IIPE Act 9
धारा 9 · संस्थान के कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
संस्थान निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करेगा, अर्थात्:—
(i) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान में गुणवत्ता और उत्कृष्टता को पोषित और बढ़ावा देना;
(ii) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, विज्ञान और कला में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करने वाले शिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों का प्रावधान करना;
(iii) संस्थान द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन रहते हुए, विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर उन उम्मीदवारों को डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक उपाधियाँ या उपाधियाँ प्रदान करना, जिन्होंने परीक्षा या परीक्षण एवं मूल्यांकन के किसी अन्य आधार पर निर्धारित प्रवीणता मानक प्राप्त कर लिया हो, और अच्छे एवं पर्याप्त कारणों से ऐसी किसी भी डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक उपाधियों या उपाधियों को वापस लेना;
(iv) मानद उपाधियाँ या अन्य उपाधियाँ प्रदान करना तथा फेलोशिप, छात्रवृत्तियाँ, प्रदर्शनियाँ, पुरस्कार और पदक स्थापित करना और प्रदान करना;
(v) परीक्षा या परीक्षण एवं मूल्यांकन की किसी अन्य विधि के माध्यम से संस्थान में प्रवेश के लिए मानक निर्धारित करना;
(vi) अपने शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रमों की विषयवस्तु, गुणवत्ता, डिजाइन और सतत मूल्यांकन का इस प्रकार प्रबंधन करना जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त हो सके;
(vii) शिक्षण और अनुसंधान के एकीकरण के माध्यम से तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र के लाभ के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना;
(viii) तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उद्योग तथा ऊर्जा क्षेत्र में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के साथ नेटवर्किंग के माध्यम से घनिष्ठ शैक्षिक और अनुसंधान संपर्क को बढ़ावा देना;
(ix) शिक्षकों और विद्वानों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान संचालन, प्रायोजित अनुसंधान और परामर्श परियोजनाओं आदि के माध्यम से संस्थान के उद्देश्यों से पूर्णतः या आंशिक रूप से मिलते-जुलते उद्देश्यों वाले विश्व के किसी भी भाग में स्थित शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करना;
(x) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों, सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन करना;
(xi) छात्रों के लिए हॉल, आवास और छात्रावास स्थापित करना, उनका रखरखाव करना और उनका प्रबंधन करना तथा हॉल और छात्रावासों में रहने की शर्तें निर्धारित करना;
(xii) संस्थान के सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के अनुशासन की निगरानी, नियंत्रण और विनियमन करना तथा उनके स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्था करना;
(xiii) छात्रों के अनुशासन की निगरानी और विनियमन करना तथा उनके स्वास्थ्य, सामान्य कल्याण और सांस्कृतिक एवं कॉर्पोरेट जीवन को बढ़ावा देने की व्यवस्था करना;
(xiv) क़ानून बनाना और उसमें परिवर्तन, संशोधन या निरस्त करना;
(xv) संस्थान से संबंधित या उसमें निहित किसी भी संपत्ति से इस प्रकार व्यवहार करना जैसा संस्थान अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए उचित समझे;
(xvi) केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से उपहार, अनुदान, दान या परोपकार प्राप्त करना तथा वसीयतकर्ताओं, दानदाताओं, हस्तांतरणकर्ताओं, पूर्व छात्रों, उद्योग या किसी अन्य व्यक्ति से चल या अचल संपत्तियों की वसीयत, दान, अनुदान और हस्तांतरण प्राप्त करना;
(17) संस्थान के प्रयोजनों के लिए संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा के साथ या उसके बिना धन उधार लेना;
(xviii) विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों को प्रोत्साहित करने और सीखने के प्रति दृष्टिकोण विकसित करने के लिए कक्षा में नई तकनीक को एकीकृत करना;
