PRTPD Act 102अध्याय XII · Town Development Schemes
धारा 102 · मध्यस्थ, उसकी शक्तियां और कर्तव्य
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
धारा 93 की उपधारा (1) के तहत आधिकारिक राजपत्र में मसौदा योजना को राज्य सरकार की स्वीकृति प्रकाशित होने की तिथि से एक माह के भीतर, राज्य सरकार, स्वीकृति के लिए प्राप्त एक या अधिक योजनाओं के प्रयोजनों के लिए, जहां आवश्यक हो, निर्धारित योग्यता रखने वाले किसी व्यक्ति को मध्यस्थ नियुक्त करेगी और उसके कर्तव्य निम्नानुसार होंगे।(2)
राज्य सरकार, यदि वह उचित समझे, तो किसी भी समय उपधारा (1) के अधीन नियुक्त मध्यस्थ को अक्षमता या कदाचार के कारण हटा सकती है या किसी अच्छे या पर्याप्त कारण से उसे बदल सकती है और उसके स्थान पर तुरंत किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करेगी तथा मध्यस्थ के समक्ष उसकी बर्खास्तगी या प्रतिस्थापन की तिथि से ठीक पहले लंबित कोई भी कार्यवाही उसके स्थान पर नियुक्त नए मध्यस्थ द्वारा जारी रखी जाएगी और उसका निपटारा किया जाएगा।(3)
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, प्रत्येक मध्यस्थ निम्नलिखित कार्य कर सकता है:-(i)
उसके द्वारा निर्धारित तरीके से नोटिस दिए जाने के बाद, सार्वजनिक प्रयोजनों या प्राधिकरण के प्रयोजनों के लिए आवंटित या आरक्षित क्षेत्रों तथा पुनर्गठित भूखंडों को परिभाषित, सीमांकित और निर्धारित करना;(ii)
निर्धारित तरीके से उसके द्वारा सूचना दिए जाने के बाद, उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों का निर्णय करना जिन्हें पुनर्गठित भूखंड आवंटित किया जाना है, और जब ऐसा भूखंड उन व्यक्तियों को आवंटित किया जाना है जिनका संयुक्त स्वामित्व है, तो ऐसे व्यक्तियों के हिस्से का निर्णय करना;(iii)
धारा 123 की उपधारा (1) के खंड (f) के प्रावधानों के अनुसार अंतिम योजना में शामिल मूल भूखंडों और पुनर्गठित भूखंडों के मूल्यों के बीच अंतर का अनुमान लगाना और उसे निर्धारित करना;(iv)
योजना के अंतर्गत पूर्णतः अधिग्रहित किसी मूल भूखंड के संबंध में धारा 123 की उपधारा (1) के खंड (f) के प्रावधानों के अनुसार मूल भूखंड के क्षेत्रफल की हानि के लिए देय मुआवजे का अनुमान लगाना;(v)
यह निर्धारित करना कि प्राधिकरण के सार्वजनिक प्रयोजन या प्रयोजनों के लिए आवंटित या आरक्षित क्षेत्र योजना के क्षेत्र के भीतर मालिकों या निवासियों के लिए पूर्णतः या आंशिक रूप से लाभकारी हैं या नहीं;(vi)
प्राधिकरण के सार्वजनिक उद्देश्य या उद्देश्यों के लिए उपयोग किए गए, आवंटित या आरक्षित प्रत्येक भूखंड पर मुआवजे के रूप में देय राशियों के अनुपात का अनुमान लगाना, जो योजना के क्षेत्र के भीतर मालिकों या निवासियों और आम जनता दोनों के लिए आंशिक रूप से लाभकारी है, जिसे योजना के निर्माण में शामिल किया जाएगा;(vii)
प्राधिकरण के सार्वजनिक प्रयोजन या प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने वाले, आवंटित या आरक्षित प्रत्येक भूखंड पर लगाए जाने वाले अंशदान के अनुपात का निर्धारण करना, जो योजना के क्षेत्र के भीतर मालिकों या निवासियों और आम जनता दोनों के लिए आंशिक रूप से लाभकारी हो;(viii)
