने पर कारावास की सजा दी गई हो, और जुर्माना तुरंत अदा न किया गया हो, तो न्यायालय--- (क) यह आदेश दिया जा सकता है कि जुर्माना या तो आदेश की तारीख से तीस दिनों से अधिक की तारीख तक पूरा देय होगा, या दो या तीन किस्तों में देय होगा, जिनमें से पहली…
पूरा पढ़ेंधारा 425. वारंट कौन जारी कर सकेगा
425. वारंट कौन जारी कर सकेगा दंडादेश के निष्पादन के लिए प्रत्येक वारंट या तो उस न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसने दंडादेश दिया था, या उसके पद-उत्तरवर्ती द्वारा जारी किया जा सकेगा।
पूरा पढ़ेंवारंट कौन जारी कर सकता है?
किसी भी सजा के निष्पादन के लिए वारंट या तो उस न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया जा सकता है जिसने सजा सुनाई थी, या उसके उत्तराधिकारी द्वारा।
पूरा पढ़ेंधारा 426. निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति के बारे में दंडादेश कब प्रभावी होगा
426. निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति के बारे में दंडादेश कब प्रभावी होगा (1) जब किसी निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति के बारे में इस संहिता के अधीन मृत्यु, आजीवन कारावास या जुर्माने का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा दंडादेश, इससे पूर्व अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, तुरंत प्रभावी होगा। (2) जब किसी निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंफरार कैदी को दी गई सजा कब से प्रभावी होगी?
(1) जब इस संहिता के अंतर्गत किसी भगोड़े दोषी पर मृत्युदंड, आजीवन कारावास या जुर्माना की सजा सुनाई जाती है, तो ऐसी सजा, इसमें पूर्वोक्त प्रावधानों के अधीन रहते हुए, तुरंत प्रभावी होगी। (2) जब इस संहिता के अंतर्गत किसी भगोड़े अपराधी को एक निश्चित अवधि के लिए कारावास की सजा सुनाई जाती है, --- (क) यदि ऐसा दंड उस दंड से…
पूरा पढ़ेंधारा 427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है
427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है (1) जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहे किसी व्यक्ति को पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तब ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारंभ होगा जिसका दंडादेश उसे पहले दिया गया…
पूरा पढ़ेंकिसी अन्य अपराध के लिए पहले से ही सजा पाए अपराधी को सजा सुनाई गई है।
(1) जब कोई व्यक्ति जो पहले से ही कारावास की सजा काट रहा हो, उसे बाद में किसी अन्य दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है, तो ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की अवधि की समाप्ति पर शुरू होगा जिसकी सजा उसे पहले सुनाई गई थी, जब तक कि न्यायालय यह निर्देश न दे कि बाद की सजा पिछली सजा के साथ-साथ…
पूरा पढ़ेंधारा 428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना जहां किसी अभियुक्त व्यक्ति को दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दिया गया है, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने पर दिया गया कारावास नहीं है, वहां उसके द्वारा उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
जहां किसी आरोपी व्यक्ति को दोषसिद्धि पर कारावास की सजा सुनाई गई है, जो जुर्माने के भुगतान में चूक के कारण कारावास न हो, तो उस मामले की जांच, पूछताछ या मुकदमे के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पहले उसके द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि, यदि कोई हो, को ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर लगाए गए कारावास की अवधि के विरुद्ध समायोजित…
पूरा पढ़ेंधारा 429. व्यावृत्ति
429. व्यावृत्ति (1) धारा 426 या धारा 427 की कोई बात किसी व्यक्ति को उस दंड के किसी भाग से, जिसका वह अपनी पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर भागी है, छूट देने वाली न समझी जाएगी। (2) जब जुर्माना न देने पर कारावास का अधिनिर्णय कारावास के किसी मूल दंडादेश के साथ संलग्न है और दंडादेश भोगने वाले व्यक्ति को उसके…
पूरा पढ़ेंबचत।
(1) धारा 466 या धारा 467 में कोई बात किसी व्यक्ति को उस सजा के किसी भाग से छूट नहीं देगी जिसके लिए वह अपने पूर्व या बाद के दोषसिद्धि पर उत्तरदायी है। (2) जब जुर्माने के भुगतान में चूक के कारण कारावास का कोई पुरस्कार कारावास के मूल दंड से जुड़ा हो और दंड भुगतने वाले व्यक्ति को उसके निष्पादन के बाद कारावास का एक और मूल…
पूरा पढ़ें- CRPC §42BNSS §39
धारा 42. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी
नाम और निवास स्थान बताने से इनकार करने पर गिरफ्तारी।
- CRPC §45BNSS §42
धारा 45. सशस्त्र बलों के सदस्यों का गिरफ्तारी से संरक्षण
सशस्त्र बलों के सदस्यों को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करना।
- CRPC §379BNSS §420
धारा 379. कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील
कुछ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा दी गई सजा के विरुद्ध अपील।
- CRPC §380BNSS §421
धारा 380. कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार
कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार।
- CRPC §381BNSS §422
धारा 381. सेशन न्यायालय में अपील किस प्रकार सुनी जाए
सत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई कैसे होती है?
