Competition Act 3अध्याय II · Prohibition of agreements
धारा 3 · प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई उद्यम या उद्यमों का संघ या व्यक्ति या व्यक्तियों का संघ माल के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, अधिग्रहण या नियंत्रण या सेवाओं के प्रावधान के संबंध में कोई समझौता नहीं करेगा, जिससे भारत के भीतर प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या पड़ने की संभावना है।
(2) उपधारा (1) में निहित प्रावधानों के उल्लंघन में किया गया कोई भी समझौता शून्य होगा।
(3) उद्यमों या उद्यमों के संघों या व्यक्तियों या व्यक्तियों के संघों के बीच या किसी व्यक्ति और उद्यम के बीच किया गया कोई समझौता, या किसी उद्यम संघ या व्यक्तियों के संघ द्वारा की गई कोई प्रथा या लिया गया कोई निर्णय, जिसमें समान या मिलते-जुलते वस्तुओं के व्यापार या सेवाओं के प्रावधान में लगे हुए कार्टेल शामिल हैं, जो--
(क) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीद या बिक्री मूल्य निर्धारित करता है;
(ख) उत्पादन, आपूर्ति, बाजारों, तकनीकी विकास, निवेश या सेवाओं के प्रावधान को सीमित या नियंत्रित करता है;
(ग) बाजार के भौगोलिक क्षेत्र, वस्तुओं या सेवाओं के प्रकार, बाजार में ग्राहकों की संख्या या किसी अन्य समान तरीके से बाजार या उत्पादन के स्रोत या सेवाओं के प्रावधान को साझा करता है;
(घ) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बोली में हेराफेरी या मिलीभगत से बोली लगाने का परिणाम हो,
इससे प्रतिस्पर्धा पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना मानी जाएगी:
बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात संयुक्त उद्यमों के माध्यम से किए गए किसी भी समझौते पर लागू नहीं होगी, यदि ऐसा समझौता वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, अधिग्रहण या नियंत्रण या सेवाओं के प्रावधान में दक्षता बढ़ाता है।
1. इसके अलावा, यदि कोई उद्यम या उद्यमों का संघ या कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का संघ समान या मिलते-जुलते व्यापार में संलग्न नहीं है, तब भी उसे इस उपधारा के अंतर्गत समझौते का हिस्सा माना जाएगा, यदि वह ऐसे समझौते को आगे बढ़ाने में भाग लेता है या भाग लेने का इरादा रखता है।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "बोली धांधली" का अर्थ उपधारा (3) में निर्दिष्ट उद्यमों या व्यक्तियों के बीच, समान या समरूप वस्तुओं के उत्पादन या व्यापार या सेवाओं के प्रावधान में संलग्न किसी भी समझौते से है, जिसका प्रभाव बोलियों के लिए प्रतिस्पर्धा को समाप्त करना या कम करना या बोली प्रक्रिया को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करना या उसमें हेरफेर करना है।
(4) 2 [उत्पादन श्रृंखला के विभिन्न चरणों या स्तरों पर, विभिन्न बाजारों में, उद्यमों या व्यक्तियों के बीच, उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, बिक्री या मूल्य निर्धारण, या वस्तुओं के व्यापार या सेवाओं के प्रावधान के संबंध में किए गए समझौते सहित, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं, कोई अन्य समझौता], जिसमें शामिल हैं--
(क) टाई-इन व्यवस्था;
(ख) अनन्य 3 [लेनदेन] समझौता;
(सी) अनन्य वितरण समझौता;
(घ) लेन-देन से इनकार;
(ई) पुनर्विक्रय मूल्य रखरखाव,
यदि ऐसा समझौता भारत में प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डालता है या डालने की संभावना है, तो वह उपधारा (1) का उल्लंघन करने वाला समझौता होगा।
4. [बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात किसी उद्यम और अंतिम उपभोक्ता के बीच किए गए समझौते पर लागू नहीं होगी।]
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,--
5 [(क) "टाई-इन व्यवस्था" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जिसमें माल या सेवाओं के खरीदार को, ऐसी खरीद की शर्त के रूप में, कुछ अन्य विशिष्ट माल या सेवाओं को खरीदने की आवश्यकता होती है;
(ख) "अनन्य सौदेबाजी समझौता" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जो क्रेता या विक्रेता, जैसा भी मामला हो, को अपने व्यापार के दौरान विक्रेता या क्रेता या किसी अन्य व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, के अलावा किसी अन्य वस्तु या सेवा को प्राप्त करने, बेचने या अन्यथा उससे संबंधित किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से प्रतिबंधित करता हो;]