(xix) पेट्रोलियम क्षेत्र में मुद्रित और गैर-मुद्रित ज्ञान संसाधनों का एक सूचना संसाधन केंद्र विकसित करना और बनाए रखना, जिसमें संपूर्ण हाइड्रोकार्बन मूल्य श्रृंखला के साथ-साथ ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अन्य संबंधित क्षेत्र शामिल हों;
(xx) तेल, गैस, संपूर्ण हाइड्रोकार्बन मूल्य श्रृंखला और ऊर्जा से संबंधित प्रौद्योगिकी के उन्नत क्षेत्रों में संस्थान के कार्यरत पेशेवरों और अन्य कर्मचारियों को आगे की शिक्षा प्रदान करना;
(xxi) संस्थान के परिसर में या कंपनी के परिसर में पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्र के अत्याधुनिक क्षेत्र में सतत शिक्षा के लिए कार्यरत पेशेवरों की वर्तमान और निरंतर आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अनुकूलित कार्यक्रम पेश करना;
(xxii) उद्योग को अपने कर्मचारियों को उच्च डिग्री के लिए संस्थान में शामिल होने और प्रायोजक उद्योग की रुचि वाली समस्याओं पर काम करने के लिए प्रायोजित करने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे उद्योग में गहन अंतःक्रिया और अनुसंधान वातावरण विकसित करने में मदद मिलती है;
(xxiii) राष्ट्र के लाभ के लिए नए बुनियादी ज्ञान और अनुप्रयुक्त प्रौद्योगिकी के सृजन और कंपनियों को इसके सक्रिय प्रसारण को बढ़ावा देना और इस उद्देश्य के लिए संस्थान में किए गए नए विकासों का पेटेंट कराने और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंस देने के लिए एक बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ की स्थापना करना;
(xxiv) संस्थान के परिसर में या अन्य स्थानों पर प्रमाण पत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न संबंधित क्षेत्रों में लोगों को प्रशिक्षण देकर और पाठ्यक्रम के डिजाइन और संचालन में उद्योग को शामिल करके भारत सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों का समर्थन करने में सक्रिय होना;
(xxv) ऊर्जा के व्यापक दायरे के अंतर्गत पेट्रोलियम और पेट्रोलियम से संबंधित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संस्थान के कामकाज पर व्यापक ध्यान देना; और
(xxvi) ऊपर विशेष रूप से शामिल न की गई ऐसी सभी चीजें करना, जो संस्थान के सभी या किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आकस्मिक या सहायक हो सकती हैं।
(i) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान में गुणवत्ता और उत्कृष्टता को पोषित और बढ़ावा देना;
(ii) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, विज्ञान और कला में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करने वाले शिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों का प्रावधान करना;
(iii) संस्थान द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन रहते हुए, विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर उन उम्मीदवारों को डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक उपाधियाँ या उपाधियाँ प्रदान करना, जिन्होंने परीक्षा या परीक्षण एवं मूल्यांकन के किसी अन्य आधार पर निर्धारित प्रवीणता मानक प्राप्त कर लिया हो, और अच्छे एवं पर्याप्त कारणों से ऐसी किसी भी डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र या अन्य शैक्षणिक उपाधियों या उपाधियों को वापस लेना;
(iv) मानद उपाधियाँ या अन्य उपाधियाँ प्रदान करना तथा फेलोशिप, छात्रवृत्तियाँ, प्रदर्शनियाँ, पुरस्कार और पदक स्थापित करना और प्रदान करना;
(v) परीक्षा या परीक्षण एवं मूल्यांकन की किसी अन्य विधि के माध्यम से संस्थान में प्रवेश के लिए मानक निर्धारित करना;
(vi) अपने शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रमों की विषयवस्तु, गुणवत्ता, डिजाइन और सतत मूल्यांकन का इस प्रकार प्रबंधन करना जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त हो सके;
(vii) शिक्षण और अनुसंधान के एकीकरण के माध्यम से तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र के लाभ के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना;
(viii) तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उद्योग तथा ऊर्जा क्षेत्र में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के साथ नेटवर्किंग के माध्यम से घनिष्ठ शैक्षिक और अनुसंधान संपर्क को बढ़ावा देना;
