RP Act 13
धारा 13 · कारावास का निर्धारण और भारत में स्थानांतरण प्राप्त करने के लिए वारंट जारी करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, राज्य सरकार से परामर्श करके, उस राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में स्थित उस कारागार का निर्धारण करेगी, जहाँ धारा 12 की उपधारा (2) के तहत वारंट जारी किए गए कैदी को रखा जाएगा, और उस अधिकारी का भी निर्धारण करेगी जो उसे हिरासत में रखेगा।
(2) केंद्र सरकार उस सरकार के संयुक्त सचिव के पद से नीचे के किसी अधिकारी को धारा 12 की उपधारा (2) के तहत वारंट जारी करने और उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी को उस कैदी को, जिसके संबंध में वारंट जारी किया गया है, हिरासत में रखने का निर्देश देने के लिए अधिकृत करेगी।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी के लिए यह वैध होगा कि वह धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट में दिए गए निर्देश के अनुसार उसे सौंपे गए किसी भी कैदी को हिरासत में रखे और उक्त वारंट के अनुसार कार्रवाई के लिए उसे उपधारा (1) के तहत निर्धारित किसी भी कारागार में ले जाए। यदि कैदी ऐसी हिरासत से भाग जाता है, तो उसे बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है, जो बिना किसी अनुचित देरी के ऐसे कैदी को निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सौंप देगा। इस प्रकार गिरफ्तार किया गया कैदी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 224 के तहत अपराध करने का दोषी होगा और उक्त वारंट के अनुसार कार्रवाई का पात्र भी होगा।
(4) धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट में निम्नलिखित प्रावधान होंगे--
(क) किसी संविदाकारी राज्य या भारत के बाहर किसी स्थान से कैदी को भारत में लाना;
(ख) भारत के किसी भी भाग में ऐसे कैदी को पकड़ना, जो ऐसा स्थान हो जहां वारंट में निहित प्रावधानों को लागू किया जा सके;
(ग) धारा 12 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट शर्तों और नियमों के अनुसार कैदी के कारावास की प्रकृति और अवधि तथा वारंट में उल्लिखित तरीके से भारत में ऐसे कैदी का कारावास; और
(घ) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(5) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट के अनुपालन में किसी कैदी को कारावास में रखना, भारत में कारावास की सजा सुनाने के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा दी गई सजा के तहत कारावास माना जाएगा।
(6) यदि संविदा करने वाले राज्य में कैदी के विरुद्ध पारित कारावास की सजा, प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में भारतीय कानून के साथ असंगत है, तो केंद्र सरकार आदेश द्वारा, ऐसी सजा को प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में, जैसा भी मामला हो, अनुकूलित कर सकती है, जो भारत में किए गए समान अपराध के लिए निर्धारित कारावास की सजा के संगत हो।
बशर्ते कि इस प्रकार अनुकूलित सजा, जहां तक संभव हो, अनुबंधित राज्य के निर्णय द्वारा कैदी को दी गई सजा के अनुरूप हो और ऐसी अनुकूलित सजा, अपनी प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में, अनुबंधित राज्य में दी गई सजा को और अधिक गंभीर न बनाए।
(2) केंद्र सरकार उस सरकार के संयुक्त सचिव के पद से नीचे के किसी अधिकारी को धारा 12 की उपधारा (2) के तहत वारंट जारी करने और उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी को उस कैदी को, जिसके संबंध में वारंट जारी किया गया है, हिरासत में रखने का निर्देश देने के लिए अधिकृत करेगी।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी के लिए यह वैध होगा कि वह धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट में दिए गए निर्देश के अनुसार उसे सौंपे गए किसी भी कैदी को हिरासत में रखे और उक्त वारंट के अनुसार कार्रवाई के लिए उसे उपधारा (1) के तहत निर्धारित किसी भी कारागार में ले जाए। यदि कैदी ऐसी हिरासत से भाग जाता है, तो उसे बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है, जो बिना किसी अनुचित देरी के ऐसे कैदी को निकटतम पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सौंप देगा। इस प्रकार गिरफ्तार किया गया कैदी भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 224 के तहत अपराध करने का दोषी होगा और उक्त वारंट के अनुसार कार्रवाई का पात्र भी होगा।
(4) धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट में निम्नलिखित प्रावधान होंगे--
(क) किसी संविदाकारी राज्य या भारत के बाहर किसी स्थान से कैदी को भारत में लाना;
(ख) भारत के किसी भी भाग में ऐसे कैदी को पकड़ना, जो ऐसा स्थान हो जहां वारंट में निहित प्रावधानों को लागू किया जा सके;
(ग) धारा 12 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट शर्तों और नियमों के अनुसार कैदी के कारावास की प्रकृति और अवधि तथा वारंट में उल्लिखित तरीके से भारत में ऐसे कैदी का कारावास; और
(घ) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(5) किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी, धारा 12 की उपधारा (2) के तहत जारी वारंट के अनुपालन में किसी कैदी को कारावास में रखना, भारत में कारावास की सजा सुनाने के लिए सक्षम न्यायालय द्वारा दी गई सजा के तहत कारावास माना जाएगा।
(6) यदि संविदा करने वाले राज्य में कैदी के विरुद्ध पारित कारावास की सजा, प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में भारतीय कानून के साथ असंगत है, तो केंद्र सरकार आदेश द्वारा, ऐसी सजा को प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में, जैसा भी मामला हो, अनुकूलित कर सकती है, जो भारत में किए गए समान अपराध के लिए निर्धारित कारावास की सजा के संगत हो।
बशर्ते कि इस प्रकार अनुकूलित सजा, जहां तक संभव हो, अनुबंधित राज्य के निर्णय द्वारा कैदी को दी गई सजा के अनुरूप हो और ऐसी अनुकूलित सजा, अपनी प्रकृति, अवधि या दोनों के संबंध में, अनुबंधित राज्य में दी गई सजा को और अधिक गंभीर न बनाए।
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