(ग) "अनन्य वितरण समझौता" में किसी भी माल 6 [या सेवाओं] के उत्पादन या आपूर्ति को सीमित करने, प्रतिबंधित करने या रोकने या माल 6 [या सेवाओं] के निपटान या बिक्री के लिए किसी क्षेत्र या बाजार को आवंटित करने का कोई समझौता शामिल है;
(घ) "लेनदेन से इनकार" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जो किसी भी विधि से उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्गों को प्रतिबंधित करता है, या प्रतिबंधित करने की संभावना रखता है, जिन्हें माल 6 [या सेवाएं] बेची जाती हैं या जिनसे माल 6 [या सेवाएं] खरीदी जाती हैं;
(ई) "पुनर्विक्रय मूल्य रखरखाव" 7 [इसमें माल बेचने या सेवाएं प्रदान करने के किसी भी समझौते के मामले में, कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिबंध शामिल है] कि क्रेता द्वारा पुनर्विक्रय पर वसूले जाने वाले मूल्य विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य होंगे, जब तक कि यह स्पष्ट रूप से न कहा गया हो कि उन मूल्यों से कम मूल्य वसूले जा सकते हैं।
(5) इस धारा में निहित कोई भी बात प्रतिबंधित नहीं करेगी--
(i) किसी व्यक्ति को अपने किसी अधिकार के उल्लंघन को रोकने या उसकी रक्षा के लिए आवश्यक उचित शर्तें लगाने का अधिकार, जो उसे किसी अधिकार के अंतर्गत प्रदान किए गए हैं या किए जा सकते हैं--
(क) कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (14 ऑफ 1957);
(ख) पेटेंट अधिनियम, 1970 (39 ऑफ 1970);
(ग) व्यापार और माल चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) या व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47);
(घ) वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (1999 का 48);
(ई) डिजाइन अधिनियम, 2000 (16 ऑफ 2000);
(f) सेमी-कंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट लेआउट-डिजाइन अधिनियम, 2000 (37 ऑफ 2000);
8 [(जी) बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण से संबंधित कोई अन्य कानून जो उस समय लागू हो।]
(ii) भारत से माल निर्यात करने का किसी व्यक्ति का अधिकार उस सीमा तक सीमित रहेगा जहाँ तक समझौता विशेष रूप से माल के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या नियंत्रण या ऐसे निर्यात के लिए सेवाओं के प्रावधान से संबंधित है।
(2) उपधारा (1) में निहित प्रावधानों के उल्लंघन में किया गया कोई भी समझौता शून्य होगा।
(3) उद्यमों या उद्यमों के संघों या व्यक्तियों या व्यक्तियों के संघों के बीच या किसी व्यक्ति और उद्यम के बीच किया गया कोई समझौता, या किसी उद्यम संघ या व्यक्तियों के संघ द्वारा की गई कोई प्रथा या लिया गया कोई निर्णय, जिसमें समान या मिलते-जुलते वस्तुओं के व्यापार या सेवाओं के प्रावधान में लगे हुए कार्टेल शामिल हैं, जो--
(क) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीद या बिक्री मूल्य निर्धारित करता है;
(ख) उत्पादन, आपूर्ति, बाजारों, तकनीकी विकास, निवेश या सेवाओं के प्रावधान को सीमित या नियंत्रित करता है;
(ग) बाजार के भौगोलिक क्षेत्र, वस्तुओं या सेवाओं के प्रकार, बाजार में ग्राहकों की संख्या या किसी अन्य समान तरीके से बाजार या उत्पादन के स्रोत या सेवाओं के प्रावधान को साझा करता है;
(घ) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बोली में हेराफेरी या मिलीभगत से बोली लगाने का परिणाम हो,
इससे प्रतिस्पर्धा पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना मानी जाएगी:
बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात संयुक्त उद्यमों के माध्यम से किए गए किसी भी समझौते पर लागू नहीं होगी, यदि ऐसा समझौता वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, अधिग्रहण या नियंत्रण या सेवाओं के प्रावधान में दक्षता बढ़ाता है।
1. इसके अलावा, यदि कोई उद्यम या उद्यमों का संघ या कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का संघ समान या मिलते-जुलते व्यापार में संलग्न नहीं है, तब भी उसे इस उपधारा के अंतर्गत समझौते का हिस्सा माना जाएगा, यदि वह ऐसे समझौते को आगे बढ़ाने में भाग लेता है या भाग लेने का इरादा रखता है।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "बोली धांधली" का अर्थ उपधारा (3) में निर्दिष्ट उद्यमों या व्यक्तियों के बीच, समान या समरूप वस्तुओं के उत्पादन या व्यापार या सेवाओं के प्रावधान में संलग्न किसी भी समझौते से है, जिसका प्रभाव बोलियों के लिए प्रतिस्पर्धा को समाप्त करना या कम करना या बोली प्रक्रिया को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करना या उसमें हेरफेर करना है।