(ix) शिक्षकों और विद्वानों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान संचालन, प्रायोजित अनुसंधान और परामर्श परियोजनाओं आदि के माध्यम से संस्थान के उद्देश्यों से पूर्णतः या आंशिक रूप से मिलते-जुलते उद्देश्यों वाले विश्व के किसी भी भाग में स्थित शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग करना;
(x) पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों, सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन करना;
(xi) छात्रों के लिए हॉल, आवास और छात्रावास स्थापित करना, उनका रखरखाव करना और उनका प्रबंधन करना तथा हॉल और छात्रावासों में रहने की शर्तें निर्धारित करना;
(xii) संस्थान के सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के अनुशासन की निगरानी, नियंत्रण और विनियमन करना तथा उनके स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्था करना;
(xiii) छात्रों के अनुशासन की निगरानी और विनियमन करना तथा उनके स्वास्थ्य, सामान्य कल्याण और सांस्कृतिक एवं कॉर्पोरेट जीवन को बढ़ावा देने की व्यवस्था करना;
(xiv) क़ानून बनाना और उसमें परिवर्तन, संशोधन या निरस्त करना;
(xv) संस्थान से संबंधित या उसमें निहित किसी भी संपत्ति से इस प्रकार व्यवहार करना जैसा संस्थान अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए उचित समझे;
(xvi) केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से उपहार, अनुदान, दान या परोपकार प्राप्त करना तथा वसीयतकर्ताओं, दानदाताओं, हस्तांतरणकर्ताओं, पूर्व छात्रों, उद्योग या किसी अन्य व्यक्ति से चल या अचल संपत्तियों की वसीयत, दान, अनुदान और हस्तांतरण प्राप्त करना;
(17) संस्थान के प्रयोजनों के लिए संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा के साथ या उसके बिना धन उधार लेना;
(xviii) विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों को प्रोत्साहित करने और सीखने के प्रति दृष्टिकोण विकसित करने के लिए कक्षा में नई तकनीक को एकीकृत करना;
(xix) पेट्रोलियम क्षेत्र में मुद्रित और गैर-मुद्रित ज्ञान संसाधनों का एक सूचना संसाधन केंद्र विकसित करना और बनाए रखना, जिसमें संपूर्ण हाइड्रोकार्बन मूल्य श्रृंखला के साथ-साथ ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अन्य संबंधित क्षेत्र शामिल हों;
(xx) तेल, गैस, संपूर्ण हाइड्रोकार्बन मूल्य श्रृंखला और ऊर्जा से संबंधित प्रौद्योगिकी के उन्नत क्षेत्रों में संस्थान के कार्यरत पेशेवरों और अन्य कर्मचारियों को आगे की शिक्षा प्रदान करना;
(xxi) संस्थान के परिसर में या कंपनी के परिसर में पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्र के अत्याधुनिक क्षेत्र में सतत शिक्षा के लिए कार्यरत पेशेवरों की वर्तमान और निरंतर आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अनुकूलित कार्यक्रम पेश करना;
(xxii) उद्योग को अपने कर्मचारियों को उच्च डिग्री के लिए संस्थान में शामिल होने और प्रायोजक उद्योग की रुचि वाली समस्याओं पर काम करने के लिए प्रायोजित करने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे उद्योग में गहन अंतःक्रिया और अनुसंधान वातावरण विकसित करने में मदद मिलती है;
(xxiii) राष्ट्र के लाभ के लिए नए बुनियादी ज्ञान और अनुप्रयुक्त प्रौद्योगिकी के सृजन और कंपनियों को इसके सक्रिय प्रसारण को बढ़ावा देना और इस उद्देश्य के लिए संस्थान में किए गए नए विकासों का पेटेंट कराने और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंस देने के लिए एक बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ की स्थापना करना;
(xxiv) संस्थान के परिसर में या अन्य स्थानों पर प्रमाण पत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न संबंधित क्षेत्रों में लोगों को प्रशिक्षण देकर और पाठ्यक्रम के डिजाइन और संचालन में उद्योग को शामिल करके भारत सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों का समर्थन करने में सक्रिय होना;
(xxv) ऊर्जा के व्यापक दायरे के अंतर्गत पेट्रोलियम और पेट्रोलियम से संबंधित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संस्थान के कामकाज पर व्यापक ध्यान देना; और
(xxvi) ऊपर विशेष रूप से शामिल न की गई ऐसी सभी चीजें करना, जो संस्थान के सभी या किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आकस्मिक या सहायक हो सकती हैं।
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