IIPE Act 10
धारा 10 · बोर्ड की शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, बोर्ड संस्थान के मामलों के सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होगा और इस अधिनियम, विधानों और अध्यादेशों द्वारा अन्यथा प्रदान नहीं की गई सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा और सीनेट के कार्यों की समीक्षा करने की शक्ति रखेगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित कार्य करेगा—
(क) संस्थान के प्रशासन और कामकाज से संबंधित नीतिगत प्रश्नों पर निर्णय लेना;
(ख) संस्थान द्वारा प्रदान किए जाने वाले पाठ्यक्रमों की अवधि, डिग्री के नामकरण और अन्य उपाधियों के संबंध में नीति निर्धारित करना;
(ग) संस्थान द्वारा अध्ययन के पाठ्यक्रम स्थापित करना और संस्थान द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों के संबंध में प्रवीणता के मानक और अन्य शैक्षणिक भेद निर्धारित करना;
(घ) संस्थान के शिक्षण एवं अनुसंधान संकाय तथा अन्य कर्मचारियों की भर्ती विधि एवं सेवा शर्तों के संबंध में नीति निर्धारित करना;
(ई) संस्थान के संसाधन जुटाने का मार्गदर्शन करना और निवेश के लिए नीतियां निर्धारित करना;
(f) संस्थान के प्रयोजनों के लिए संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा के साथ या उसके बिना ऋण लेने के प्रस्तावों पर विचार करना और उन्हें मंजूरी देना;
(जी) क़ानून बनाना और उनमें परिवर्तन, संशोधन या निरस्त करना;
(h) संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखा और अगले वित्तीय वर्ष के बजट अनुमानों पर विचार करना और प्रस्ताव पारित करना, जैसा वह उचित समझे, साथ ही इसकी विकास योजनाओं का विवरण भी प्रस्तुत करना;
(i) शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी और अन्य पदों का सृजन करना तथा उन पर नियुक्तियाँ करना तथा उनके विकास और वृद्धि के लिए अवसर प्रदान करना;
(j) संस्थान की विकास योजनाओं और ऐसी योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों की जांच और अनुमोदन करना;
(k) संस्थान के अगले वित्तीय वर्ष के वार्षिक परिचालन और पूंजी बजट अनुमानों की जांच और अनुमोदन करना तथा अनुमोदित बजट की सीमा के भीतर व्यय को मंजूरी देना;
(एल) केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से तथा वसीयतकर्ताओं, दाताओं या हस्तांतरणकर्ताओं से, जैसा भी मामला हो, उपहार, अनुदान, वसीयत, दान या परोपकार तथा चल या अचल संपत्तियों का हस्तांतरण प्राप्त करना तथा संस्थान के निधियों की अभिरक्षा करना;
(m) शुल्क और अन्य प्रभार निर्धारित करना, मांगना और प्राप्त करना;
(n) संस्थान की ओर से सभी कानूनी कार्यवाही में मुकदमा करना और बचाव करना; और
(ओ) उपर्युक्त शक्तियों में से किसी एक या सभी को प्राप्त करने के लिए आवश्यक, प्रासंगिक या सहायक सभी कार्य करना।
(3) बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कर्तव्यों के पालन के लिए ऐसी समितियों की नियुक्ति करने का अधिकार होगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) बोर्ड को भारत के भीतर या भारत के बाहर किसी भी स्थान पर परिसर और शैक्षणिक केंद्र स्थापित करने का अधिकार होगा:
बशर्ते कि केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना भारत के बाहर कोई परिसर या शैक्षणिक केंद्र स्थापित नहीं किया जाएगा।
(5) धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड केंद्रीय सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना संस्थान की किसी अचल संपत्ति का किसी भी तरह से निपटान नहीं करेगा।
