RP Act 2
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "अनुबंध करने वाला राज्य" से तात्पर्य भारत के बाहर किसी ऐसे देश या स्थान की सरकार से है जिसके संबंध में केंद्र सरकार ने किसी संधि या अन्य माध्यम से भारत से ऐसे देश या स्थान पर और इसके विपरीत कैदियों के स्थानांतरण के लिए व्यवस्था की है और इसमें केंद्र सरकार द्वारा धारा 3 की उपधारा (1) के अंतर्गत आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट ऐसे देश या स्थान की कोई अन्य सरकार भी शामिल है;
(ख) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(ग) "कैदी" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा पारित आदेश के तहत कारावास की सजा काट रहा हो, जिसमें संविदाकारी राज्यों में उस समय लागू कानून के तहत स्थापित न्यायालय भी शामिल हैं;
(घ) "वारंट" से तात्पर्य धारा 7 की उपधारा (1) या धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी किए गए वारंट से है, जैसा भी मामला हो;
(ई) यहाँ प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उस संहिता में उन्हें दिया गया है।
(क) "अनुबंध करने वाला राज्य" से तात्पर्य भारत के बाहर किसी ऐसे देश या स्थान की सरकार से है जिसके संबंध में केंद्र सरकार ने किसी संधि या अन्य माध्यम से भारत से ऐसे देश या स्थान पर और इसके विपरीत कैदियों के स्थानांतरण के लिए व्यवस्था की है और इसमें केंद्र सरकार द्वारा धारा 3 की उपधारा (1) के अंतर्गत आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट ऐसे देश या स्थान की कोई अन्य सरकार भी शामिल है;
(ख) “निर्धारित” से तात्पर्य इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(ग) "कैदी" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा पारित आदेश के तहत कारावास की सजा काट रहा हो, जिसमें संविदाकारी राज्यों में उस समय लागू कानून के तहत स्थापित न्यायालय भी शामिल हैं;
(घ) "वारंट" से तात्पर्य धारा 7 की उपधारा (1) या धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी किए गए वारंट से है, जैसा भी मामला हो;
(ई) यहाँ प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियाँ जो परिभाषित नहीं हैं, परन्तु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो उस संहिता में उन्हें दिया गया है।
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