Competition Act 53Nअध्याय VIIIA · Appellate Tribunal
धारा 53N · मुआवजा प्रदान करना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 53एन. मुआवज़ा प्रदान करना। (1) इस अधिनियम में निहित अन्य प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केंद्र सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या कोई उद्यम या कोई व्यक्ति, आयोग के निष्कर्षों या आयोग के किसी निष्कर्ष के विरुद्ध अपील में अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों या धारा 42ए या 2 के तहत [धारा 53क्यू की उपधारा (2) के तहत या धारा 53टी के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के निष्कर्षों के विरुद्ध अपील में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों या धारा 48ए के तहत पारित निपटान आदेश के विरुद्ध अपील में] मुआवज़े के दावे पर निर्णय करने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण को आवेदन कर सकता है, और केंद्र सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या किसी उद्यम या किसी व्यक्ति द्वारा अध्याय II के प्रावधानों के किसी उल्लंघन के परिणामस्वरूप, उद्यम द्वारा किए गए उल्लंघन या आयोग द्वारा पारित निपटान आदेश के परिणामस्वरूप, किसी भी हानि या क्षति के लिए किसी उद्यम से मुआवज़ा वसूलने का आदेश पारित कर सकता है।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत किए गए प्रत्येक आवेदन के साथ आयोग 3 [या अपीलीय न्यायाधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय, या निपटान के लिए कोई आदेश], यदि कोई हो, संलग्न किया जाएगा और साथ ही ऐसे शुल्क भी संलग्न किए जाएंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण, उपधारा (1) के तहत किए गए आवेदन में उल्लिखित आरोपों की जांच करने के बाद, उद्यम को आवेदक को अध्याय II के प्रावधानों के किसी उल्लंघन के परिणामस्वरूप आवेदक को हुई हानि या क्षति के मुआवजे के रूप में उद्यम से वसूली योग्य राशि का भुगतान करने का आदेश पारित कर सकता है।
बशर्ते कि अपीलीय न्यायाधिकरण मुआवजे का आदेश पारित करने से पहले आयोग की सिफारिशें प्राप्त कर सकता है।
(4) जहाँ उपधारा (1) में निर्दिष्ट हानि या क्षति एक ही हित रखने वाले अनेक व्यक्तियों को होती है, तो ऐसे एक या अधिक व्यक्ति अपीलीय न्यायाधिकरण की अनुमति से उन उपधारा के अंतर्गत उन हितधारक व्यक्तियों की ओर से या उनके लाभ के लिए आवेदन कर सकते हैं, और इसके बाद सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश 1 के नियम 8 के प्रावधान लागू होंगे, इस संशोधन के साथ कि उसमें किसी वाद या डिक्री के प्रत्येक संदर्भ को अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन और उस पर अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--संदेहों के निवारण हेतु, यह घोषित किया जाता है कि--
(क) (क) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए आवेदन तभी किया जा सकता है जब आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण ने धारा 53ए 1 की उपधारा (1) के खंड (क) के तहत अपील पर [या सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 53टी के तहत अपील पर] अपने समक्ष किसी कार्यवाही में यह निर्धारित किया हो कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, या यदि अधिनियम की धारा 42ए या धारा 53क्यू की उपधारा (2) के प्रावधान लागू होते हैं;
(ख) उपधारा (3) के तहत की जाने वाली जांच, आवेदन करने वाले व्यक्ति की पात्रता और देय मुआवजे की मात्रा निर्धारित करने के उद्देश्य से होगी, न कि अधिनियम के किसी उल्लंघन के संबंध में आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण [या सर्वोच्च न्यायालय] के निष्कर्षों की पुनः जांच करने के लिए।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत किए गए प्रत्येक आवेदन के साथ आयोग 3 [या अपीलीय न्यायाधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय, या निपटान के लिए कोई आदेश], यदि कोई हो, संलग्न किया जाएगा और साथ ही ऐसे शुल्क भी संलग्न किए जाएंगे जो निर्धारित किए जा सकते हैं।
(3) अपीलीय न्यायाधिकरण, उपधारा (1) के तहत किए गए आवेदन में उल्लिखित आरोपों की जांच करने के बाद, उद्यम को आवेदक को अध्याय II के प्रावधानों के किसी उल्लंघन के परिणामस्वरूप आवेदक को हुई हानि या क्षति के मुआवजे के रूप में उद्यम से वसूली योग्य राशि का भुगतान करने का आदेश पारित कर सकता है।
बशर्ते कि अपीलीय न्यायाधिकरण मुआवजे का आदेश पारित करने से पहले आयोग की सिफारिशें प्राप्त कर सकता है।
(4) जहाँ उपधारा (1) में निर्दिष्ट हानि या क्षति एक ही हित रखने वाले अनेक व्यक्तियों को होती है, तो ऐसे एक या अधिक व्यक्ति अपीलीय न्यायाधिकरण की अनुमति से उन उपधारा के अंतर्गत उन हितधारक व्यक्तियों की ओर से या उनके लाभ के लिए आवेदन कर सकते हैं, और इसके बाद सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश 1 के नियम 8 के प्रावधान लागू होंगे, इस संशोधन के साथ कि उसमें किसी वाद या डिक्री के प्रत्येक संदर्भ को अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन और उस पर अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण .--संदेहों के निवारण हेतु, यह घोषित किया जाता है कि--
(क) (क) अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए आवेदन तभी किया जा सकता है जब आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण ने धारा 53ए 1 की उपधारा (1) के खंड (क) के तहत अपील पर [या सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 53टी के तहत अपील पर] अपने समक्ष किसी कार्यवाही में यह निर्धारित किया हो कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, या यदि अधिनियम की धारा 42ए या धारा 53क्यू की उपधारा (2) के प्रावधान लागू होते हैं;
(ख) उपधारा (3) के तहत की जाने वाली जांच, आवेदन करने वाले व्यक्ति की पात्रता और देय मुआवजे की मात्रा निर्धारित करने के उद्देश्य से होगी, न कि अधिनियम के किसी उल्लंघन के संबंध में आयोग या अपीलीय न्यायाधिकरण [या सर्वोच्च न्यायालय] के निष्कर्षों की पुनः जांच करने के लिए।
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