A&C Act 29Aअध्याय VI · Making of arbitral award and termination of proceedings
धारा 29A · मध्यस्थता निर्णय के लिए समय सीमा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [29ए. मध्यस्थता पुरस्कार के लिए समय सीमा। -- 2 [(1) अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के अलावा अन्य मामलों में पुरस्कार मध्यस्थ न्यायाधिकरण द्वारा धारा 23 की उपधारा (4) के तहत दलीलों के पूरा होने की तिथि से बारह महीने की अवधि के भीतर दिया जाएगा:
बशर्ते कि अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के मामले में निर्णय यथाशीघ्र दिया जाए और धारा 23 की उपधारा (4) के तहत अभिवेदनों के पूर्ण होने की तिथि से बारह महीने की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाए।
(2) यदि मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा संदर्भ शुरू करने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर पुरस्कार दिया जाता है, तो मध्यस्थता न्यायाधिकरण अतिरिक्त शुल्क की ऐसी राशि प्राप्त करने का हकदार होगा जिस पर पक्षकार सहमत हों।
(3) पक्षकार, सहमति से, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि को अधिकतम छह माह की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकते हैं।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि या उपधारा (3) के अधीन निर्दिष्ट विस्तारित अवधि के भीतर निर्णय नहीं दिया जाता है, तो मध्यस्थों का दायित्व समाप्त हो जाएगा, जब तक कि न्यायालय ने निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पहले या बाद में अवधि को विस्तारित न किया हो:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत अवधि बढ़ाते समय, यदि न्यायालय यह पाता है कि कार्यवाही में विलंब मध्यस्थता न्यायाधिकरण के कारण हुआ है, तो वह विलंब के प्रत्येक माह के लिए मध्यस्थों के शुल्क में अधिकतम पाँच प्रतिशत की कटौती का आदेश दे सकता है।
3. इसके अतिरिक्त, यदि उपधारा (5) के अंतर्गत कोई आवेदन लंबित है, तो उक्त आवेदन के निपटारे तक मध्यस्थ का अधिकार क्षेत्र बना रहेगा:
इसके अलावा, शुल्क कम करने से पहले मध्यस्थ को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि का विस्तार किसी भी पक्षकार के आवेदन पर किया जा सकता है और यह केवल पर्याप्त कारण होने पर और न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों और नियमों के अनुसार ही प्रदान किया जा सकता है।
(6) उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि को बढ़ाते समय न्यायालय को एक या सभी मध्यस्थों को प्रतिस्थापित करने की छूट होगी और यदि एक या सभी मध्यस्थों को प्रतिस्थापित किया जाता है, तो मध्यस्थता कार्यवाही पहले से तय चरण से और पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य और सामग्री के आधार पर जारी रहेगी और इस धारा के तहत नियुक्त मध्यस्थों को उक्त साक्ष्य और सामग्री प्राप्त हुई मानी जाएगी।
(7) इस धारा के अधीन मध्यस्थ नियुक्त किए जाने की स्थिति में, इस प्रकार पुनर्गठित मध्यस्थ न्यायाधिकरण को पूर्व नियुक्त मध्यस्थ न्यायाधिकरण की निरंतरता में माना जाएगा।
(8) न्यायालय को इस धारा के अधीन किसी भी पक्ष पर वास्तविक या अनुकरणीय लागत लगाने की छूट होगी।
(9) उपधारा (5) के तहत दायर आवेदन का निपटारा न्यायालय द्वारा यथाशीघ्र किया जाएगा और प्रतिवादी को नोटिस की तामील की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
राज्य संशोधन
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)।--
धारा 29ए में संशोधन।-- (क) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:--
"(1) मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा संदर्भ पर विचार करने की तिथि से बारह महीने की अवधि के भीतर निर्णय दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, मध्यस्थ न्यायाधिकरण को उस तिथि से संदर्भ में प्रवेश किया हुआ माना जाएगा जिस तिथि को मध्यस्थ या सभी मध्यस्थों को, जैसा भी मामला हो, उनकी नियुक्ति की लिखित सूचना प्राप्त हुई हो।
(ख) उपधारा (4) में द्वितीय और तृतीय परंतुक हटा दिए जाएं।
[जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश , 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 1123(ई) दिनांक (18-3-2020) और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 3774(ई), दिनांक (23-10-2020) के अनुसार ।]
बशर्ते कि अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के मामले में निर्णय यथाशीघ्र दिया जाए और धारा 23 की उपधारा (4) के तहत अभिवेदनों के पूर्ण होने की तिथि से बारह महीने की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाए।
(2) यदि मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा संदर्भ शुरू करने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर पुरस्कार दिया जाता है, तो मध्यस्थता न्यायाधिकरण अतिरिक्त शुल्क की ऐसी राशि प्राप्त करने का हकदार होगा जिस पर पक्षकार सहमत हों।
(3) पक्षकार, सहमति से, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि को अधिकतम छह माह की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकते हैं।
(4) यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवधि या उपधारा (3) के अधीन निर्दिष्ट विस्तारित अवधि के भीतर निर्णय नहीं दिया जाता है, तो मध्यस्थों का दायित्व समाप्त हो जाएगा, जब तक कि न्यायालय ने निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पहले या बाद में अवधि को विस्तारित न किया हो:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत अवधि बढ़ाते समय, यदि न्यायालय यह पाता है कि कार्यवाही में विलंब मध्यस्थता न्यायाधिकरण के कारण हुआ है, तो वह विलंब के प्रत्येक माह के लिए मध्यस्थों के शुल्क में अधिकतम पाँच प्रतिशत की कटौती का आदेश दे सकता है।
3. इसके अतिरिक्त, यदि उपधारा (5) के अंतर्गत कोई आवेदन लंबित है, तो उक्त आवेदन के निपटारे तक मध्यस्थ का अधिकार क्षेत्र बना रहेगा:
इसके अलावा, शुल्क कम करने से पहले मध्यस्थ को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि का विस्तार किसी भी पक्षकार के आवेदन पर किया जा सकता है और यह केवल पर्याप्त कारण होने पर और न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों और नियमों के अनुसार ही प्रदान किया जा सकता है।
(6) उपधारा (4) में निर्दिष्ट अवधि को बढ़ाते समय न्यायालय को एक या सभी मध्यस्थों को प्रतिस्थापित करने की छूट होगी और यदि एक या सभी मध्यस्थों को प्रतिस्थापित किया जाता है, तो मध्यस्थता कार्यवाही पहले से तय चरण से और पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य और सामग्री के आधार पर जारी रहेगी और इस धारा के तहत नियुक्त मध्यस्थों को उक्त साक्ष्य और सामग्री प्राप्त हुई मानी जाएगी।
(7) इस धारा के अधीन मध्यस्थ नियुक्त किए जाने की स्थिति में, इस प्रकार पुनर्गठित मध्यस्थ न्यायाधिकरण को पूर्व नियुक्त मध्यस्थ न्यायाधिकरण की निरंतरता में माना जाएगा।
(8) न्यायालय को इस धारा के अधीन किसी भी पक्ष पर वास्तविक या अनुकरणीय लागत लगाने की छूट होगी।
(9) उपधारा (5) के तहत दायर आवेदन का निपटारा न्यायालय द्वारा यथाशीघ्र किया जाएगा और प्रतिवादी को नोटिस की तामील की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
राज्य संशोधन
जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश)।--
धारा 29ए में संशोधन।-- (क) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:--
"(1) मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा संदर्भ पर विचार करने की तिथि से बारह महीने की अवधि के भीतर निर्णय दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.-- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, मध्यस्थ न्यायाधिकरण को उस तिथि से संदर्भ में प्रवेश किया हुआ माना जाएगा जिस तिथि को मध्यस्थ या सभी मध्यस्थों को, जैसा भी मामला हो, उनकी नियुक्ति की लिखित सूचना प्राप्त हुई हो।
(ख) उपधारा (4) में द्वितीय और तृतीय परंतुक हटा दिए जाएं।
[जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश , 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 1123(ई) दिनांक (18-3-2020) और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) आदेश, 2020, अधिसूचना संख्या एसओ 3774(ई), दिनांक (23-10-2020) के अनुसार ।]
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