- CRPC §382BNSS §423
धारा 382. अपील की अर्जी
अपील याचिका।
- CRPC §383BNSS §424
धारा 383. जब अपीलार्थी कारागार में हो तब प्रक्रिया
जब अपीलकर्ता जेल में हो तो प्रक्रिया।
- CRPC §384BNSS §425
धारा 384. अपील का संक्षेपतः खारिज किया जाना
अपील को संक्षिप्त रूप से खारिज कर दिया गया।
- CRPC §385BNSS §426
धारा 385. उन अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया जो संक्षेपतः खारिज नहीं की जातीं
उन अपीलों की सुनवाई की प्रक्रिया जिन्हें संक्षेप में खारिज नहीं किया गया है।
- CRPC §386BNSS §427
धारा 386. अपील न्यायालय की शक्तियां
अपीलीय न्यायालय की शक्तियाँ।
- CRPC §387BNSS §428
धारा 387. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय
अधीनस्थ अपीलीय न्यायालयों के निर्णय।
- CRPC §388BNSS §429
धारा 388. अपील पर उच्च न्यायालय के आदेश का अवर न्यायालय को प्रमाणित किया जाना
उच्च न्यायालय के अपील संबंधी आदेश को निचली अदालत को प्रमाणित किया जाना चाहिए।
- CRPC §420BNSS §460
धारा 420. वारंट किसके पास परिबद्ध किया जाएगा
वारंट किसके पास जमा किया जाना है।
- CRPC §421BNSS §461
धारा 421. जुर्माना उद्गृहीत करने के लिए वारंट
जुर्माना वसूलने का वारंट।
- CRPC §422BNSS §462
धारा 422. ऐसे वारंट का प्रभाव
इस प्रकार के वारंट का प्रभाव।
- CRPC §423BNSS §463
धारा 423. ऐसे राज्यक्षेत्र के न्यायालय द्वारा जारी किया गया जुर्माना उद्गृहीत करने का वारंट जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है
किसी ऐसे क्षेत्र में स्थित न्यायालय द्वारा जारी किया गया जुर्माना लगाने का वारंट, जिस पर यह संहिता लागू नहीं होती।
- CRPC §424BNSS §464
धारा 424. कारावास के दंडादेश के निष्पादन का निलंबन
कारावास की सजा के क्रियान्वयन को स्थगित करना।
- CRPC §425BNSS §465
धारा 425. वारंट कौन जारी कर सकेगा
वारंट कौन जारी कर सकता है?
- CRPC §426BNSS §466
धारा 426. निकल भागे सिद्धदोष व्यक्ति के बारे में दंडादेश कब प्रभावी होगा
फरार कैदी को दी गई सजा कब से प्रभावी होगी?
- CRPC §427BNSS §467
धारा 427. उस अपराधी के बारे में दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से ही दंडादिष्ट है
किसी अन्य अपराध के लिए पहले से ही सजा पाए अपराधी को सजा सुनाई गई है।
- CRPC §428BNSS §468
धारा 428. अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
अभियुक्त द्वारा भुगती गई हिरासत की अवधि को कारावास की सजा के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
- CRPC §429BNSS §469
धारा 429. व्यावृत्ति
बचत।
