Competition Act 4अध्याय II · Prohibition of abuse of dominant position
धारा 4 · प्रभुत्वशाली पद का दुरुपयोग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [(1) कोई भी उद्यम या समूह अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग नहीं करेगा।]
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग होगा, यदि कोई उद्यम या समूह,--
(क) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यवहार थोपता है--
(i) माल या सेवा की खरीद या बिक्री में शर्त; या
(ii) वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में कीमत (जिसमें अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक कीमत भी शामिल है)। स्पष्टीकरण.-- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, उप-खंड (i) में निर्दिष्ट वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में अनुचित या भेदभावपूर्ण शर्त तथा उप-खंड (ii) में निर्दिष्ट वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में अनुचित या भेदभावपूर्ण कीमत (जिसमें अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक कीमत भी शामिल है) में ऐसी कोई शर्त या कीमत शामिल नहीं होगी जिसे प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए अपनाया गया हो; या
(ख) सीमित करता है या प्रतिबंधित करता है--
(i) वस्तुओं का उत्पादन या सेवाओं का प्रावधान या उनके लिए बाजार; या
(ii) उपभोक्ताओं के हित में वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित तकनीकी या वैज्ञानिक विकास; या
(ग) किसी भी प्रकार से बाजार पहुंच से वंचित करने वाली प्रथाओं में लिप्त होता है; या
(घ) अनुबंधों के समापन को अन्य पक्षों द्वारा पूरक दायित्वों की स्वीकृति के अधीन बनाता है, जिनका, अपनी प्रकृति के अनुसार या वाणिज्यिक प्रथा के अनुसार, ऐसे अनुबंधों के विषय से कोई संबंध नहीं होता; या
(ई) किसी एक प्रासंगिक बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का उपयोग करके किसी अन्य प्रासंगिक बाजार में प्रवेश करना या उसकी रक्षा करना। स्पष्टीकरण.-- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति--
(क) "प्रमुख स्थिति" से तात्पर्य भारत में संबंधित बाजार में किसी उद्यम द्वारा प्राप्त की गई ऐसी सुदृढ़ स्थिति से है, जो उसे निम्नलिखित कार्य करने में सक्षम बनाती है:--
(i) संबंधित बाजार में प्रचलित प्रतिस्पर्धी शक्तियों से स्वतंत्र रूप से कार्य करना; या
(ii) अपने प्रतिस्पर्धियों या उपभोक्ताओं या संबंधित बाजार को अपने पक्ष में प्रभावित करना;
(ख) "अत्यधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य" से तात्पर्य वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान से है, जो कि विनियमों द्वारा निर्धारित वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के प्रावधान की लागत से कम मूल्य पर की जाती है, जिसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को कम करना या प्रतिस्पर्धियों को समाप्त करना होता है;
4 [(ग) "समूह" का वही अर्थ होगा जो धारा 5 की व्याख्या के खंड (ख) में दिया गया है।]
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग होगा, यदि कोई उद्यम या समूह,--
(क) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यवहार थोपता है--
(i) माल या सेवा की खरीद या बिक्री में शर्त; या
(ii) वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में कीमत (जिसमें अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक कीमत भी शामिल है)। स्पष्टीकरण.-- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, उप-खंड (i) में निर्दिष्ट वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में अनुचित या भेदभावपूर्ण शर्त तथा उप-खंड (ii) में निर्दिष्ट वस्तुओं या सेवाओं की खरीद या बिक्री में अनुचित या भेदभावपूर्ण कीमत (जिसमें अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक कीमत भी शामिल है) में ऐसी कोई शर्त या कीमत शामिल नहीं होगी जिसे प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए अपनाया गया हो; या
(ख) सीमित करता है या प्रतिबंधित करता है--
(i) वस्तुओं का उत्पादन या सेवाओं का प्रावधान या उनके लिए बाजार; या
(ii) उपभोक्ताओं के हित में वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित तकनीकी या वैज्ञानिक विकास; या
(ग) किसी भी प्रकार से बाजार पहुंच से वंचित करने वाली प्रथाओं में लिप्त होता है; या
(घ) अनुबंधों के समापन को अन्य पक्षों द्वारा पूरक दायित्वों की स्वीकृति के अधीन बनाता है, जिनका, अपनी प्रकृति के अनुसार या वाणिज्यिक प्रथा के अनुसार, ऐसे अनुबंधों के विषय से कोई संबंध नहीं होता; या
(ई) किसी एक प्रासंगिक बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का उपयोग करके किसी अन्य प्रासंगिक बाजार में प्रवेश करना या उसकी रक्षा करना। स्पष्टीकरण.-- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति--
(क) "प्रमुख स्थिति" से तात्पर्य भारत में संबंधित बाजार में किसी उद्यम द्वारा प्राप्त की गई ऐसी सुदृढ़ स्थिति से है, जो उसे निम्नलिखित कार्य करने में सक्षम बनाती है:--
(i) संबंधित बाजार में प्रचलित प्रतिस्पर्धी शक्तियों से स्वतंत्र रूप से कार्य करना; या
(ii) अपने प्रतिस्पर्धियों या उपभोक्ताओं या संबंधित बाजार को अपने पक्ष में प्रभावित करना;
(ख) "अत्यधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य" से तात्पर्य वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान से है, जो कि विनियमों द्वारा निर्धारित वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के प्रावधान की लागत से कम मूल्य पर की जाती है, जिसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को कम करना या प्रतिस्पर्धियों को समाप्त करना होता है;
4 [(ग) "समूह" का वही अर्थ होगा जो धारा 5 की व्याख्या के खंड (ख) में दिया गया है।]
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