(4) 2 [उत्पादन श्रृंखला के विभिन्न चरणों या स्तरों पर, विभिन्न बाजारों में, उद्यमों या व्यक्तियों के बीच, उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, बिक्री या मूल्य निर्धारण, या वस्तुओं के व्यापार या सेवाओं के प्रावधान के संबंध में किए गए समझौते सहित, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं, कोई अन्य समझौता], जिसमें शामिल हैं--
(क) टाई-इन व्यवस्था;
(ख) अनन्य 3 [लेनदेन] समझौता;
(सी) अनन्य वितरण समझौता;
(घ) लेन-देन से इनकार;
(ई) पुनर्विक्रय मूल्य रखरखाव,
यदि ऐसा समझौता भारत में प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव डालता है या डालने की संभावना है, तो वह उपधारा (1) का उल्लंघन करने वाला समझौता होगा।
4. [बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात किसी उद्यम और अंतिम उपभोक्ता के बीच किए गए समझौते पर लागू नहीं होगी।]
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,--
5 [(क) "टाई-इन व्यवस्था" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जिसमें माल या सेवाओं के खरीदार को, ऐसी खरीद की शर्त के रूप में, कुछ अन्य विशिष्ट माल या सेवाओं को खरीदने की आवश्यकता होती है;
(ख) "अनन्य सौदेबाजी समझौता" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जो क्रेता या विक्रेता, जैसा भी मामला हो, को अपने व्यापार के दौरान विक्रेता या क्रेता या किसी अन्य व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, के अलावा किसी अन्य वस्तु या सेवा को प्राप्त करने, बेचने या अन्यथा उससे संबंधित किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से प्रतिबंधित करता हो;]
(ग) "अनन्य वितरण समझौता" में किसी भी माल 6 [या सेवाओं] के उत्पादन या आपूर्ति को सीमित करने, प्रतिबंधित करने या रोकने या माल 6 [या सेवाओं] के निपटान या बिक्री के लिए किसी क्षेत्र या बाजार को आवंटित करने का कोई समझौता शामिल है;
(घ) "लेनदेन से इनकार" में कोई भी ऐसा समझौता शामिल है जो किसी भी विधि से उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्गों को प्रतिबंधित करता है, या प्रतिबंधित करने की संभावना रखता है, जिन्हें माल 6 [या सेवाएं] बेची जाती हैं या जिनसे माल 6 [या सेवाएं] खरीदी जाती हैं;
(ई) "पुनर्विक्रय मूल्य रखरखाव" 7 [इसमें माल बेचने या सेवाएं प्रदान करने के किसी भी समझौते के मामले में, कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिबंध शामिल है] कि क्रेता द्वारा पुनर्विक्रय पर वसूले जाने वाले मूल्य विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य होंगे, जब तक कि यह स्पष्ट रूप से न कहा गया हो कि उन मूल्यों से कम मूल्य वसूले जा सकते हैं।
(5) इस धारा में निहित कोई भी बात प्रतिबंधित नहीं करेगी--
(i) किसी व्यक्ति को अपने किसी अधिकार के उल्लंघन को रोकने या उसकी रक्षा के लिए आवश्यक उचित शर्तें लगाने का अधिकार, जो उसे किसी अधिकार के अंतर्गत प्रदान किए गए हैं या किए जा सकते हैं--
(क) कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (14 ऑफ 1957);
(ख) पेटेंट अधिनियम, 1970 (39 ऑफ 1970);
(ग) व्यापार और माल चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) या व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 (1999 का 47);
(घ) वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (1999 का 48);
(ई) डिजाइन अधिनियम, 2000 (16 ऑफ 2000);
(f) सेमी-कंडक्टर इंटीग्रेटेड सर्किट लेआउट-डिजाइन अधिनियम, 2000 (37 ऑफ 2000);
8 [(जी) बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण से संबंधित कोई अन्य कानून जो उस समय लागू हो।]
(ii) भारत से माल निर्यात करने का किसी व्यक्ति का अधिकार उस सीमा तक सीमित रहेगा जहाँ तक समझौता विशेष रूप से माल के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या नियंत्रण या ऐसे निर्यात के लिए सेवाओं के प्रावधान से संबंधित है।
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