धारा 114A · बलात्संग के लिए कतिपय (कुछ) अभियोजन में सम्मति के न होने के बारे में उपधारणा
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ३७६ की उपधारा (२) के खण्ड (क) , खण्ड (ख), खण्ड (ग), खण्ड (घ), खण्ड (ङ), खण्ड (च), खण्ड (छ), खण्ड (ज), खण्ड (झ), खण्ड (ञ), खण्ड (ट), खण्ड (ठ), खण्ड (ड), खण्ड (ढ) के अधीन बलात्संग के किसी अभियोजन में, जहाँ अभियुक्त द्वारा मैथुन किया जाना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या वह उस स्त्री की, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उससे बलात्संग किया गया है, सम्मति के बिना किया गया है और ऐसी स्त्री अपने साक्ष्य में न्यायालय के समक्ष यह कथन करती है कि उसने सम्मति नहीं दी थी, वहाँ न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि उसने सम्मति नहीं दी थी ।
स्पष्टीकरण :
इस धारा में मैथुन से भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ३७५ के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई कार्य अभिप्रेत होगा ।
स्पष्टीकरण :
इस धारा में मैथुन से भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५) की धारा ३७५ के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई कार्य अभिप्रेत होगा ।
नए कानून में
IEA 114ABSA 120
120. Presumption as to absence of consent in certain prosecution for rape.
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