(6) बोर्ड, इस आशय के एक विशिष्ट प्रस्ताव के माध्यम से, अपनी किसी भी शक्ति और कर्तव्य को अध्यक्ष, निदेशक, किसी अधिकारी या संस्थान के किसी प्राधिकरण को सौंप सकता है, बशर्ते कि वह ऐसे सौंपे गए अधिकार के तहत की जाने वाली कार्रवाई की समीक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखे।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड निम्नलिखित कार्य करेगा—
(क) संस्थान के प्रशासन और कामकाज से संबंधित नीतिगत प्रश्नों पर निर्णय लेना;
(ख) संस्थान द्वारा प्रदान किए जाने वाले पाठ्यक्रमों की अवधि, डिग्री के नामकरण और अन्य उपाधियों के संबंध में नीति निर्धारित करना;
(ग) संस्थान द्वारा अध्ययन के पाठ्यक्रम स्थापित करना और संस्थान द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों के संबंध में प्रवीणता के मानक और अन्य शैक्षणिक भेद निर्धारित करना;
(घ) संस्थान के शिक्षण एवं अनुसंधान संकाय तथा अन्य कर्मचारियों की भर्ती विधि एवं सेवा शर्तों के संबंध में नीति निर्धारित करना;
(ई) संस्थान के संसाधन जुटाने का मार्गदर्शन करना और निवेश के लिए नीतियां निर्धारित करना;
(f) संस्थान के प्रयोजनों के लिए संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा के साथ या उसके बिना ऋण लेने के प्रस्तावों पर विचार करना और उन्हें मंजूरी देना;
(जी) क़ानून बनाना और उनमें परिवर्तन, संशोधन या निरस्त करना;
(h) संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट, वार्षिक लेखा और अगले वित्तीय वर्ष के बजट अनुमानों पर विचार करना और प्रस्ताव पारित करना, जैसा वह उचित समझे, साथ ही इसकी विकास योजनाओं का विवरण भी प्रस्तुत करना;
(i) शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी और अन्य पदों का सृजन करना तथा उन पर नियुक्तियाँ करना तथा उनके विकास और वृद्धि के लिए अवसर प्रदान करना;
(j) संस्थान की विकास योजनाओं और ऐसी योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों की जांच और अनुमोदन करना;
(k) संस्थान के अगले वित्तीय वर्ष के वार्षिक परिचालन और पूंजी बजट अनुमानों की जांच और अनुमोदन करना तथा अनुमोदित बजट की सीमा के भीतर व्यय को मंजूरी देना;
(एल) केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से तथा वसीयतकर्ताओं, दाताओं या हस्तांतरणकर्ताओं से, जैसा भी मामला हो, उपहार, अनुदान, वसीयत, दान या परोपकार तथा चल या अचल संपत्तियों का हस्तांतरण प्राप्त करना तथा संस्थान के निधियों की अभिरक्षा करना;
(m) शुल्क और अन्य प्रभार निर्धारित करना, मांगना और प्राप्त करना;
(n) संस्थान की ओर से सभी कानूनी कार्यवाही में मुकदमा करना और बचाव करना; और
(ओ) उपर्युक्त शक्तियों में से किसी एक या सभी को प्राप्त करने के लिए आवश्यक, प्रासंगिक या सहायक सभी कार्य करना।
(3) बोर्ड को इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग और अपने कर्तव्यों के पालन के लिए ऐसी समितियों की नियुक्ति करने का अधिकार होगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) बोर्ड को भारत के भीतर या भारत के बाहर किसी भी स्थान पर परिसर और शैक्षणिक केंद्र स्थापित करने का अधिकार होगा:
बशर्ते कि केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना भारत के बाहर कोई परिसर या शैक्षणिक केंद्र स्थापित नहीं किया जाएगा।
(5) धारा 4 में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड केंद्रीय सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना संस्थान की किसी अचल संपत्ति का किसी भी तरह से निपटान नहीं करेगा।
(6) बोर्ड, इस आशय के एक विशिष्ट प्रस्ताव के माध्यम से, अपनी किसी भी शक्ति और कर्तव्य को अध्यक्ष, निदेशक, किसी अधिकारी या संस्थान के किसी प्राधिकरण को सौंप सकता है, बशर्ते कि वह ऐसे सौंपे गए अधिकार के तहत की जाने वाली कार्रवाई की समीक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखे।
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