इस उपधारा के खंड (xxi) के तहत अंतिम योजना तैयार किए जाने की तिथि पर धार्मिक या धर्मार्थ प्रयोजनों के लिए विशेष रूप से उपयोग किए जाने वाले या कब्जे में लिए गए भूखंडों या उनके भागों के संबंध में अंशदान के भुगतान से दी जाने वाली छूट की राशि, यदि कोई हो, निर्धारित करना;(ix)
अंतिम योजना में शामिल पुनर्गठित भूखंडों के मूल्य का अनुमान लगाना तथा धारा 124 के प्रावधानों के अनुसार ऐसे भूखंडों के संबंध में अर्जित होने वाली वृद्धि का अनुमान लगाना;(x)
अंतिम योजना में शामिल पुनर्गठित भूखंडों के संबंध में वृद्धि के अनुपात की गणना करना, धारा 123 के प्रावधानों के अनुसार योजना की लागत में योगदान के लिए उत्तरदायी होगा;(xi)
अंतिम योजना में शामिल प्रत्येक पुनर्गठित भूखंड पर लगाए जाने वाले अंशदान की गणना करना;(xii)
धारा 126 के प्रावधानों के अनुसार किसी व्यक्ति से वसूले जाने वाले अंशदान में से कटौती या वृद्धि की जाने वाली राशि का निर्धारण करना;(xiii)
किसी मूल भूखंड में किसी अधिकार के पूर्ण या आंशिक हस्तांतरण के लिए पुनर्गठित भूखंड में प्रावधान करना या धारा 130 के प्रावधानों के अनुसार किसी मूल भूखंड में किसी अधिकार के विलुप्त होने का प्रावधान करना;(xiv)
धारा 97 के तहत देय मुआवजे की राशि का अनुमान लगाना;(xv)
जहां कोई भूखंड कब्जे सहित बंधक या पट्टे के अधीन है, वहां बंधकधारी या पट्टेदार को देय मुआवजे या अंशदान का अनुपात या अंशदान का अनुपात निर्धारित करना, एक ओर बंधकधारी या पट्टेदार को देय अंशदान का अनुपात निर्धारित करना, दूसरी ओर बंधककर्ता या पट्टेदार को देय अंशदान का अनुपात निर्धारित करना;(xvi)
निर्धारित तरीके से उसके द्वारा दी गई सूचना के बाद, उसके समक्ष किए गए दावों के संदर्भ में, धारा 128 के प्रावधानों के अनुसार योजना बनाने से प्रतिकूल रूप से प्रभावित किसी संपत्ति या अधिकार के स्वामी को देय मुआवजे का अनुमान लगाना;(xvii)
प्राधिकरण द्वारा योजना में निर्धारित कार्यों को पूरा करने की अवधि निर्धारित करना;(xviii)
अध्याय XIII के अंतर्गत लगाए जाने वाले विकास शुल्क की राशि और उसके आवंटन तथा वसूली के तरीके का निर्धारण करना;(xix)
प्राधिकरण के अनुरोध पर, अध्याय XIII के अंतर्गत लगाए जाने वाले सुधार शुल्क की राशि का निर्धारण करना;(xx)
ऐसे अन्य मामलों का निर्धारण करना जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है;(xxi)
मसौदा योजना के अनुसार निर्धारित प्रपत्र में अंतिम योजना तैयार करना:(क)
वह मसौदा योजना में बदलाव कर सकता है;(ख)
वह प्राधिकरण और आपत्ति उठाने वाले किसी भी स्वामी को सुनने के बाद राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से मसौदा योजना में पर्याप्त परिवर्तन कर सकता है।(4)
मध्यस्थ अपनी नियुक्ति की तिथि से चार माह की अवधि के भीतर उप-धारा (3) में निर्दिष्ट सभी मामलों का निर्णय करेगा: बशर्ते कि राज्य सरकार, यदि वह उचित समझे, चाहे उक्त अवधि समाप्त हो गई हो या नहीं, और चाहे उप-धारा (3) में निर्दिष्ट सभी मामलों का निर्णय हो गया हो या नहीं, समय-समय पर राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उप-धारा (3) में निर्दिष्ट सभी मामलों के निर्णय की अवधि बढ़ा सकती है।इस धारा पर आपका निजी नोट
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