A&C Act 53अध्याय II · Geneva Convention Awards
धारा 53 · व्याख्या।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अध्याय में "विदेशी निर्णय" से तात्पर्य भारत में प्रचलित कानून के तहत वाणिज्यिक माने जाने वाले मामलों से संबंधित मतभेदों पर 28 जुलाई, 1924 के बाद दिए गए मध्यस्थता निर्णयों से है।
(क) मध्यस्थता के लिए किसी समझौते के अनुसरण में जिस पर दूसरी अनुसूची में निर्धारित प्रोटोकॉल लागू होता है, और
(ख) ऐसे व्यक्तियों के बीच, जिनमें से एक व्यक्ति ऐसी शक्तियों में से किसी एक के अधिकार क्षेत्र के अधीन है, जिन्हें केंद्र सरकार, पारस्परिक प्रावधानों के संबंध में संतुष्ट होने पर, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तीसरी अनुसूची में उल्लिखित सम्मेलन के पक्षकार घोषित कर सकती है, और दूसरा व्यक्ति उपर्युक्त शक्तियों में से किसी अन्य के अधिकार क्षेत्र के अधीन है, और
(ग) ऐसे किसी क्षेत्र में, जिसे केंद्र सरकार, पारस्परिक प्रावधानों से संतुष्ट होने पर, इसी प्रकार की अधिसूचना द्वारा, उक्त सम्मेलन के लागू होने वाले क्षेत्र घोषित कर सकती है।
और इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, किसी भी निर्णय को अंतिम नहीं माना जाएगा यदि उस निर्णय की वैधता को चुनौती देने के उद्देश्य से कोई कार्यवाही उस देश में लंबित हो जिसमें वह निर्णय दिया गया था।
(क) मध्यस्थता के लिए किसी समझौते के अनुसरण में जिस पर दूसरी अनुसूची में निर्धारित प्रोटोकॉल लागू होता है, और
(ख) ऐसे व्यक्तियों के बीच, जिनमें से एक व्यक्ति ऐसी शक्तियों में से किसी एक के अधिकार क्षेत्र के अधीन है, जिन्हें केंद्र सरकार, पारस्परिक प्रावधानों के संबंध में संतुष्ट होने पर, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, तीसरी अनुसूची में उल्लिखित सम्मेलन के पक्षकार घोषित कर सकती है, और दूसरा व्यक्ति उपर्युक्त शक्तियों में से किसी अन्य के अधिकार क्षेत्र के अधीन है, और
(ग) ऐसे किसी क्षेत्र में, जिसे केंद्र सरकार, पारस्परिक प्रावधानों से संतुष्ट होने पर, इसी प्रकार की अधिसूचना द्वारा, उक्त सम्मेलन के लागू होने वाले क्षेत्र घोषित कर सकती है।
और इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, किसी भी निर्णय को अंतिम नहीं माना जाएगा यदि उस निर्णय की वैधता को चुनौती देने के उद्देश्य से कोई कार्यवाही उस देश में लंबित हो जिसमें वह निर्णय दिया गया था।
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