A&C Act 47अध्याय I · New York Convention Awards
धारा 47 · प्रमाण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) विदेशी निर्णय को लागू कराने हेतु आवेदन करने वाला पक्ष, आवेदन के समय न्यायालय के समक्ष निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करेगा—
(क) मूल पुरस्कार या उसकी एक प्रति, जिस पर उस देश के कानून द्वारा निर्धारित विधि से प्रमाणीकरण किया गया हो जिसमें वह पुरस्कार दिया गया था;
(ख) मध्यस्थता के लिए मूल समझौता या उसकी विधिवत प्रमाणित प्रति; और
(सी) ऐसा साक्ष्य जो यह साबित करने के लिए आवश्यक हो कि पुरस्कार एक विदेशी पुरस्कार है।
(2) यदि उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किया जाने वाला पुरस्कार या समझौता किसी विदेशी भाषा में है, तो पुरस्कार को लागू करने का इच्छुक पक्षकार उस देश के राजनयिक या वाणिज्य दूतावास प्रतिनिधि द्वारा सही प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत करेगा, जिस देश से वह पक्षकार संबंधित है, या भारत में प्रचलित कानून के अनुसार पर्याप्त अन्य तरीके से सही प्रमाणित अनुवाद प्रस्तुत करेगा।
1 [ स्पष्टीकरण. —इस खंड में और इस अध्याय के बाद के खंडों में, "न्यायालय" से तात्पर्य उस उच्च न्यायालय से है जिसे मध्यस्थता निर्णय के विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नों का निर्णय करने का मूल अधिकार प्राप्त है, यदि वही प्रश्न उसके मूल दीवानी अधिकार क्षेत्र में किसी मुकदमे का विषय-वस्तु होता, और अन्य मामलों में, उस उच्च न्यायालय से है जिसे ऐसे उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों से अपील सुनने का अधिकार प्राप्त है।]
(क) मूल पुरस्कार या उसकी एक प्रति, जिस पर उस देश के कानून द्वारा निर्धारित विधि से प्रमाणीकरण किया गया हो जिसमें वह पुरस्कार दिया गया था;
(ख) मध्यस्थता के लिए मूल समझौता या उसकी विधिवत प्रमाणित प्रति; और
(सी) ऐसा साक्ष्य जो यह साबित करने के लिए आवश्यक हो कि पुरस्कार एक विदेशी पुरस्कार है।
(2) यदि उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किया जाने वाला पुरस्कार या समझौता किसी विदेशी भाषा में है, तो पुरस्कार को लागू करने का इच्छुक पक्षकार उस देश के राजनयिक या वाणिज्य दूतावास प्रतिनिधि द्वारा सही प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत करेगा, जिस देश से वह पक्षकार संबंधित है, या भारत में प्रचलित कानून के अनुसार पर्याप्त अन्य तरीके से सही प्रमाणित अनुवाद प्रस्तुत करेगा।
1 [ स्पष्टीकरण. —इस खंड में और इस अध्याय के बाद के खंडों में, "न्यायालय" से तात्पर्य उस उच्च न्यायालय से है जिसे मध्यस्थता निर्णय के विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नों का निर्णय करने का मूल अधिकार प्राप्त है, यदि वही प्रश्न उसके मूल दीवानी अधिकार क्षेत्र में किसी मुकदमे का विषय-वस्तु होता, और अन्य मामलों में, उस उच्च न्यायालय से है जिसे ऐसे उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों से अपील सुनने का अधिकार प्राप्त है।]
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