NMC Act 35अध्याय VI · Recognition of Medical Qualifications
धारा 35 · भारत में विश्वविद्यालयों या चिकित्सा संस्थानों द्वारा प्रदान की गई चिकित्सा योग्यताओं की मान्यता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारत में किसी विश्वविद्यालय या चिकित्सा संस्थान द्वारा प्रदान की गई चिकित्सा योग्यता को अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड या पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड द्वारा, जैसा भी मामला हो, विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध और अनुरक्षित किया जाएगा और ऐसी चिकित्सा योग्यता इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता होगी।
(2) भारत में कोई भी विश्वविद्यालय या चिकित्सा संस्थान जो स्नातक या स्नातकोत्तर या सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा योग्यता प्रदान करता है, जो स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में शामिल नहीं है, ऐसी योग्यता को मान्यता देने के लिए उस बोर्ड को आवेदन कर सकता है।
(3) स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, चिकित्सा योग्यता को मान्यता प्रदान करने के लिए आवेदन की जांच छह महीने की अवधि के भीतर ऐसे तरीके से करेगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(4) जहां स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, किसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता देने का निर्णय लेता है, तो वह ऐसी चिकित्सा योग्यता को अपने द्वारा रखी गई सूची में शामिल करेगा और ऐसी मान्यता के प्रभावी होने की तिथि भी निर्दिष्ट करेगा।
(5) जहां स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, किसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है, तो विश्वविद्यालय या संबंधित चिकित्सा संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के साठ दिनों के भीतर, नियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से, मान्यता प्रदान करने के लिए आयोग को अपील कर सकता है।
(6) आयोग उपधारा (5) के अधीन प्राप्त अपील की दो माह की अवधि के भीतर जांच करेगा और यदि वह निर्णय लेता है कि ऐसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता दी जा सकती है, तो वह स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, को निर्देश दे सकता है कि वह ऐसी चिकित्सा योग्यता को उस बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में, विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से शामिल करे।
(7) यदि आयोग चिकित्सा योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है, या निर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो संबंधित विश्वविद्यालय या चिकित्सा संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर या निर्दिष्ट अवधि समाप्त होने के तीस दिनों के भीतर, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार के समक्ष दूसरी अपील कर सकता है।
(8) इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्व में मान्यता प्राप्त सभी चिकित्सा योग्यताएँ, जो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 (102 ऑफ 1956) की प्रथम अनुसूची और तृतीय अनुसूची के भाग I में शामिल हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यताएँ होंगी, और इन्हें अवर-स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, द्वारा विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध और अनुरक्षित किया जाएगा।
(2) भारत में कोई भी विश्वविद्यालय या चिकित्सा संस्थान जो स्नातक या स्नातकोत्तर या सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा योग्यता प्रदान करता है, जो स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में शामिल नहीं है, ऐसी योग्यता को मान्यता देने के लिए उस बोर्ड को आवेदन कर सकता है।
(3) स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, चिकित्सा योग्यता को मान्यता प्रदान करने के लिए आवेदन की जांच छह महीने की अवधि के भीतर ऐसे तरीके से करेगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(4) जहां स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, किसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता देने का निर्णय लेता है, तो वह ऐसी चिकित्सा योग्यता को अपने द्वारा रखी गई सूची में शामिल करेगा और ऐसी मान्यता के प्रभावी होने की तिथि भी निर्दिष्ट करेगा।
(5) जहां स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, किसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है, तो विश्वविद्यालय या संबंधित चिकित्सा संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के साठ दिनों के भीतर, नियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से, मान्यता प्रदान करने के लिए आयोग को अपील कर सकता है।
(6) आयोग उपधारा (5) के अधीन प्राप्त अपील की दो माह की अवधि के भीतर जांच करेगा और यदि वह निर्णय लेता है कि ऐसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता दी जा सकती है, तो वह स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, को निर्देश दे सकता है कि वह ऐसी चिकित्सा योग्यता को उस बोर्ड द्वारा रखी गई सूची में, विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से शामिल करे।
(7) यदि आयोग चिकित्सा योग्यता को मान्यता न देने का निर्णय लेता है, या निर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो संबंधित विश्वविद्यालय या चिकित्सा संस्थान ऐसे निर्णय की सूचना मिलने के तीस दिनों के भीतर या निर्दिष्ट अवधि समाप्त होने के तीस दिनों के भीतर, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार के समक्ष दूसरी अपील कर सकता है।
(8) इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्व में मान्यता प्राप्त सभी चिकित्सा योग्यताएँ, जो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 (102 ऑफ 1956) की प्रथम अनुसूची और तृतीय अनुसूची के भाग I में शामिल हैं, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यताएँ होंगी, और इन्हें अवर-स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड या स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, जैसा भी मामला हो, द्वारा विनियमों द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सूचीबद्ध और अनुरक्षित किया जाएगा।
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